जिला पूर्ति विभाग ने ऐसे किसानों के नाम बने पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्डधारकों का सत्यापन शुरू कर दिया है जिन्होंने सरकार से राशन खरीद कर सरकार को ही बेच दिया है। मामला तूल पकड़ने पर विभाग ने गत दिनों 864 लोगों की सूची तैयार कर ब्लॉकवार सत्यापन भी शुरू कर दिया है। डीघ ब्लॉक के लगभग 100 लोगों के नाम राशन कार्ड की पात्रता सूची से बाहर होने पर भागदौड़ शुरू हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दौरान गत वर्ष खुले क्रय केंद्रों पर गेहूं की उपज का समर्थन मूल्य लेने और कोटे की दुकानों से सशुल्क व नि:शुल्क राशन का उठान कर कई लोगों ने उसी राशन की हेराफेरी कर सरकारी गोदामों तक पहुंचा दिया। ब्लॉक और तहसील स्तर पर हुए सत्यापन, कृषि विभाग में पंजीकरण के आधार पर जब आय की सीमा चार लाख से अधिक होने लगी तो विभाग ने शिकंजा कसना किया। विपणन विभाग से प्राप्त सूची में कुल 864 लोगों की वार्षिक आय 3.50 लाख से चार लाख रुपये तक सामने आई। डीएसओ सीमा सिंह ने बताया कि पात्र गृहस्थी राशन कार्ड के लिए वार्षिक आय सीमा ग्रामीण स्तर पर दो लाख, नगरीय क्षेत्र की सीमा तीन लाख है। ब्लॉकवार सत्यापन रिपोर्ट मिलने पर चार लाख रुपये से अधिक आय की सीमा पार करने वालों को राशन कार्ड की सूची से बाहर करने की तैयारी की जा रही है।