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100 शय्या अस्पताल निर्माण में धांधली, ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज कराएं :डीएम
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ज्ञानपुर। जिलाधिकारी विशाल सिंह ने बुधवार को 11 बजे निर्माणाधीन 100 शय्या संयुक्त चिकित्सालय सरपतहां का औचक निरीक्षण किया। जहां काम अत्यंत धीमी गति से होते मिला। मैनपॉवर की संख्या अत्यंत ही न्यून मिली, जिससे कार्य समय से पूरा हो पाना संभव नहीं होता दिख रहा है। निर्माणाधीन कार्य में जिस ईंट का प्रयोग किया जा रहा है वह तृतीय श्रेणी की पाई गई। इसके साथ ही सीमेंट, बालू को मिक्स करके चिनाई कार्य भी गुणवत्ता पूर्ण नहीं मिला। इस पर कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक को ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। निरीक्षण में चिकित्सा अधीक्षक समेत सात स्वास्थ्यकर्मी भी अनुपस्थित मिले। इनका वेतन रोककर स्पष्टीकरण मांगा गया।
सरपतहां में करीब डेढ़ दशक पूर्व से सौ शय्या अस्पताल का निर्माण हो रहा है। पहले भी भ्रष्टाचार के कारण अस्पताल पूर्ण रूप से नहीं बन सका। कई साल तक कामकाज ठप रहा, लेकिन अब नए सिरे से अधूरे कार्य को पूर्ण कराया जा रहा है। बुधवार को निर्माण कार्य को देखने के लिए डीएम पहुंचे, जहां कमियां मिलने पर नाराजगी जताई। अस्पताल के निरीक्षण में सीएमएस डॉ. सुनील कुमार पासवान नहीं मिले। पता चला कि वह मिर्जापुर बैठक में गए हैं।
डीएम ने उपस्थिति पंजिका का अवलोकन किया, जिसमें चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. शैलेंद्र विक्रम, डेंटल सर्जन अरविंद प्रताप, कमलेश कुमार, शीरिन सीमा, प्रिया शुक्ला, माग्रेट मैरी विलियम और राजकुमारी अनुपस्थित मिलीं। सभी स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया गया।
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डाॅ. सुशील कुमार शुक्ला, शशिलता पटेल ने 25, 26 और 27 तक उपस्थित पंजिका में सीएल अंकित किया है, लेकिन प्रार्थना पत्र नहीं मिले। अस्पताल के फार्मासिस्ट आलोक पांडेय, स्टाफ नर्स रानू मौर्य, रूपाली सिंह, शशिकला एक नवंबर से अनुपस्थित है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। जिस पर डीएम ने नाराजगी जताई। अधीक्षक से जवाब-तलब किया। कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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इनसेट
तालमेल से चलती है ड्यूटी
स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने को लेकर सरकार जहां गंभीर है, वहीं अफसर और स्वास्थ्यकर्मी ही इसका बंटाधार कर रहे हैं। इसकी बानगी बुधवार को देखने को मिली। 100 शय्या अस्पताल में डीएम के निरीक्षण से भले ही चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों की पोल खुल गई, लेकिन यह स्थिति कई साल से चल रही है। खुद की तरफ से तैयार किए गए रोस्टर से सभी अस्पताल आते हैं। सप्ताह में तीन-तीन दिन या एक-एक सप्ताह और महीने-महीने का रोस्टर तय होता है। अस्पताल में मरीजों को सुविधाएं मिले या नहीं, उपचार हो या नहीं इससे चिकित्सकों और कर्मचारियों को कोई मतलब नहीं है। उनकी तो सिर्फ उपस्थिति पंजिका में मौजूदगी दिखनी चाहिए।
सरपतहां में करीब डेढ़ दशक पूर्व से सौ शय्या अस्पताल का निर्माण हो रहा है। पहले भी भ्रष्टाचार के कारण अस्पताल पूर्ण रूप से नहीं बन सका। कई साल तक कामकाज ठप रहा, लेकिन अब नए सिरे से अधूरे कार्य को पूर्ण कराया जा रहा है। बुधवार को निर्माण कार्य को देखने के लिए डीएम पहुंचे, जहां कमियां मिलने पर नाराजगी जताई। अस्पताल के निरीक्षण में सीएमएस डॉ. सुनील कुमार पासवान नहीं मिले। पता चला कि वह मिर्जापुर बैठक में गए हैं।
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डीएम ने उपस्थिति पंजिका का अवलोकन किया, जिसमें चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. शैलेंद्र विक्रम, डेंटल सर्जन अरविंद प्रताप, कमलेश कुमार, शीरिन सीमा, प्रिया शुक्ला, माग्रेट मैरी विलियम और राजकुमारी अनुपस्थित मिलीं। सभी स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया गया।
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डाॅ. सुशील कुमार शुक्ला, शशिलता पटेल ने 25, 26 और 27 तक उपस्थित पंजिका में सीएल अंकित किया है, लेकिन प्रार्थना पत्र नहीं मिले। अस्पताल के फार्मासिस्ट आलोक पांडेय, स्टाफ नर्स रानू मौर्य, रूपाली सिंह, शशिकला एक नवंबर से अनुपस्थित है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। जिस पर डीएम ने नाराजगी जताई। अधीक्षक से जवाब-तलब किया। कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने को लेकर सरकार जहां गंभीर है, वहीं अफसर और स्वास्थ्यकर्मी ही इसका बंटाधार कर रहे हैं। इसकी बानगी बुधवार को देखने को मिली। 100 शय्या अस्पताल में डीएम के निरीक्षण से भले ही चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों की पोल खुल गई, लेकिन यह स्थिति कई साल से चल रही है। खुद की तरफ से तैयार किए गए रोस्टर से सभी अस्पताल आते हैं। सप्ताह में तीन-तीन दिन या एक-एक सप्ताह और महीने-महीने का रोस्टर तय होता है। अस्पताल में मरीजों को सुविधाएं मिले या नहीं, उपचार हो या नहीं इससे चिकित्सकों और कर्मचारियों को कोई मतलब नहीं है। उनकी तो सिर्फ उपस्थिति पंजिका में मौजूदगी दिखनी चाहिए।