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तीन महीने में 40 प्रतिशत तक बढ़ गए सिल्क यार्न की कीमतें

Thu, 12 May 2022 10:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 10:54 PM IST
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Silk yarn prices increased by 40 percent in three months
भदोही। बीते तीन महीने में सिल्क की कीमतों ने कालीन निर्यातकों की परेशानी बढ़ा दी है। सिल्क यार्न की सबसे अच्छी क्वालिटी की कीमतें जो 600 से 4500 रुपये प्रति किलो थी वह अब बढ़कर 1000 से 6500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कीमतें बढ़ने से इसका उपयोग भी काफी गिर गया है। विदेशी खरीदारों से उचित कीमत नहीं मिल पाने से लोग नए आर्डर नहीं उठा रहे हैं। लोगों की चिंता इस हद तक बढ़ी है कि कालीन निर्यातकों के संगठन आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कीमतें काबू में रखने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। सिल्क कालीनों का मुख्य उत्पादन कश्मीर में होता है। लेकिन कालीन का मुख्य कारोबार भदोही-मिर्जापुर कालीन परिक्षेत्र में होने से कम ही सही यहां भी इसके कालीन बनने लगे हैं। मौजूदा दौर में महंगाई से त्रस्त कालीन निर्यातकों के लिए अपना लाभ बचा पाना मुश्किल हो गया है। इसका मुख्य कारण है यार्न की कीमतों में तेजी। यदि सिल्क कालीनों की बात करें तो तीन महीने पहले की दरों से आज की दरों में भारी अंतर आ गया है।
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नगर स्थित सिल्क यार्न के उत्पादक विनीत राय बताते हैं कि मलबरी सबसे अच्छी किस्म का सिल्क माना जाता तीन माह पूर्व मलबरी की कीमतें छह सौ रुपये किलो से 4500 रुपये तक थी। आज हालात यह हैं कि 1000 रुपये किलो से शुरू होकर 6500 रुपये किलो तक जा पहुंचा है। उन्होने बताया कि इसके चलते सिल्क यार्न का उत्पादन उन्हें 75 प्रतिशत तक घटानी पड़ी है। जिससे मजदूरों की संख्या सीमित करने की नौबत आ गई है। एकमा के मानद सचिव असलम महबूब ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्रक में इंडस्ट्री की परेशानी का जिक्र करते हुए कीमतें काबू में करने के लिए उपाय करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में लाखों मजदूर लगे हैं इसपर ध्यान देना चाहिए। इतना ही नहीं कीमतें बेतहाशा बढ़ने से उत्पादन लागत भी काफी ऊपर भाग गया है। इससे नए आर्डर लेने में भारी दुश्वारी हो रही है। कहा कि कीमतें भागने के कारणों का पता लगाकर कम करने के लिए प्रयास शुरू न किए गए तो निश्चित रूप से कालीन उद्योग घोर मंदी की चपेट में चला जाएगा।
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