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छात्रों को तकनीकी रूप से दक्ष करना जरूरी
ब्यूरो ज्ञानपुर अमर उजाला
Updated Sat, 24 Jan 2015 02:30 AM IST
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बच्चों को मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार करने की जिम्मेदारी हम शिक्षकों की है।
ये बातें शुक्रवार को इंडियन इंस्टीट्यूट आफ कारपेट टेक्नालाजी (आईआईसीटी) के निदेशक प्रो.केके गोस्वामी ने जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों से कही। विद्यालय के 60 छात्र-छात्राओं को शुक्रवार को संस्था द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यशाला में आमंत्रित किया गया था।
निदेशक ने बच्चों से कहा कि विश्व में क्या हो रहा है, इस पर बारीकी से नजर रखें। विकास की संभावनाओं पर नजर रखने के साथ ही यह भी गौर करना चाहिए नई तकनीकी का आम जनजीवन पर क्या असर पर पड़ रहा है।
इससे विकास के रास्ते खुलेंगे। निदेशक ने कहा कि आईआईसीटी में बुलाने का उद्देश्य यही है कि बच्चे हस्त शिल्प के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक विकास को जानें और समझें।
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ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर खुद को पीछे न महसूस करें। उधर, दिन भर चली कार्यशाला में बच्चों ने कंप्यूटर डिजाइनिंग, यार्न स्पिनिंग, बुनाई, काती की रंगाई आदि के साथ ही कालीनों में लगने वाले परंपरागत गांठ को भी देखा।
उन्हें यह भी दिखाया गया कि किस प्रकार से हस्तशिल्प उत्पादन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसमें नई तकनीक का समावेश होता जा रहा है।
चीजों को नजदीक से देखने के बाद बच्चों ने निदेशक से सवाल भी पूछे। कार्यशाला के समापन पर सभी बच्चों को प्रशस्ति पत्र दिया गया।
बच्चों को एसके पाल, आरके मलिक, दीपंकर जना, मुमताज अंसारी, बीसी रे आदि ने जानकारी दी। कार्यक्रम कोआर्डिनेटर हिमांशु महामात्र ने भविष्य में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन देते हुए छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना की।
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ये बातें शुक्रवार को इंडियन इंस्टीट्यूट आफ कारपेट टेक्नालाजी (आईआईसीटी) के निदेशक प्रो.केके गोस्वामी ने जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों से कही। विद्यालय के 60 छात्र-छात्राओं को शुक्रवार को संस्था द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यशाला में आमंत्रित किया गया था।
निदेशक ने बच्चों से कहा कि विश्व में क्या हो रहा है, इस पर बारीकी से नजर रखें। विकास की संभावनाओं पर नजर रखने के साथ ही यह भी गौर करना चाहिए नई तकनीकी का आम जनजीवन पर क्या असर पर पड़ रहा है।
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इससे विकास के रास्ते खुलेंगे। निदेशक ने कहा कि आईआईसीटी में बुलाने का उद्देश्य यही है कि बच्चे हस्त शिल्प के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक विकास को जानें और समझें।
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ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर खुद को पीछे न महसूस करें। उधर, दिन भर चली कार्यशाला में बच्चों ने कंप्यूटर डिजाइनिंग, यार्न स्पिनिंग, बुनाई, काती की रंगाई आदि के साथ ही कालीनों में लगने वाले परंपरागत गांठ को भी देखा।
उन्हें यह भी दिखाया गया कि किस प्रकार से हस्तशिल्प उत्पादन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसमें नई तकनीक का समावेश होता जा रहा है।
चीजों को नजदीक से देखने के बाद बच्चों ने निदेशक से सवाल भी पूछे। कार्यशाला के समापन पर सभी बच्चों को प्रशस्ति पत्र दिया गया।
बच्चों को एसके पाल, आरके मलिक, दीपंकर जना, मुमताज अंसारी, बीसी रे आदि ने जानकारी दी। कार्यक्रम कोआर्डिनेटर हिमांशु महामात्र ने भविष्य में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन देते हुए छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना की।