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अहिल्या का उद्धार कर मिथिला पहुंचे राम, छाई खुशियां

Tue, 27 Sep 2022 06:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 27 Sep 2022 06:03 PM IST
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Ram reached Mithila after rescuing Ahilya, happiness prevailed
ज्ञानपुर/औराई। नवरात्र शुरू होने के साथ ही जिले के ज्यादातर समितियों की ओर से रामलीला मंचन शुरू हो गया है। कोविड के कारण दो साल बाद शुरू हो रही रामलीला देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
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औराई के अमीरपट्टी में हो रही रामलीला के तीसरे दिन सीता जन्म, अहिल्या उद्धार, गंगा अवतरण, मीना बाजार और फुलवारी की लीला का मंचन हुआ।
मिथिला में सूखे को देख गुरु के आदेश से महाराज जनक और महारानी सुनैना ने हल चलाया। जहां पृथ्वी से एक कन्या प्राप्त हुई। उसी समय देवर्षि नारद पहुंचकर राजा जनक को भाग्यशाली बताते हैं। उधर, विश्वामित्र का यज्ञ पूरा कराने के बाद जैसे ही राम लक्ष्मण आगे बढ़ते हैं तो एक शीला पर प्रभु श्रीराम का पैर पड़ जाता है। जहां वह एक नारी के रूप में सामने प्रस्तुत हो जाती है। महर्षि विश्वामित्र ने बताया कि यह अहिल्या है, जो श्राप के चलते पत्थर बन गई थी। आज आपके चरण पड़ते ही इसका उद्धार हो गया। विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण मिथिला पहुंचते हैं। जहां महाराज जनक सेवा सत्कार करते हैं।
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घोसिया। घोसिया की प्रसिद्ध रामलीला में भगवान राम के जन्म का कलाकारों ने मंचन किया। पुत्र न होने पर राजा दशरथ काफी व्यथित हो जाते हैं। ऋषि के कहने पर यज्ञ किया और राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत का जन्म होता है। इससे मंच जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। सौरभ बरनवाल की ओर से सेठौरा का वितरण किया गया। इसके बाद ऋषि विश्वामित्र यज्ञ रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को राजा दशरथ से मांगते हैं। इस मौके पर कुंदन बरनवाल, दिलीप, नंदलाल, राजेश आदि रहे।
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ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की ऐतिहासिक रामलीला सोमवार से शुरू हो गई। पहले दिन विधि विधान पूर्वक पं. उमेश तिवारी नोे मुकुट पूजा कराया। समिति के अध्यक्ष कैलाश पति शुक्ला संग अन्य सदसय शामिल हुए। जय श्री बजरंग रामलीला मंडल सोनभद्र से आए कलाकारों ने नारद मोह, रावण जन्म पर मंचन किया। इस मौके पर आनंद कुमार श्रीवास्तव, छेदीलाल गुप्ता, घनश्याम मिश्रा, विनीत श्रीवास्तव आदि रहे।

सुरियावां। नगर के रामलीला मैदान में सोमवार से रामलीला मंचन शुरू हो गया। अयोध्या से आए कलाकारों ने राम जन्म और विश्वामित्र आगमन का मंचन किया। व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष शेषधर गुप्ता ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। लंका में रावण, कुंभकर्ण और विभीषण का जन्म हुआ। तीनों भाईयों ने घोर तपस्या कर त्रिदेव से वर मांगे। उसके बाद रावण पूरे ब्रह्मांड में ऋषियों को परेशान करने लगा। दूसरी ओर अयोध्या में राजा दशरथ के यहां पुत्रेष्टि यज्ञ करने के बाद राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। अयोध्या में खुशियां छा जाती है। राक्षसों से रक्षा के लिए विश्वामित्र दशरथ से राम-लक्ष्मण को मांगते हैं। गुरू वशिष्ठ के समझाने पर दशरथ ऋषि के साथ दोनों भाइयों को भेज देते हैं। इस मौके पर राधेश्याम गुप्ता, अवधेश ऊमर, अश्वनी साहू, नंदलाल गुप्ता, छेदीलाल गुप्ता, घनशयाम, दिलीप आदि रहे।
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