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बदहाल आंगनबाड़ी केंद्रो की बदलेगी तस्वीर

Sat, 13 Aug 2022 05:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2022 05:57 PM IST
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The picture of the poor Anganbadi centers will change
ज्ञानपुर। कालीन नगरी के बदहाल आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत सुधरेगी। जर्जर हो चुके केंद्रों की मरम्मत होगी। इसके लिए शासन ने रिपोर्ट मांगी है। पहले चरण में 160 केंद्रों को चिह्नित किया है। कार्यदायी संस्था का चयन होने पर मरम्मत शुरू हो जाएगी।
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शिशु एवं मातृ मृत्यु दर रोकने के लिए सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों और धात्रियों को पोषणयुक्त सामग्री देने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से हर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। केंद्रों पर पोषाहार, दवाएं देने के साथ ही खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाया भी जाता है। करीब एक से डेढ़ दशक पूर्व से चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुविधाओं के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं, इनमें से अधिकांश पर मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। विभागीय आंकड़ों पर पर नजर डालें तो 1496 आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं तैनात हैं। जिसमें एक लाख 64 हजार के करीब जीरो से पांच वर्ष के बच्चे पंजीकृत हैं। जिले में 747 आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यालयों के भवनों और 174 पंचायत भवन में चल रहे हैं। इसके अलावा 369 आंगनबाड़ी केंद्र खुद के भवन में और 150 किराए के कमरे में संचालित हो रहे हैं। समुचित देखरेख नहीं होने से एक से डेढ़ दशक पूर्व बने आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन जर्जर हो चुके हैं। कई भवन तो बैठने लायक तक नहीं हैं। केंद्रों की बदहाली का आलम यह है कि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को हवा-पानी तक के लिए तरसना पड़ता है। विभाग के खुद के भवन में संचालित 369 आंगनबाड़ी केंद्रों में 109 में पानी की सुविधा नहीं जबकि 100 में शौचालय अब तक नहीं बन सका। 260 केंद्रों में तो बिजली की व्यवस्था नहीं हो सकी। अब ऐसे भवनों में जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए शासन गंभीर हो गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा ने कहा कि महीने भर पूर्व शासन स्तर से जर्जर केंद्रों की सूची मांगी गई थी। 160 केंद्रों की सूची भेज दी गई है। कार्यदायी संस्था का चयन होने पर केंद्रों के मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा।
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