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सड़क हादसा : 20 महीने में 210 लोगों की हुई मौत, जान गंवाने वालों में 45 फीसदी युवा
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जंगीगंज का हॉटस्पाट किशुनदेवपुर जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती है। संवाद
जिले की सड़कों पर वाहनों की रफ्तार के साथ-साथ हादसे भी बढ़े हैं। जनवरी 2025 से अगस्त 2026 तक सड़क हादसों में 210 से अधिक लोगों ने जान गंवाई। इसमें 45 फीसदी यानी 95 युवाओं की मौत हुई है। हादसे में जान गंवाने वाले युवाओं की उम्र 20 से 45 साल के बीच थी। हर महीने 10 लोगों की सड़क हादसे में जान गई। प्रशासन हर साल हादसों को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा अभियान चलाता है। योजनाएं बनाता हैं। इसके बावजूद सड़क हादसे नहीं थम रहे। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2025 से 2026 में सड़क दुर्घटनाएं 5.36 फीसदी बढ़ी है।
जिले में ढाई हजार किलोमीटर सड़कों का जाल है। तेज रफ्तार, ओवरलोड वाहन, खराब सड़कें, अंधे मोड़, अवैध कट और यातायात नियमों की अनदेखी जिले में हादसे की मुख्य वजह है। जिले में 13 स्थान ब्लैक स्पॉट घोषित किए गए हैं। यहां सुरक्षा के इंतजाम अधूरे हैं न पर्याप्त संकेतक, न बैरियर, न ही रोशनी की ही समुचित व्यवस्था है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्रीकांत जायसवाल ने कहा कि केवल चालान काटने और अभियान चलाने से हादसे नहीं रुकेंगे, जहां दुर्घटना की संभावना ज्यादा है। उन स्थानों पर सड़क की इंजीनियरिंग में सुधार, स्पीड कंट्रोल, सड़क किनारे सुरक्षा बैरियर, प्रकाश व्यवस्था और प्रभावी निगरानी की जरूरत है। परिवहन विभाग के अनुसार, 2025 में जनवरी से दिसंबर तक 149 सड़क हादसे हुए जिसमें 107 ने जान गंवाई, जबकि 2026 में जनवरी से अगस्त तक 157 हादसों में 103 की मौत हुई। बीते 17 सितंबर को सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या 50 फीसदी तक कम करने के निर्देश दिए थे। बैठक में सामने आया कि प्रदेश में अगस्त 2025 की तुलना में अगस्त 2026 में मृतकों की संख्या दो फीसदी और घायलों की संख्या 4.3 फीसदी बढ़ी है। जिले में अगस्त 2025 में 12 तो 2026 में 14 ने जान गंवाई।
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ओवरस्पीड और लापरवाही हादसे की सबसे बड़ी वजह
परिवहन विभाग के मुताबिक जिले में अधिकांश सड़क हादसों के पीछे तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग मुख्य कारण है। हाईवे और प्रमुख मार्गों पर वाहन चालक निर्धारित गति सीमा की अनदेखी करते हैं। कई बार चालक मोबाइल फोन पर बात करते हुए या ओवरटेक करने के चक्कर में दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। भारी वाहन चालकों की लापरवाही भी हादसों की बड़ी वजह है। ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर और ओवरलोड वाहनों के कारण भी हादसे होते हैं।
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यहां हैं ब्लैक स्पाॅट
जिले के 13 ब्लैकस्पाॅट में 10 तो वाराणसी-प्रयागराज सिक्सलेन पर है। इसमें जंगीगंज, गोपीगंज चौराहा, लालानगर, चकपड़ौना, घोसियां, औराई चौराहा, कोठरा, नटवां, विक्रमपुर, तिऊरी शामिल है। मिर्जापुर-जौनपुर मार्ग पर सहसेपुर, बभनौटी और उगापुर को ब्लैक स्पाॅट बनाया गया है।
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हादसों के बाद सबसे बड़ी चुनौती बनता है गोल्डन ऑवर
सड़क दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। इस दौरान समय पर इलाज मिल जाए तो गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है, लेकिन जिले के ट्रॉमा सुविधाओं की कमी के कारण घायलों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। कई मामलों में लोग घंटों सड़क पर तड़पते रहते हैं। यदि हाईवे और प्रमुख मार्गों पर त्वरित चिकित्सा सहायता की व्यवस्था मजबूत हो जाए तो मौतों का आंकड़ा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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वाहन चालक ध्यान दें
- निर्धारित गति सीमा का पालन करें।
- दोपहिया वाहन पर हेलमेट और चारपहिया में सीट बेल्ट जरूर लगाएं।
- ओवरटेक केवल सुरक्षित स्थान पर करें।
- नशे की हालत में वाहन न चलाएं।
- मोबाइल फोन का प्रयोग करते हुए ड्राइविंग न करें।
- रात में डिपर और हेडलाइट का सही इस्तेमाल करें।
- ब्लैक स्पॉट और अंधे मोड़ पर विशेष सावधानी बरतें।
- थकान महसूस होने पर वाहन रोककर आराम करें।
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दो साल में हुए हादसों की संख्या
साल - दुर्घटना - मृतक - घायल
2026 - 157 - 103 - 305 अगस्त तक
2025 - 149 - 107 - 350 दिसंबर तक
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केस-एक- हाईवे पर जंगीगंज के पास किशुनदेवपुर ब्लैकस्पाॅट है। यहां एक साल में 10 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। जिसमें चार की मौत हो गई जबकि 12 लोग घायल हुए। अभी तक यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं हुए।
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केस-दो- औराई के कोठरा के पास हाईवे मोड़ भी ब्लैकस्पाॅट है। एक साल में यहां 15 से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें पांच लोगों की जान जा चुकी है जबकि कई घायल हुए। यहां भी संकेतक, लाइटें आदि नहीं लगी हैं।
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क्या बोले ग्रामीण
- जहां सड़क हादसे अधिक होते हैं वहां संकेतक अवश्य लगना चाहिए, लेकिन किशुनदेवपुर में अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई।- कलेक्टर यादव, जंगीगंज।
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सड़क हादसों पर रोक लगना जरूरी है। प्रमुख स्थानों पर लाइट और संकेतक अवश्य होना चाहिए। - इंद्रजीत, जंगीगंज।
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वर्जन
सड़क हादसे रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। 90 फीसदी दुर्घटनाएं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने के कारण होता है। चालक नियमों का पालन करें तो हादसे स्वयं कम हो जाएंगे। जिन ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं वहां पर संकेतक लगवाए जाएंगे। - राम सिंह, एआरटीओ।
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जिले में ढाई हजार किलोमीटर सड़कों का जाल है। तेज रफ्तार, ओवरलोड वाहन, खराब सड़कें, अंधे मोड़, अवैध कट और यातायात नियमों की अनदेखी जिले में हादसे की मुख्य वजह है। जिले में 13 स्थान ब्लैक स्पॉट घोषित किए गए हैं। यहां सुरक्षा के इंतजाम अधूरे हैं न पर्याप्त संकेतक, न बैरियर, न ही रोशनी की ही समुचित व्यवस्था है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्रीकांत जायसवाल ने कहा कि केवल चालान काटने और अभियान चलाने से हादसे नहीं रुकेंगे, जहां दुर्घटना की संभावना ज्यादा है। उन स्थानों पर सड़क की इंजीनियरिंग में सुधार, स्पीड कंट्रोल, सड़क किनारे सुरक्षा बैरियर, प्रकाश व्यवस्था और प्रभावी निगरानी की जरूरत है। परिवहन विभाग के अनुसार, 2025 में जनवरी से दिसंबर तक 149 सड़क हादसे हुए जिसमें 107 ने जान गंवाई, जबकि 2026 में जनवरी से अगस्त तक 157 हादसों में 103 की मौत हुई। बीते 17 सितंबर को सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या 50 फीसदी तक कम करने के निर्देश दिए थे। बैठक में सामने आया कि प्रदेश में अगस्त 2025 की तुलना में अगस्त 2026 में मृतकों की संख्या दो फीसदी और घायलों की संख्या 4.3 फीसदी बढ़ी है। जिले में अगस्त 2025 में 12 तो 2026 में 14 ने जान गंवाई।
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ओवरस्पीड और लापरवाही हादसे की सबसे बड़ी वजह
परिवहन विभाग के मुताबिक जिले में अधिकांश सड़क हादसों के पीछे तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग मुख्य कारण है। हाईवे और प्रमुख मार्गों पर वाहन चालक निर्धारित गति सीमा की अनदेखी करते हैं। कई बार चालक मोबाइल फोन पर बात करते हुए या ओवरटेक करने के चक्कर में दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। भारी वाहन चालकों की लापरवाही भी हादसों की बड़ी वजह है। ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर और ओवरलोड वाहनों के कारण भी हादसे होते हैं।
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यहां हैं ब्लैक स्पाॅट
जिले के 13 ब्लैकस्पाॅट में 10 तो वाराणसी-प्रयागराज सिक्सलेन पर है। इसमें जंगीगंज, गोपीगंज चौराहा, लालानगर, चकपड़ौना, घोसियां, औराई चौराहा, कोठरा, नटवां, विक्रमपुर, तिऊरी शामिल है। मिर्जापुर-जौनपुर मार्ग पर सहसेपुर, बभनौटी और उगापुर को ब्लैक स्पाॅट बनाया गया है।
हादसों के बाद सबसे बड़ी चुनौती बनता है गोल्डन ऑवर
सड़क दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। इस दौरान समय पर इलाज मिल जाए तो गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है, लेकिन जिले के ट्रॉमा सुविधाओं की कमी के कारण घायलों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। कई मामलों में लोग घंटों सड़क पर तड़पते रहते हैं। यदि हाईवे और प्रमुख मार्गों पर त्वरित चिकित्सा सहायता की व्यवस्था मजबूत हो जाए तो मौतों का आंकड़ा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
वाहन चालक ध्यान दें
- निर्धारित गति सीमा का पालन करें।
- दोपहिया वाहन पर हेलमेट और चारपहिया में सीट बेल्ट जरूर लगाएं।
- ओवरटेक केवल सुरक्षित स्थान पर करें।
- नशे की हालत में वाहन न चलाएं।
- मोबाइल फोन का प्रयोग करते हुए ड्राइविंग न करें।
- रात में डिपर और हेडलाइट का सही इस्तेमाल करें।
- ब्लैक स्पॉट और अंधे मोड़ पर विशेष सावधानी बरतें।
- थकान महसूस होने पर वाहन रोककर आराम करें।
दो साल में हुए हादसों की संख्या
साल - दुर्घटना - मृतक - घायल
2026 - 157 - 103 - 305 अगस्त तक
2025 - 149 - 107 - 350 दिसंबर तक
केस-एक- हाईवे पर जंगीगंज के पास किशुनदेवपुर ब्लैकस्पाॅट है। यहां एक साल में 10 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। जिसमें चार की मौत हो गई जबकि 12 लोग घायल हुए। अभी तक यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं हुए।
केस-दो- औराई के कोठरा के पास हाईवे मोड़ भी ब्लैकस्पाॅट है। एक साल में यहां 15 से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें पांच लोगों की जान जा चुकी है जबकि कई घायल हुए। यहां भी संकेतक, लाइटें आदि नहीं लगी हैं।
क्या बोले ग्रामीण
- जहां सड़क हादसे अधिक होते हैं वहां संकेतक अवश्य लगना चाहिए, लेकिन किशुनदेवपुर में अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई।- कलेक्टर यादव, जंगीगंज।
सड़क हादसों पर रोक लगना जरूरी है। प्रमुख स्थानों पर लाइट और संकेतक अवश्य होना चाहिए। - इंद्रजीत, जंगीगंज।
वर्जन
सड़क हादसे रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। 90 फीसदी दुर्घटनाएं लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने के कारण होता है। चालक नियमों का पालन करें तो हादसे स्वयं कम हो जाएंगे। जिन ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं वहां पर संकेतक लगवाए जाएंगे। - राम सिंह, एआरटीओ।