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श्रीराम ने शिवधनुष तोड़ी
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
Updated Sun, 18 Oct 2015 01:42 AM IST
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गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने जब शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई तो वह खंड-खंड हो गई। इसके बाद समूचे ब्रह्मांड में कोहराम मच गया। क्रोधित परशुराम मिथिला पहुंचते हैं। इसके बाद परशुराम-लक्ष्मण संवाद प्रस्तुत किया गया।
इसमें परशुराम की तल्खी और लक्ष्मण की मनोविनोद पूर्ण बातें सुनकर श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। इससे पूर्व रामलीला रामलीला समिति के प्रधान संरक्षण डा. धीरेंद्र पांडेय ने राम-लक्ष्मण की आरती कर शुक्रवार की रामलीला की शुरुआत की।
इस मौके पर डा. पांडेय को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र दुबे राजन को भी सम्मानित किया गया।
उधर औराई के अमीरपट्टी की रामलीला में माता सीता के हरण के प्रसंग का मंचन किया गया। एक तरफ जहां राम के अयोध्या छोड़ते ही महाराज दशरथ ने प्राण त्याग दिया वहीं दूसरी ओर दंडक वन पहुंचते ही सीता का अपहरण हो गया।
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सीता को खोजते हुए भगवान श्रीराम इतने व्याकुल हो गए कि वृक्षों और लताओं से भी उनका पता पूछने लगे। अनुज लक्ष्मण व्याकुल प्रभु को संभालने में लगे रहे।
इसके साथ ही सुपर्णखा की नाक और कान काटने के प्रसंग का भी मंचन किया गया। गांव के ही कलाकारों ने दिखाया कि जब से प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीता चित्रकूट आए, वहां एक के बाद एक परेशानी आने लगीं।
एक दिन इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे के रूप में माता सीता को चोंच मार दी।
इसके बाद प्रभु ने उसके पीछे अग्निबाण छोड़ दिया। उसने भागते हुए तीनों लोकों का भ्रमण किया, लेकिन उसे किसी ने शरण नहीं दी। वह पुन: भगवान श्रीराम के समक्ष आकर शरणागत हो गया। दयावान श्रीराम ने उसका वध तो नहीं किया, लेकिन उसकी एक आंख फोड़ दी।
इसके बाद भगवान चित्रकूट छोड़कर दंडक वन में रहने लगे। इसके बाद कलाकारों ने नक्कटैया का जीवंत मंचन किया। रामलीला देखने के लिए देर रात तक लोग दीर्घा में जमे रहे।
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इसमें परशुराम की तल्खी और लक्ष्मण की मनोविनोद पूर्ण बातें सुनकर श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। इससे पूर्व रामलीला रामलीला समिति के प्रधान संरक्षण डा. धीरेंद्र पांडेय ने राम-लक्ष्मण की आरती कर शुक्रवार की रामलीला की शुरुआत की।
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इस मौके पर डा. पांडेय को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र दुबे राजन को भी सम्मानित किया गया।
उधर औराई के अमीरपट्टी की रामलीला में माता सीता के हरण के प्रसंग का मंचन किया गया। एक तरफ जहां राम के अयोध्या छोड़ते ही महाराज दशरथ ने प्राण त्याग दिया वहीं दूसरी ओर दंडक वन पहुंचते ही सीता का अपहरण हो गया।
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सीता को खोजते हुए भगवान श्रीराम इतने व्याकुल हो गए कि वृक्षों और लताओं से भी उनका पता पूछने लगे। अनुज लक्ष्मण व्याकुल प्रभु को संभालने में लगे रहे।
इसके साथ ही सुपर्णखा की नाक और कान काटने के प्रसंग का भी मंचन किया गया। गांव के ही कलाकारों ने दिखाया कि जब से प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीता चित्रकूट आए, वहां एक के बाद एक परेशानी आने लगीं।
एक दिन इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे के रूप में माता सीता को चोंच मार दी।
इसके बाद प्रभु ने उसके पीछे अग्निबाण छोड़ दिया। उसने भागते हुए तीनों लोकों का भ्रमण किया, लेकिन उसे किसी ने शरण नहीं दी। वह पुन: भगवान श्रीराम के समक्ष आकर शरणागत हो गया। दयावान श्रीराम ने उसका वध तो नहीं किया, लेकिन उसकी एक आंख फोड़ दी।
इसके बाद भगवान चित्रकूट छोड़कर दंडक वन में रहने लगे। इसके बाद कलाकारों ने नक्कटैया का जीवंत मंचन किया। रामलीला देखने के लिए देर रात तक लोग दीर्घा में जमे रहे।