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आंगनबाड़ी और सहायिकाओं की नियुक्ति में खेल शुरू
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भदोही बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में होने वाली आंगनबाड़ी और सहायिकाओं की नियुक्ति में खेल शुरू हो गया है। शासनादेश के तहत प्रमोट होने वाली सहायिकाओं से विभागीय बाबू और कर्मचारी तालमेल बिठाने लगे हैं। इसको लेकर पूरी प्रक्रिया ही सवालों में घिरती जा रही है।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में छह बाल विकास परियोजनाओं में कुल 1492 आंगनबाड़ी एवं मिनी केंद्र संचालित हैं। शुरुआती दौर में आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति बाल विकास परियोजना में ही की जाती थी। विकास खंड डीघ सहित अन्य परियोजनाओं में व्यापक स्तर पर धांधली भी की गई थी। अभी भी कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की मूल फाइल ही गायब है। पोषाहार की कालाबाजारी करने पर ज्ञानपुर बाल विकास परियोजना में एक साथ 22 कार्यकर्ताओं का पद समाप्त कर दिया गया था। अब तक 180 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 400 से अधिक सहायिका का पद रिक्त है। शासन की ओर से नियुक्ति का निर्देश मिलने के बाद पुष्टाहार विभाग की ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।अब विभाग के बाबू और दलाल खेल करने में जुट गए हैं।
अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर शिकायत की। जिसमें आरोप लगाया कि शासनादेश में बिल्कुल स्पष्ट है की जिस गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति निकली है, उस गांव की सहायिका यदि हाई स्कूल उत्तीर्ण हो तो उसे वरीयता मिलेगी। यदि वह हाईस्कूल उत्तीर्ण नहीं है तो किसी विधवा का चयन होगा। इसमें आरक्षण का भी ध्यान रखा जाएगा। ऐसे में जिनकी नियुक्ति शत प्रतिशत होनी तय है उनसे दलाल और विभागीय बाबू संपर्क कर तालमेल बना रहे हैं। आश्वस्त कर रहे है कि जुगाड़ है हो जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि शासनादेश के तहत नियुक्ति होगी। अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने किसी से संपर्क न करने के लिए कहा।
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में छह बाल विकास परियोजनाओं में कुल 1492 आंगनबाड़ी एवं मिनी केंद्र संचालित हैं। शुरुआती दौर में आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति बाल विकास परियोजना में ही की जाती थी। विकास खंड डीघ सहित अन्य परियोजनाओं में व्यापक स्तर पर धांधली भी की गई थी। अभी भी कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की मूल फाइल ही गायब है। पोषाहार की कालाबाजारी करने पर ज्ञानपुर बाल विकास परियोजना में एक साथ 22 कार्यकर्ताओं का पद समाप्त कर दिया गया था। अब तक 180 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 400 से अधिक सहायिका का पद रिक्त है। शासन की ओर से नियुक्ति का निर्देश मिलने के बाद पुष्टाहार विभाग की ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।अब विभाग के बाबू और दलाल खेल करने में जुट गए हैं।
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अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर शिकायत की। जिसमें आरोप लगाया कि शासनादेश में बिल्कुल स्पष्ट है की जिस गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति निकली है, उस गांव की सहायिका यदि हाई स्कूल उत्तीर्ण हो तो उसे वरीयता मिलेगी। यदि वह हाईस्कूल उत्तीर्ण नहीं है तो किसी विधवा का चयन होगा। इसमें आरक्षण का भी ध्यान रखा जाएगा। ऐसे में जिनकी नियुक्ति शत प्रतिशत होनी तय है उनसे दलाल और विभागीय बाबू संपर्क कर तालमेल बना रहे हैं। आश्वस्त कर रहे है कि जुगाड़ है हो जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि शासनादेश के तहत नियुक्ति होगी। अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने किसी से संपर्क न करने के लिए कहा।
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