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लेखपाल के निलंबन और अपात्रों पर केस की संस्तुति
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ज्ञानपुर। एक धूर जमीन न होने के बाद भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ लेने वाले तीन अपात्रों और लेखपाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एएसडीएम की जांच आख्या पर डीएम राजेंद्र प्रसाद ने लेखपाल के निलंबन की संस्तुति की जबकि अपात्रों पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया। डीएम का निर्देश मिलते ही कृषि विभाग कार्रवाई में जुट गया।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। एक धूर जमीन न होने के बाद जिले में 450 लाभार्थियों ने योजना की पांच किस्त प्राप्त कर ली। अमर उजाला ने 27 मई के अंक में पीएम किसान में 42.50 लाख का घपला शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। प्रकरण में सदौपुर गांव के तीन किसानों ने जमीन न होने के बाद भी लेखपाल से साठगांठ कर फीडिंग करा ली। मामले की शिकायत पर डीएम ने अपर उप जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश यादव को जांच सौंपी। जांच में शिकायत सही मिली।
डीएम राजेंद्र प्रसाद ने योजना में हो रही धांधली को संज्ञान में लिया। एसडीएम भदोही को लेखपाल के निलंबन और अपात्रों के खिलाफ केस दर्ज कराने की संस्तुति करते हुए उप निदेशक कृषि को निर्देश दिया। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि डीएम का पत्र मिल गया है। दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू हुई थी। लोकसभा चुनाव के कारण शुरुआती दौर में आनन-फानन में आवेदन जमा किए गए। पहले चरण में एक लाख 20 हजार किसानों ने आवेदन किया। 90 हजार से अधिक लाभार्थियों के खाते में दो-दो हजार की पहली किस्त भेजी गई। दूसरी, तीसरी और चौथी किस्त आने के बाद जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर कृषि दफ्तर में शिकायतें आनी शुरू हुईं।
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शासन की गाइडलाइन मिलने पर कृषि विभाग की ओर से जांच शुरू की गई, जिसमें 450 ऐसे लाभार्थी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेते मिले, जिनके पास एक धूर भी जमीन नहीं है। राजस्व कर्मियों से तालमेल बनाकर आवेदन कर सभी योजना का लाभ ले रहे थे। विभाग ने जब तक उन पर कार्रवाई शुरू की तब तक अपात्र सरकार का 42 लाख डकार चुके थे, हालांकि डीएम की कड़े रुख से ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। एक धूर जमीन न होने के बाद जिले में 450 लाभार्थियों ने योजना की पांच किस्त प्राप्त कर ली। अमर उजाला ने 27 मई के अंक में पीएम किसान में 42.50 लाख का घपला शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। प्रकरण में सदौपुर गांव के तीन किसानों ने जमीन न होने के बाद भी लेखपाल से साठगांठ कर फीडिंग करा ली। मामले की शिकायत पर डीएम ने अपर उप जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश यादव को जांच सौंपी। जांच में शिकायत सही मिली।
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डीएम राजेंद्र प्रसाद ने योजना में हो रही धांधली को संज्ञान में लिया। एसडीएम भदोही को लेखपाल के निलंबन और अपात्रों के खिलाफ केस दर्ज कराने की संस्तुति करते हुए उप निदेशक कृषि को निर्देश दिया। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि डीएम का पत्र मिल गया है। दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू हुई थी। लोकसभा चुनाव के कारण शुरुआती दौर में आनन-फानन में आवेदन जमा किए गए। पहले चरण में एक लाख 20 हजार किसानों ने आवेदन किया। 90 हजार से अधिक लाभार्थियों के खाते में दो-दो हजार की पहली किस्त भेजी गई। दूसरी, तीसरी और चौथी किस्त आने के बाद जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर कृषि दफ्तर में शिकायतें आनी शुरू हुईं।
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शासन की गाइडलाइन मिलने पर कृषि विभाग की ओर से जांच शुरू की गई, जिसमें 450 ऐसे लाभार्थी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेते मिले, जिनके पास एक धूर भी जमीन नहीं है। राजस्व कर्मियों से तालमेल बनाकर आवेदन कर सभी योजना का लाभ ले रहे थे। विभाग ने जब तक उन पर कार्रवाई शुरू की तब तक अपात्र सरकार का 42 लाख डकार चुके थे, हालांकि डीएम की कड़े रुख से ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।