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गंगा का कहर, चार गांवों में भूमि का कटान शुरू

Mon, 02 Aug 2021 09:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 09:21 PM IST
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The havoc of the Ganges, the cutting of land started in four villages
गंगा का जलस्तर बढ़ने से छेछुआ में होता कटान। संवाद - फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर/ सीतामढ़ी। गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से कोनिया क्षेत्र के इटहरा, मवैया थान सिंह, छेछुआ और भुर्रा गांव में गंगा कटान शुरू हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी मीटर गेज पर गंगा का जलस्तर 75.210 मीटर तक पहुंच गया है। जबकि खतरे के निशान 80 मीटर है। अब प्रति घंटे एक से दो सेंटीमीटर की वृद्धि हो रही है।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने से अति संवेदनशील तीन ओर गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र के चार गंगा तटीय गांव इटहरा, मवैयाथान सिंह, छेछुआ और भुर्रा गांव में धाराएं किसानों की उपजाऊ जमीनों को निगलना शुरू कर दिया है। पुरवा हवा के झोंकों से गंगा में उठने वाली लहरें जमीनों को काटना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि गंगा में बाढ़ आते ही उनकी उपजाऊ जमीनें गंगा की धारा में विलीन होने लगती हैं। जल स्तर बढ़ने से सीतामढ़ी के पक्की सीढ़ी तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। बाबा धवासा नाथ महादेव मंदिर गंगा घाट की चार पक्की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी कार्यालय से प्राप्त आंकड़े के अनुसार जल स्तर 75.210 मीटर पहुंच गया है। समाजसेवी पंकज मिश्रा, राजन शास्त्री, जिला द्विवेदी, डा.धर्मेन्द्र दूबे, सरकार बहादुर, अमृत लाल पाल आदि ने कटान रोकने की मांग जिलाधिकारी से की है।
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कोनिया के छेछुआ और भुर्रा गांव में गंगा कटान को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने पांच करोड़ रुपये जारी किया था। जिसका जिम्मा बंधी बाढ़ प्रखंड वाराणसी को दिया गया था। कार्यदायी संस्था ने तीन करोड़ रुपये खर्च कर लगभग ढाई किलोमीटर के गंगा तटीय क्षेत्र में आधुनिक तकनीकी वाली जिओ टेक्सटाइल ट्यूब कटर लगा कर छेछुआ और भुर्रा गांव को गंगा कटान से मुक्त का दावा किया, लेकिन कटान रोकने की अग्नि परीक्षा में कटान रोधी व्यवस्था पूरी तरह कारगर साबित नहीं दिख रहा है। छेछुआ के किसान हरीलाल यादव ने बताया कि कटान तो शुरू है, लेकिन कटान रोकने की व्यवस्था से कटान वाले एरिया में गंगा की धारा के रफ्तार में कमी आ गई है।
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