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20 दिन से बारिश के पानी में बिलबिला रहे 50 गांव
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ज्ञानपुर। गत माह 24-25 सितंबर से शुरू होकर हफ्तेभर तक कहर बरपाने वाली बारिश का असर तकरीबन 20 दिन बाद भी ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बना है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने से झील बने 50 से अधिक गांवों की लगभग एक लाख आबादी महक रहे ठहरे पानी में बिलबिला रही है। दर्जन भर से अधिक विद्यालयों के परिसरों में जलजमाव के कारण पढ़ाई-लिखाई ठप है। इससे एक हजार से अधिक नौनिहालों का भविष्य अंधकार में पड़ता दिख रहा है। प्रशासनिक अमला मौन साधे हुए है। जलजमाव प्रभावित गांवों की सुध लेने की जहमत भी किसी ने नहीं उठाई।
बारिश के बाद अब भी दर्जनों गांवों में जलजमाव की समस्या ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बनी है। खेतीबारी चौपट होने के साथ ही रोजमर्रा की जिंदगी बेपटरी हो गई है। कई गांवों के रास्ते कमर तक पानी में डूबने के कारण उनके संपर्क मुख्य मार्ग से कट गए हैं। लोगों को जरूरत के सामान लेने के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। सबसे बुरी हालत डीघ ब्लॉक के निचले इलाके में आबाद गांवों की है। बिगहिया, चकसारनाथ, पूरेभान, हरिहरपुरसानी, पिलखुना, पूरेनगरी, विश्वनाथपुर, सोबरी, बयांव, मुदरी, रोही आदि गांवों में भारी जलजमाव के चलते जनजीवन बेपटरी हो गया है। प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिगहिया, पिलखुना, हरिहरपुरसानी, सोबरी, चौरा कला समेत लगभग दर्जनभर गांवों के परिषदीय विद्यालयों में पानी भर गया है। इससे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। पखवारेभर का समय गुजरने के बाद भी न तो जलनिकासी का इंतजाम किया गया, ना ही बच्चों की बर्बाद होती पढ़ाई को तरजीह दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक किसी अधिकारी ने इस समस्या की ओर देखने की भी जहमत नहीं उठाई। पूरेभान के पूर्व प्रधान शैलेश कुमार शुक्ला कहते हैं कि गांव में त्राहि-त्राहि मची है, लेकिन किसी को फिक्र ही नहीं है। पूरेभान गांव में पंचायत भवन के सामने घुटने के ऊपर तक पानी जमा है। पंचायत भवन में पहुंचना मुश्किल है। गांवों के ट्यूबवेल भी पानी में डूब गए हैं। इससे उनका चल पाना संभव नहीं हो पा रहा। एक तरफ जलजमाव कहर बरपा रहा है तो दूसरी ओर लोगों की जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण संसाधन उसकी वजह से काम नहीं कर रहे। ऐसे में लोग तड़प रहे हैं।
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2000 बीघे फसल डूबकर चौपट, रोटी-दाल के पड़ेंगे लाले
ज्ञानपुर। पूर्व सांसद रामरति बिंद की 15 बीघे, पिलखुना गांव के गोपीनाथ तिवारी की 10 बीघे, चकसारनाथ के सभापति शुक्ला की 10 बीघे फसल समेत जलजमाव प्रभावित गांवों में किसानों की तकरीबन दो हजार बीघे तैयार फसल पानी में पूरी तरह डूब चुकी है। इससे बड़े-बड़े किसानों के सामने आने वाले समय में मुश्किलें आने वाली हैं। शेषमणि शुक्ला, लालता प्रसाद चौबे, जनार्दन ओझा, लालसाहब यादव आदि किसानों का कहना है कि प्रकृति के कोप का भाजन हो रहे ग्रामीणों की राहत के बारे में सोचने वाला कोई नहीं। तैयार फसल नष्ट हो गई। इस समस्या के स्थायी समाधान के बारे में सोचना चाहिए।
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मुसहर बस्ती जलमग्न, सड़क पर घूम रहे रहवासी
मोढ़। बाजार में लगभग एक वर्ष पूर्व थाना बनाने के लिए प्रस्तावित जमीन पर भारी जलभराव के कारण वहां रह रहे मुसहर बिरादरी के लोग भी बेघर हो गए हैं। बस्ती के लोग सड़क पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पहले बताया गया था कि जब वहां थाना बन जाएगा तो पहले से रह रहे मुसहरों के लिए आवास की व्यवस्था करा दी जाएगी। लेकिन, इस बार बारिश में समूची बस्ती जलमग्न हो गई। पखवारेभर बाद तक पानी निकासी नहीं हो सकी। जलनिकासी की व्यवस्था न होने से वहां रहने वाले लोग घर छोड़कर बाजार में इधर-उधर ठिकाना बनाए हुए हैं। बस्ती के पोकी मुसहर ने बताया कि उनकी समस्या की ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। यदि कोई आकर देखा भी तो केवल आश्वासन देकर चले गए।
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बारिश के बाद अब भी दर्जनों गांवों में जलजमाव की समस्या ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बनी है। खेतीबारी चौपट होने के साथ ही रोजमर्रा की जिंदगी बेपटरी हो गई है। कई गांवों के रास्ते कमर तक पानी में डूबने के कारण उनके संपर्क मुख्य मार्ग से कट गए हैं। लोगों को जरूरत के सामान लेने के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। सबसे बुरी हालत डीघ ब्लॉक के निचले इलाके में आबाद गांवों की है। बिगहिया, चकसारनाथ, पूरेभान, हरिहरपुरसानी, पिलखुना, पूरेनगरी, विश्वनाथपुर, सोबरी, बयांव, मुदरी, रोही आदि गांवों में भारी जलजमाव के चलते जनजीवन बेपटरी हो गया है। प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिगहिया, पिलखुना, हरिहरपुरसानी, सोबरी, चौरा कला समेत लगभग दर्जनभर गांवों के परिषदीय विद्यालयों में पानी भर गया है। इससे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। पखवारेभर का समय गुजरने के बाद भी न तो जलनिकासी का इंतजाम किया गया, ना ही बच्चों की बर्बाद होती पढ़ाई को तरजीह दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक किसी अधिकारी ने इस समस्या की ओर देखने की भी जहमत नहीं उठाई। पूरेभान के पूर्व प्रधान शैलेश कुमार शुक्ला कहते हैं कि गांव में त्राहि-त्राहि मची है, लेकिन किसी को फिक्र ही नहीं है। पूरेभान गांव में पंचायत भवन के सामने घुटने के ऊपर तक पानी जमा है। पंचायत भवन में पहुंचना मुश्किल है। गांवों के ट्यूबवेल भी पानी में डूब गए हैं। इससे उनका चल पाना संभव नहीं हो पा रहा। एक तरफ जलजमाव कहर बरपा रहा है तो दूसरी ओर लोगों की जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण संसाधन उसकी वजह से काम नहीं कर रहे। ऐसे में लोग तड़प रहे हैं।
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2000 बीघे फसल डूबकर चौपट, रोटी-दाल के पड़ेंगे लाले
ज्ञानपुर। पूर्व सांसद रामरति बिंद की 15 बीघे, पिलखुना गांव के गोपीनाथ तिवारी की 10 बीघे, चकसारनाथ के सभापति शुक्ला की 10 बीघे फसल समेत जलजमाव प्रभावित गांवों में किसानों की तकरीबन दो हजार बीघे तैयार फसल पानी में पूरी तरह डूब चुकी है। इससे बड़े-बड़े किसानों के सामने आने वाले समय में मुश्किलें आने वाली हैं। शेषमणि शुक्ला, लालता प्रसाद चौबे, जनार्दन ओझा, लालसाहब यादव आदि किसानों का कहना है कि प्रकृति के कोप का भाजन हो रहे ग्रामीणों की राहत के बारे में सोचने वाला कोई नहीं। तैयार फसल नष्ट हो गई। इस समस्या के स्थायी समाधान के बारे में सोचना चाहिए।
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मुसहर बस्ती जलमग्न, सड़क पर घूम रहे रहवासी
मोढ़। बाजार में लगभग एक वर्ष पूर्व थाना बनाने के लिए प्रस्तावित जमीन पर भारी जलभराव के कारण वहां रह रहे मुसहर बिरादरी के लोग भी बेघर हो गए हैं। बस्ती के लोग सड़क पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पहले बताया गया था कि जब वहां थाना बन जाएगा तो पहले से रह रहे मुसहरों के लिए आवास की व्यवस्था करा दी जाएगी। लेकिन, इस बार बारिश में समूची बस्ती जलमग्न हो गई। पखवारेभर बाद तक पानी निकासी नहीं हो सकी। जलनिकासी की व्यवस्था न होने से वहां रहने वाले लोग घर छोड़कर बाजार में इधर-उधर ठिकाना बनाए हुए हैं। बस्ती के पोकी मुसहर ने बताया कि उनकी समस्या की ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। यदि कोई आकर देखा भी तो केवल आश्वासन देकर चले गए।