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महानगरों से शुरू हुआ प्रवासियों का पलायन
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ज्ञानपुर/ऊंज। कोरोना संक्रमण तेज होने पर अब महानगरों में रहने वाले प्रवासियों का गांवों की ओर पलायन शुरू हो गया है। राजमार्ग समेत पड़ोसी जिलों और सीमाओं को जोड़ने वाले मार्ग सीएनजी युक्त ऑटोरिक्शा से पटते जा रहे हैं। कोरोना महामारी के दूसरे दौर में डेढ़ माह बीतने के बाद भी न तो पश्चिमी सीमा ऊंज पर फोर्स की तैनाती हो सकी है न पूर्वी सीमा बाबूसराय में ही पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है।
इसके अलावा आटो में सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन कर जिले से वाराणसी की ओर बढ़ने वाले प्रवासी कब और कहां ठहराव लेंगे, कुछ नहीं कहा जा सकता। एक साथ दर्जन भर से अधिक आटो लेकर आने वालों से चाय-नाश्ता, चाट-फुल्की की दुकानों पर भी गाइड लाइन का पालन नहीं हो रहा है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को ऊंज, नवधन, वहिदानगर, जंगीगंज, कौलापुर, गोपीगंज, लालानगर टोलप्लाजा, नटवां, अमवांमाफी, कोठरा, महाराजगंज, जयरामपुर-घोसिया में रुके प्रवासियों को देखकर लोगों की चिंता बढ़ी रही।
इसी क्षेत्र के महावीर प्रसाद, मनोज, दिलीप, राहुल, प्रिंस आदि ने सवाल उठाया कि गत वर्ष की महामारी में अब तक जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के साथ दर्जनों स्थानों पर होमक्वारंटीन सेंटर स्थापित कर प्रवासियों की जांच कराने के बाद ही आगे बढ़ने दिया जा रहा था। साथ में सेंटरों में भोजन-पानी, दवा, बिस्तर की सुविधाएं उपलब्ध रहती थी। रिपोर्ट संदिग्ध आने पर तहसील स्तर पर तैनात नोडल अधिकारी प्रवासियों के लिए 14 दिन का ठहराव दिलाते थे ओर जाते समय उन्हें आटा, तेल, सोयाबीन, आलू, प्याज, मसाला, साबुन पंजीकरण कर उपलब्ध कराते रहे लेकिन इस बार नहीं। पूर्वी के छोर गैर प्रांतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले राजमार्ग तो जिले में आकर सुबह-शाम दुकानों पर दस्तक देने वाले मयआटो कभी भी देखे जा सकते हैं। यहां तक कि महाराष्ट्र, गुजरात में निजी वाहन लेकर कमाई करने वाले अब स्थानीय स्तर पर सामान ढोना शुरू कर दिए हैं। ब्लाक स्तर पर कार्यरत सीएचसी-पीएचसी के स्वास्थ्य कर्मी सब कुछ जानते हुए भी प्रवासियों की जानकारी जिला प्रशासन को देने में हिचकिचा रहे हैं। तहसीलदार सदर देवेंद्र कुमार यादव ने कहा कि जिला स्तरीय बैठक में सीमाओं को सील कराने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन के साथ सीमाओं पर चौकसी बरती जाएगी।
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इसके अलावा आटो में सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन कर जिले से वाराणसी की ओर बढ़ने वाले प्रवासी कब और कहां ठहराव लेंगे, कुछ नहीं कहा जा सकता। एक साथ दर्जन भर से अधिक आटो लेकर आने वालों से चाय-नाश्ता, चाट-फुल्की की दुकानों पर भी गाइड लाइन का पालन नहीं हो रहा है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को ऊंज, नवधन, वहिदानगर, जंगीगंज, कौलापुर, गोपीगंज, लालानगर टोलप्लाजा, नटवां, अमवांमाफी, कोठरा, महाराजगंज, जयरामपुर-घोसिया में रुके प्रवासियों को देखकर लोगों की चिंता बढ़ी रही।
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इसी क्षेत्र के महावीर प्रसाद, मनोज, दिलीप, राहुल, प्रिंस आदि ने सवाल उठाया कि गत वर्ष की महामारी में अब तक जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के साथ दर्जनों स्थानों पर होमक्वारंटीन सेंटर स्थापित कर प्रवासियों की जांच कराने के बाद ही आगे बढ़ने दिया जा रहा था। साथ में सेंटरों में भोजन-पानी, दवा, बिस्तर की सुविधाएं उपलब्ध रहती थी। रिपोर्ट संदिग्ध आने पर तहसील स्तर पर तैनात नोडल अधिकारी प्रवासियों के लिए 14 दिन का ठहराव दिलाते थे ओर जाते समय उन्हें आटा, तेल, सोयाबीन, आलू, प्याज, मसाला, साबुन पंजीकरण कर उपलब्ध कराते रहे लेकिन इस बार नहीं। पूर्वी के छोर गैर प्रांतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले राजमार्ग तो जिले में आकर सुबह-शाम दुकानों पर दस्तक देने वाले मयआटो कभी भी देखे जा सकते हैं। यहां तक कि महाराष्ट्र, गुजरात में निजी वाहन लेकर कमाई करने वाले अब स्थानीय स्तर पर सामान ढोना शुरू कर दिए हैं। ब्लाक स्तर पर कार्यरत सीएचसी-पीएचसी के स्वास्थ्य कर्मी सब कुछ जानते हुए भी प्रवासियों की जानकारी जिला प्रशासन को देने में हिचकिचा रहे हैं। तहसीलदार सदर देवेंद्र कुमार यादव ने कहा कि जिला स्तरीय बैठक में सीमाओं को सील कराने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन के साथ सीमाओं पर चौकसी बरती जाएगी।
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