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जिले में तीन हजार हैंडपंप खराब, गहराया पेयजल संकट
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कालीन नगरी में तीन हजार से अधिक हैंडपंप खराब हैं। इसके चलते गर्मी के शुरूआत में ही ग्रामीण अंचलों में पेयजल संकट गहराने लगा है। पूर्व में खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत नहीं होने से समस्या गंभीर होती जा रही है।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था बेहतर करने के लिए काफी संख्या में हैंडपंप लगाए गए हैं। जल निगम, सांसद निधि, विधायक निधि, जिला पंचायत, ब्लॉक प्रमुख समेत अन्य निधियों से जिले में एक लाख से अधिक हैंडपंप लगाए गए हैं। शासन स्तर से मिले बजट में पैसा बचाने के चक्कर में ठेकेदार निर्धारित गहराई तक बोरिंग नहीं करते हैं, इससे ज्यादातर हैंडपंप एक सीजन भी नहीं चल पाते हैं। कम बोरिंग होने के कारण या तो पानी गंदा आने लगता है या हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। जल निगम के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में करीब तीन हजार हैंडपंप रिबोर लायक हो चुके हैं। अभोली के गुआली, मोढ़ के कस्तूरीपुर, चकचंदा, नयनपुर, चौरी के लठियां, मानिकपुर, औराई के जूठूपुर, उपरौठ समेत तमाम गांवों में एक से पांच की संख्या तक हैंडपंप खराब होकर रिबोर योग्य हो गए हैं। मार्च की तपिश के बीच खराब हैंडपंपों ने आम जन की परेशानी बढ़ा दी है। चौरी बाजार में खराब हैंडपंपों की मरम्मत नहीं हो सकी है। बाजार में लगे अधिकांश हैंडपंप खराब हो गए हैं। बाजार के आधे हिस्से में पेयजल योजना के तहत लगे नलकूप से घर-घर जलापूर्ति होती है, लेकिन जलापूर्ति केवल सुबह के समय होती है। व्यापारी आशीष दुबे, बॉबी दुबे, शेखर यादव, दीपक दुबे, महेंद्र यादव ने बताया कि व्यापारिक केंद्र होने के बाद भी बाजार में पेयजल संकट लंबे समय से बना हुआ है। पूरे दिन बाजार में आने वाले पानी की तलाश में भटकते रहते हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता मुजीब अहमद का कहना है कि सीडीओ के निर्देश पर खराब हैंडपंपों की सूची बनाई जा रही है। खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत का काम ग्राम पंचायतों के अधीन हो चुका है। करीब तीन हजार हैंडपंप खराब होने का अनुमान है। अप्रैल में सभी को दुरुस्त कराने की कोशिश की जाएगी। डीपीआरओ बालेश धर द्विवेदी का कहना है कि ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी को खराब हैंडपंपों को ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं। एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है।
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ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था बेहतर करने के लिए काफी संख्या में हैंडपंप लगाए गए हैं। जल निगम, सांसद निधि, विधायक निधि, जिला पंचायत, ब्लॉक प्रमुख समेत अन्य निधियों से जिले में एक लाख से अधिक हैंडपंप लगाए गए हैं। शासन स्तर से मिले बजट में पैसा बचाने के चक्कर में ठेकेदार निर्धारित गहराई तक बोरिंग नहीं करते हैं, इससे ज्यादातर हैंडपंप एक सीजन भी नहीं चल पाते हैं। कम बोरिंग होने के कारण या तो पानी गंदा आने लगता है या हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। जल निगम के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में करीब तीन हजार हैंडपंप रिबोर लायक हो चुके हैं। अभोली के गुआली, मोढ़ के कस्तूरीपुर, चकचंदा, नयनपुर, चौरी के लठियां, मानिकपुर, औराई के जूठूपुर, उपरौठ समेत तमाम गांवों में एक से पांच की संख्या तक हैंडपंप खराब होकर रिबोर योग्य हो गए हैं। मार्च की तपिश के बीच खराब हैंडपंपों ने आम जन की परेशानी बढ़ा दी है। चौरी बाजार में खराब हैंडपंपों की मरम्मत नहीं हो सकी है। बाजार में लगे अधिकांश हैंडपंप खराब हो गए हैं। बाजार के आधे हिस्से में पेयजल योजना के तहत लगे नलकूप से घर-घर जलापूर्ति होती है, लेकिन जलापूर्ति केवल सुबह के समय होती है। व्यापारी आशीष दुबे, बॉबी दुबे, शेखर यादव, दीपक दुबे, महेंद्र यादव ने बताया कि व्यापारिक केंद्र होने के बाद भी बाजार में पेयजल संकट लंबे समय से बना हुआ है। पूरे दिन बाजार में आने वाले पानी की तलाश में भटकते रहते हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता मुजीब अहमद का कहना है कि सीडीओ के निर्देश पर खराब हैंडपंपों की सूची बनाई जा रही है। खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत का काम ग्राम पंचायतों के अधीन हो चुका है। करीब तीन हजार हैंडपंप खराब होने का अनुमान है। अप्रैल में सभी को दुरुस्त कराने की कोशिश की जाएगी। डीपीआरओ बालेश धर द्विवेदी का कहना है कि ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी को खराब हैंडपंपों को ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं। एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है।
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