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ईंट-भट्ठो से उड़ रहा प्रदूषण मानकों का धुआं

Fri, 01 Nov 2019 10:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 01 Nov 2019 10:42 PM IST
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Smoke flying pollution standards from brick and kilns
ज्ञानपुर। जिले में बिना मानक के संचालित ईंट भट्ठों की भरमार हो गई है। विभागीय कृपा से संचालित अवैध ईंट भट्ठे जिले की आबोहवा में जहर घोल रहे हैं। कई स्थानों पर ईंट भट्ठों के संचालक भट्ठों को विस्तार देकर सरकारी जमीन पर कब्जा भी कर रहे हैं। मोरवा और वरुणा नदी के कछार में संचालित भट्ठे नदी को ही अतिक्रमित कर रहे हैं।
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विकास की रफ्तार के बीच पर्यावरण को नजर अंदाज कर दिया जा रहा है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के साथ अन्य पहलुओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले में वैसे तो 189 ईंट-भट्ठे पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें 50 से अधिक ऐसे भट्ठे हैं, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों को नजरअंदाज कर संचालित हो रहे हैं। खनन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से तालमेल बिठाकर भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। एनजीटी और राज्य सरकार की ओर से भी बिना अनुज्ञप्ति के भट्ठा संचालन पर रोक है। बावजूद इसके ऐसे भट्ठों को चलाया जा रहा है। सबसे बुरी हालत ग्रामीण अंचलों में है। जहां बस्तियों के बीच, शिक्षण संस्थानों के समीप ही भट्ठा संचालित है। मोढ़ के कस्तूरीपुर बाजार का मामला हो या चौरी में वरुणा नदी के किनारे। हर जगह मानक के विपरीत भट्ठों का संचालन हो रहा है। ईंट-भट्ठा संचालन से पहले जिला खनन विभाग से अनुज्ञप्ति लेने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन के लिए आधे दर्जन सरकारी विभाग से एनओसी लेने की अनिवार्य शर्तें हैं, लेकिन, अधिसंख्य भट्ठा संचालक बिना एनओसी लिए ही विभागीय पदाधिकारी की मिलीभगत से संचालित कर रहे हैं। इसी तरह पर्यावरण संतुलन के लिए जिगजैग चिमनी बनाने के लिए कहा गया था, लेकिन वह भी कई संचालक नहीं बनवाए हैं। दरअसल, पुरानी चिमनियों वाले भट्ठों में आमतौर पर ईंट पकाने के लिए छल्लियों में सीधी गर्म हवा दी जाती है। पीपरगांव में सरकारी जमीन पर ही ईंट की कई साल से पथाई चल रही है। शिकायत के बाद एसडीएम मामले की जांच कर रहे है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एससी शुक्ला ने बताया कि चिमनियों से ईंधन का पूरा दहन नहीं हो पाता और भारी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड के रूप में काला धुआं उत्सर्जित होता है। एक लाख ईंट पकाने में 26 टन कोयला खर्च होता है। भट्ठों के प्रदूषण से खेती लायक जमीन बंजर हो जाती हैं और फसलों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। पर्यावरण के खतरे के साथ ही हरियाली का नुकसान पहुंचा है। फलदार पेड़ों में फल नही आते हैं और ऊंचाई वाले पेड़ो केला, आम के बाग आदि पर इसका खासा असर पड़ता है।
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मानक पूरा न करने वाले भट्ठों को नोटिस भेजा गया है। समय-समय पर ऐसे भट्ठों पर कार्रवाई भी की जाती है। अधिसंख्य भट्ठा संचालक कागजात दुरुस्त करा चुके हैं।
अरविंद यादव, खनन निरीक्षक
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