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स्कूलों के कायाकल्प की रफ्तार हुई सुस्त

Tue, 31 May 2022 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 11:51 PM IST
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The pace of rejuvenation of schools slowed down
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की मुहिम सुस्त हो गई है। करीब पांच साल में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालयों में से मात्र 97 में ही 19 पैरामीटर पर कायाकल्य के कार्य हो पाए हैं। शासन और प्रशासन की सख्त हिदायत के बाद भी विद्यालयों के कायाकल्प के प्रति ग्राम पंचायत सचिव, प्रधान और प्रधानाध्यापक संजीदा नहीं हैं। इसके चलते अधिकांश विद्यालयों के कायाकल्प का काम पूरा नहीं हो पा रहा है।
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परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था चाक चौबंद रखने के लिए शासनस्तर से राज्य और केंद्रीय वित्त की धनराशि से कायाकल्प योजना के तहत सुंदरीकरण व अन्य व्यवस्था में सुधार की वर्ष 2017 में पहल की गई, लेकिन पांच साल से अधिक समय बीतने के बाद भी जिले के 200 से अधिक विद्यालयों की तस्वीर अब तक नहीं बदल सकी है। ग्राम पंचायतों ने कुछ जर्जर विद्यालय भवनों की मरम्मत, रंगाई-पोताई, इंटरलॉकिग के काम करा दिया, लेकिन 19 पैरामीटर के तहत अब तक सारे काम पूरे नहीं हो पाए हैं। मरम्मत के अभाव में विद्यालय भवन जीर्ण जर्जर हो रहे हैं। इस विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को भी दिक्कत हो रही है। इसके बाद भी प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव काम नहीं करा रहे हैं। यदि भवनों का प्लास्टर, छतों व दीवारों की मरम्मत आदि करा दी जाय तो भवन जर्जर होने से बच जाएंगे और बच्चों को सुविधा भी मिल जाएगी। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार 892 स्कूलों में से 97 में ही 19 पैरामीटर के तहत कार्य हो पाए हैं। इसके अलावा 18 पैरामीटर पूर्ण करने वाले 186 विद्यालय हैं, जबकि 17 पैरामीटर पूरा करने वाले विद्यालयों की संख्या 203 है। इसी तरह से 15 पैरामीटर पूरा कराने वाले 112 विद्यालय हैं। जिन विद्यालयों में सभी 19 पैरामीटर के तहत कार्य पूरे हो चुके हैं, उनकी तस्वीर बदल चुकी है, लेकिन अन्य की हालत ठीक नहीं है। ज्ञानपुर से सटे जोरईं, बैराखास, चककलूटी, नटवां सहित कई ऐसे विद्यालय हैं जो वर्तमान में कान्वेंट को मात दे रहे हैं, लेकिन भिदिउरा, भुड़की, रामापुर संग बड़ी संख्या में स्कूल ऐसे हैं, जहां गिने-चुने काम ही हो सके हैं। अगस्त 2022 तक सभी स्कूलों में 19 पैरामीटर के तहत सभी कार्य पूरे किए जाने हैं। तीन महीने में इतनी अधिक संख्या में विद्यालयों के कायाकल्प का काम पूरा करा पाना चुनौती साबित हो सकता है। प्रभारी बीएसए रमाकांत सिंह का कहना है कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। ग्राम पंचायत सचिव, प्रधान, बीडीओ से सामंजस्य बनाकर काम में तेजी लाई जा रही है। बीते 18 मई को डीएम की तरफ से बैठक में संबंधित विभागों को इस संबंध में सख्त निर्देश भी दिए गए हैं। उधर, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत प्रस्तावित कार्यों पर राज्य एवं 15वें वित्त से धनराशि खर्च की जाती है। पूर्व में ग्राम पंचायतें कायाकल्प के कार्य पर ही अच्छा खासा बजट खर्च करती थीं, लेकिन अब अमृत सरोवर संग अन्य कार्यों में अधिक खर्च होने से कायाकल्प के लिए कम धनराशि ही आवंटित हो पाती है। सुस्त गति से काम होने के पीछे इसे भी एक कारण माना जा रहा है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत इन पैरामीटर पर विद्यालयों के सुंदरीकरण के कार्य किए जाने हैं। इसके तहत शुद्ध सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, विद्यालय में नल-जल की आपूर्ति, बालक इज्जत घर, बालिका इज्जतघर, बालक मूत्रालय, बालिका मूत्रालय, इज्जतघर व मूत्रालय में जलापूर्ति, इज्जतघर का टाइलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, आधुनिक रसोईघर, कक्षा के फर्श का टाइलीकरण, श्यामपट, विद्यालय की रंगाई-पुताई, दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिंग, कक्षा कक्ष में वायरिंग व विद्युत उपकरण, विद्यालय का विद्युत संयोजन, बच्चों के लिए डेस्क व बेंच, विद्यालय की चहारदीवारी के निर्माण के कार्य कराए जाने हैं।
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