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घोटाले के आरोपी एडीओ पर कसेगा शिकंजा
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भदोही के डीघ ब्लॉक में घोटाले के आरोप में घिरे सहायक विकास अधिकारी अजय पांडेय की मुश्किलें कम नहीं हो रही। विभागीय कार्रवाई के लिए मुख्य विकास अधिकारी ने शासन को रिमाइंडर भेजा है। निलंबित सचिव के फंड ट्रांसफर आर्डर से 45.33 लाख के भुगतान के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और निलंबन की संस्तुति की गई है।
विकास खंड डीघ में तैनात सचिव नितेश वर्मा को 24 फरवरी को निलंबित कर दिया गया था। 27 फरवरी को निलंबन आदेश को खुद सहायक विकास अधिकारी अजय पांडेय ने रिसीव किया। इसके बाद भी निलंबित सचिव के फंड ट्रांसफर आर्डर से 45.33 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। यही नहीं कौलापुर की अपने खास एक फर्म को एक मुश्त 33 लाख का भुगतान कर दिया। ग्राम पंचायतों में नए प्रधानों के आने पर मामला सामने आया। तत्कालीन डीडीओ जयकेश त्रिपाठी ने 15 गांवों की जांच की तो खामियां पकड़ में आईं। जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 जुलाई को जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने जिला पंचायत राज अधिकरी को प्राथमिकी दर्ज कराने और रिकवरी का निर्देश दिया साथ ही निलंबित करने की भी संस्तुति की। करीब महीने भर से अधिक का समय गुजरने के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी।
मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने शासन को रिमाइंडर भेजकर प्रशासनिक कार्रवाई के लिए कहा है। सूत्रों का कहना है कि एडीओ पंचायत की पहुंच सत्ता के साथ ही साथ उच्चाधिकारियों तक है। उसकी हनक भी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। सीडीओ भानुप्रताप सिंह ने बताया कि मामला शासन में लंबित है। जिसके कारण रिमांडर भेजकर कार्रवाई के लिए कहा गया है।
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एडीओ के खिलाफ करीब महीने भर बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हो सका। थाने से लेकर जिला पंचायत राज विभाग के अफसर भी मामले को ठंडे बस्ते में डाले हैं। थाना प्रभारी कोइरौना का मानना है कि इस प्रकरण में अभी विधिक राय ली गई है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर विकास कामकाज देखने वाले प्रशासक एडीओ से लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी भी सरकारी बजट में जमकर झोल किया। डीघ के एडीओ अजय पांडेय इकलौते नहीं है। ग्राम पंचायत अधिकारी प्रदीप बिंद भी फंस गए हैं। कुसौड़ा, लालीपुर और महजूदा गांव में बजट खर्च होने के बाद भी काम पूर्ण नहीं हो सका। डीएम के निर्देश पर तत्कालीन डीडीओ जयकेश त्रिपाठी ने जांच किया। जिसमें ग्राम पंचायतों में 13 लाख से अधिक की धनराशि खर्च हो गया जबकि काम नहीं किया गया था। डीडीओ ने सेक्रेटरी पर कार्रवाई की संस्तुति कर डीपीआरओ को पत्र लिखा है। सीडीओ भानु प्रताप सिंह ने कहा कि डीपीआरओ ने प्रकरण में स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब मिलने पर सेक्रेटरी पर विभागीय कार्रवाई होगी।
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विकास खंड डीघ में तैनात सचिव नितेश वर्मा को 24 फरवरी को निलंबित कर दिया गया था। 27 फरवरी को निलंबन आदेश को खुद सहायक विकास अधिकारी अजय पांडेय ने रिसीव किया। इसके बाद भी निलंबित सचिव के फंड ट्रांसफर आर्डर से 45.33 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। यही नहीं कौलापुर की अपने खास एक फर्म को एक मुश्त 33 लाख का भुगतान कर दिया। ग्राम पंचायतों में नए प्रधानों के आने पर मामला सामने आया। तत्कालीन डीडीओ जयकेश त्रिपाठी ने 15 गांवों की जांच की तो खामियां पकड़ में आईं। जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 जुलाई को जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने जिला पंचायत राज अधिकरी को प्राथमिकी दर्ज कराने और रिकवरी का निर्देश दिया साथ ही निलंबित करने की भी संस्तुति की। करीब महीने भर से अधिक का समय गुजरने के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी।
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मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने शासन को रिमाइंडर भेजकर प्रशासनिक कार्रवाई के लिए कहा है। सूत्रों का कहना है कि एडीओ पंचायत की पहुंच सत्ता के साथ ही साथ उच्चाधिकारियों तक है। उसकी हनक भी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। सीडीओ भानुप्रताप सिंह ने बताया कि मामला शासन में लंबित है। जिसके कारण रिमांडर भेजकर कार्रवाई के लिए कहा गया है।
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एडीओ के खिलाफ करीब महीने भर बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हो सका। थाने से लेकर जिला पंचायत राज विभाग के अफसर भी मामले को ठंडे बस्ते में डाले हैं। थाना प्रभारी कोइरौना का मानना है कि इस प्रकरण में अभी विधिक राय ली गई है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर विकास कामकाज देखने वाले प्रशासक एडीओ से लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी भी सरकारी बजट में जमकर झोल किया। डीघ के एडीओ अजय पांडेय इकलौते नहीं है। ग्राम पंचायत अधिकारी प्रदीप बिंद भी फंस गए हैं। कुसौड़ा, लालीपुर और महजूदा गांव में बजट खर्च होने के बाद भी काम पूर्ण नहीं हो सका। डीएम के निर्देश पर तत्कालीन डीडीओ जयकेश त्रिपाठी ने जांच किया। जिसमें ग्राम पंचायतों में 13 लाख से अधिक की धनराशि खर्च हो गया जबकि काम नहीं किया गया था। डीडीओ ने सेक्रेटरी पर कार्रवाई की संस्तुति कर डीपीआरओ को पत्र लिखा है। सीडीओ भानु प्रताप सिंह ने कहा कि डीपीआरओ ने प्रकरण में स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब मिलने पर सेक्रेटरी पर विभागीय कार्रवाई होगी।