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Bhadohi News: ढाई करोड़ रिबोर पर खर्च, फिर भी हैंडपंप सूखे
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ज्ञानपुर। हैंडपंप रिबोर एवं मरम्मत के नाम पर ढाई करोड़ खर्च हो गए फिर भी हैंडपंप सूखे ही हैं। विभाग का दावा है कि 15 जून तक 660 हैंडपंपो को रिबोर, 1797 की मरम्मत कराई गई है। जबकि हकीकत यह है कि यह मरम्मत सिर्फ कागजों में ही हुआ है। अप्रैल, मई और जून की संभावित गर्मी को देखते हुए मार्च में पंचायती राज विभाग ने ब्लॉकों से सूची मांगी। इसमें 692 हैंडपंप रिबोर और 1860 मरम्मत लायक मिले। एक हैंडपंप को रिबोर करवाने में 32 हजार जबकि मरम्मत पर दो से ढाई हजार रुपये खर्च किया गया है। फिर भी किसी हैंडपंप का रॉड खराब है तो किसी से दूषित पानी आ रहा है। कुछ स्थानों पर तो हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है। डीघ ब्लॉक के सीकीचौरा, नवधन, इटहरा, धनतुलसी, सेमराध ग्राम पंचायत में हैंडपंप खराब मिले। औराई, भदोही और डीघ ब्लॉक में सबसे अधिक हैंडपंप खराब पाए गए।
केस-एक- औराई ग्राम पंचायत में 15 दिन पहले एक हैंडपंप को रिबोर किया गया। जरूरी उपकरण न लगने से वह अब भी पानी नहीं दे रहा है। पता किया गया तो उसके बोरिंग में सरिया चला गया है।
केस-दो- भदोही ब्लॉक के दरुनहां गांव में एक साल पहले से हैंडपंप खराब है। इसके रिबोर होने की बात कही गई। मौके पर जाकर देखने पर पता चला कि वह पानी नहीं दे रहा है।
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केस-तीन- भदोही के रोटहा गांव में तीन साल पूर्व विधायक निधि से हैंडपंप लगा। डेढ़ साल से हैंडपंप खराब है। रिबोर की सूची में उसका नाम है, लेकिन अब तक उसे सही नहीं किया गया।
ग्राम निधि से होता है रिबोर, प्रधान करते हैं खेल
ज्ञानपुर। हैंडपंप खराब होने पर, उसे रिबोर (पुनः बोरिंग) करने की आवश्यकता होती है। रिबोर का अर्थ है, पुराने हैंडपंप के नीचे वाले हिस्से को निकालकर, फिर से बोरिंग करना और नया हैंडपंप लगाना। यह प्रक्रिया जलस्तर को बनाए रखने या सुधारने के लिए की जाती है। गांव में ग्राम निधि से इसे कराया जाता है। इस पर 32 हजार तक खर्च आता है। कई ग्राम पंचायतों में रिबोर के नाम पर खेल भी होता है। पूर्व में ऐसी कमियां पकड़ी भी जा चुकी है। भ्रष्टाचार करने में कई प्रधान अपनी कुर्सी तक गवां चुके हैं। 12 ग्राम प्रधानों की जांच भी चल रही है।
- हैंडपंप रिबोर के दौरान फोटो अपलोड की जाती है। रिबोर में गड़बड़ी की संभावना नहीं है। एकाध मामले अपवाद हो सकते हैं। अगर कहीं कमियां हैं तो उसकी जांच कराई जाएगी।
संजय कुमार मिश्रा, डीपीआरओ
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केस-एक- औराई ग्राम पंचायत में 15 दिन पहले एक हैंडपंप को रिबोर किया गया। जरूरी उपकरण न लगने से वह अब भी पानी नहीं दे रहा है। पता किया गया तो उसके बोरिंग में सरिया चला गया है।
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केस-दो- भदोही ब्लॉक के दरुनहां गांव में एक साल पहले से हैंडपंप खराब है। इसके रिबोर होने की बात कही गई। मौके पर जाकर देखने पर पता चला कि वह पानी नहीं दे रहा है।
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केस-तीन- भदोही के रोटहा गांव में तीन साल पूर्व विधायक निधि से हैंडपंप लगा। डेढ़ साल से हैंडपंप खराब है। रिबोर की सूची में उसका नाम है, लेकिन अब तक उसे सही नहीं किया गया।
ग्राम निधि से होता है रिबोर, प्रधान करते हैं खेल
ज्ञानपुर। हैंडपंप खराब होने पर, उसे रिबोर (पुनः बोरिंग) करने की आवश्यकता होती है। रिबोर का अर्थ है, पुराने हैंडपंप के नीचे वाले हिस्से को निकालकर, फिर से बोरिंग करना और नया हैंडपंप लगाना। यह प्रक्रिया जलस्तर को बनाए रखने या सुधारने के लिए की जाती है। गांव में ग्राम निधि से इसे कराया जाता है। इस पर 32 हजार तक खर्च आता है। कई ग्राम पंचायतों में रिबोर के नाम पर खेल भी होता है। पूर्व में ऐसी कमियां पकड़ी भी जा चुकी है। भ्रष्टाचार करने में कई प्रधान अपनी कुर्सी तक गवां चुके हैं। 12 ग्राम प्रधानों की जांच भी चल रही है।
- हैंडपंप रिबोर के दौरान फोटो अपलोड की जाती है। रिबोर में गड़बड़ी की संभावना नहीं है। एकाध मामले अपवाद हो सकते हैं। अगर कहीं कमियां हैं तो उसकी जांच कराई जाएगी।
संजय कुमार मिश्रा, डीपीआरओ