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मुसहर बोलकर प्रसव कराने से इनकार: ईएमओ की सेवा समाप्त, कांग्रेस ने ट्वीट कर उठाए सवाल; शासन को भेजा गया पत्र

Thu, 01 Oct 2026 07:23 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, भदोही।
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 01 Oct 2026 07:23 PM IST
सार

भदोही जिला अस्पताल के बाहर प्रसव के मामले में 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की गई। ईएमओ की सेवा समाप्त कर दी गई, जबकि सीएमएस और महिला डॉक्टर के खिलाफ शासन को पत्र भेजा गया है। प्रसूति रोग विशेषज्ञ का वेतन रोकने के साथ स्टॉफ नर्स का स्थानांतरण किया गया। मामले में अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।

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Refusal conduct delivery citing Musahar caste EMO services terminated letter sent to administration
कांग्रेस ने ट्वीट कर उठाए सवाल। - फोटो : संवाद

विस्तार

'मुसहर' बोलकर प्रसव कराने से इनकार करने और जिला अस्पताल के ठीक सामने सड़क पर हुए प्रसव मामले में 24 घंटे के भीतर बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को इमरजेंसी में तैनात ईएमओ डॉ. पंकज की सेवा समाप्त कर दी गई है। वहीं सीएमएस डॉ. अजय तिवारी व महिला चिकित्सक डॉ. नीलीमा धवन के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। प्रसूती रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का वेतन रोक दिया गया है। वहीं स्टॉफ नर्स नीलम मौर्य का स्थानांतरण कर दिया गया है।

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महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल ज्ञानपुर में मंगलवार की देर रात प्रसव पीड़ा के बाद एबुलेंस से पहुंची जोरई निवासी वनवासी समुदाय की 20 वर्षीय गर्भवती महिला रानी को अस्पताल पहुंचने के बाद अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने भर्ती लेने से मना कर दिया। परिजनों का आरोप था कि मुसहर बताकर उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। 

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परिजन उसे लेकर निकल ही रहे थे कि इस बीच अस्पताल के सामने ही उसकी प्रसव पीड़ा तेज हो गई और परिजनों ने आनन-फानन में सड़क के किनारे ही चादर की ओट में रानी का प्रसव कराया। मामले को लेकर परिजन समेत स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया। 

सीएमओ डॉ. एसके चक ने मामले की जानकारी के बाद तत्काल गांव में पहुंचकर प्रसूता व बच्चे को साथ लेकर आए और अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं लापरवाही को लेकर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय टीम गठित कर दी। जिसमें एसीएमओ डॉ. ओपी शुक्ला, डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष सरोज, भदोही सीएचसी की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी पाठक व एक अन्य स्वास्थ्यकर्मी रहे। 

टीम ने बुधवार को पूरे दिन पूछताछ करने के बाद देर शाम सीएमओ को रिपोर्ट सौंपी। जिसके बाद सीएमओ ने जिलाधिकारी शैलेश कुमार को रिपोर्ट सौंपी। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद सीएमओ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ईएमओ, सीएमएस, महिला चिकित्सक, प्रसूती रोग विशेषज्ञ और स्टॉफ नर्स पर कार्रवाई की है।

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किसकी क्या मिली गड़बड़ी?
प्रसूता जब अस्पताल में पहुंची तो उस समय रात में ईएमओ डॉ. पंकज की ही ड्यूटी थी। अस्पताल से प्रसूता के जाने और अस्पताल के बाहर प्रसव के दौरान ईएमओ की शिथिलता नजर आई। ईएमओ ने बिना प्रसूता को देखे ही पर्ची पर रेफर कर दिया। वहीं वनवासियों के कम पढ़े-लिखे होने की स्थिति में स्वास्थ्यकर्मियों ने एबुलेंस क्यों नहीं बुलाया। इस मामले में ईएमओ की लापरवाही को देखते हुए उसकी सेवा समाप्त कर दी गई।

सीएमएस डॉ. अजय तिवारी और महिला चिकित्सक डॉ. नीलमा धवन मामले को लेकर गंभीर नजर नहीं आए। एक दिन पहले जब प्रसूता अस्पताल पहुंची तो नीलीमा धवन ने उसे देखा था। खून की कमी के बाद भी मामले की गंभीरता से नहीं लिया और मरीज को भर्ती करने की बजाय उसे रेफर कर दिया। वहीं सीएमएस पूरे मामले को लेकर लापरवाह बने रहे। जिस पर दोनों के खिलाफ डीएम ने शासन को पत्र लिखा है।

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Refusal conduct delivery citing Musahar caste EMO services terminated letter sent to administration
पीड़िता रानी को देखने पहुंचे लोग। - फोटो : संवाद

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का ऑनकाल रहना चाहिए था। प्रसव के मामले में इसको लेकर सीएमओ का स्पष्ट निर्देश है, लेकिन पूरे मामले के दौरान वे जनपद के बाहर थे और पूरी घटना के डेढ घंटे बाद अस्पताल पहुंचे। जिसके बाद इनका सितंबर माह वेतन रोक कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

अस्पताल पहुंचने के बाद स्टॉफ नर्स नीलम मौर्या लेबर रूम में नहीं थी। वह इमरजेंसी में बैठी थी। जब परिजन प्रसूता को लेकर पहुंचे तो वह कथित रूप से उसे मुहसर बताकर भर्ती लेने से मना कर दिया और बिना मरीज को लिए ही रेफर पर्ची बनवाने ईएमओ के पास गई। जिस पर इनका वेतन रोकते हुए औराई सीएचसी स्थानांतरण कर दिया गया।

9.8 ग्राम तक पहुंचा प्रसूता का हीमोग्लोबीन, जच्चा-बच्चा स्वस्थ्य
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती रानी व उसकी नवजात बेटी दोनों स्वस्थ्य है। दो दिनों से वे लगातार चिकित्सकों की निगरानी में हैं। बुधवार को दिनभर उसका उपचार चलता रहा। वहीं बृहस्पतिवार को रानी का हालचाल लेने के लिए अधिकारी व जनप्रतिनिधि पहुंचते रहे। लगातार चिकित्सकीय देखरेख में मौजूद रानी का हीमोग्लोबीन चार ग्राम से बढ़कर 9.8 ग्राम तक पहुंच गया है। डॉ. मुकेश प्रजापित ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ है। सपा जिलाध्यक्ष प्रदीप यादव, हसनैन अंसारी, धनी यादव समेत अन्य लोग प्रसूता व बच्चे का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे।

जिसकी सबसे बड़ी गलती, उसका केवल स्थानांतरण!
पूरे मामले स्टॉफ नर्स नीलम मौर्या की गलती सबसे बड़ी नजर आ रही है। मरीज के पहुंचने के बाद कथित रूप से मुहसर होने का हवाला देकर भर्ती लेने से इनकार तो किया ही, बिना मरीज को लिए ही ईएमओ के पास रेफर पर्ची बनवाने गई थी। ऐसे में उसका केवल वेतन रोककर स्थानांतरण ही किया गया है।

कांग्रेस ने खड़े किए सवाल
प्रसूता के जिला अस्पताल के बाहर प्रसव को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के आधिकारिक एक्स अकाउंट से इसको लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। कांग्रेस के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर प्रसव के दौरान का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा गया है कि मुसहर हो...नहीं कराएंगे डिलीवरी, - ये बात उस प्रेंग्नेंट महिला से कही गई, जो डिलीवरी के लिए यूपी के एक सरकारी अस्पताल पहुंची थी। जब अस्पताल में महिला को एडमिट करने से मना कर दिया, तो मजबूरी में उन्हें सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। ये घटना सबूत है बीजेपी सरकार में दलितों-आदिवासियों के साथ कैसा अमानवीय सलूक किया जाता है। मानवता को शर्मसार करती ऐसी घटनाएं बीजेपी सरकार की पहचान बन चुकी है, लेकिन मोदी-योगी को अपनी फर्जी डींगें हांकने से फुर्सत कहां हैं। शर्मनाक.....।
 

मामले में जांच के गठित टीम ने रिपोर्ट सौंपी थी। जिसे जिलाधिकारी को सौंपा गया है। प्रसव के मामले में बरती गई अनियमितता को लेकर जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम के निर्देश के बाद कार्रवाई की गई है। सीएमएस और महिला चिकित्सक के खिलाफ शासन को पत्र लिखा गया है। प्रसूता चिकित्सकों की निगरानी में है। जच्चा व बच्चा, दोनों स्वस्थ हैं। - डॉ. एसके चक, सीएमओ।

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