ज्ञानपुर। तकरीबन सात महीने के बाद सोमवार को कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यालय खुल गए। इससे लंबे समय से सूने पड़े विद्यालय परिसर गुलजार हो गए। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए थे। छात्र-छात्राएं मॉस्क लगाकर विद्यालय पहुंचे। उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए दूर-दूर बैठाया गया। 9, 10 और 11, 12 के छात्र-छात्राओं को अलग-अलग पालियों में स्कूल बुलाया गया था। हालांकि पहले दिन उपस्थिति काफी कम रही।
मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन के कारण स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए थे। छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था शुरू की गई। मगर ऑनलाइन मोड अपेक्षाकृत कारगर साबित नहीं हो पाया। कहीं तकनीकी गड़बड़ी तो कहीं संसाधनों का अभाव छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में अड़ंगा बनता रहा। कुल मिलाकर कक्षा में उपस्थित होकर पढ़ाई न हो पाने का नुकसान छात्र-छात्राओं को झेलना पड़ा। यह बात दीगर है कि इस दौरान विद्यालयों की ओर से फीस की वसूली की जाती रही। 19 अक्तूबर से कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यालयों को कोविड-19 के मानक का ध्यान रखते हुए चलाने का निर्देश जारी किया गया। लिहाजा सोमवार को विद्यालय खुल गए। इस दौरान सैनिटाइजेशन से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान भी दिया गया। यद्यपि पहले दिन कक्षाओं में उपस्थिति बेहद कम रही। जिला पंचायत बालिका इंटर कॉलेज में सुबह की पाली में केवल 35 छात्राएं ही उपस्थित थीं, जबकि यहां इन कक्षाओं में संख्या तीन सौ के ऊपर है। इसी तरह वीएनजीआईसी में सुबह की पाली में केवल 120 विद्यार्थी ही उपस्थित थे। इससे समझा जा रहा था कि कोविड-19 का असर अब भी बच्चों और अभिभावकों के दिलो-दिमाग में छाया हुआ है। जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक चौरसिया ने कहा कि पूरे एहतियात के बीच नौ से 12 तक की कक्षाएं शुरू करा दी गईं हैं। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।