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पुरस्कार न मिलने पर उठाए सवाल
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ज्ञानपुर। स्वच्छता, शिक्षा के लिए जिला एवं मंडल स्तर पर पुरस्कृत हुए चककलूटी ग्राम पंचायत को मुख्यमंत्री प्रोत्साहन पुरस्कार में स्थान न मिलने पर ग्रामीणों में नाराजगी है। आरोप लगाया कि साजिश के तहत चककलूटी का नाम शामिल नहीं किया गया।
सूबे में भाजपा सरकार बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम पंचायतों का उत्साह बढ़ाने के लिए पुरस्कार लागू किया। इसमें प्रथम को आठ, द्वितीय को सात, तृतीय को पांच, चतुर्थ को तीन और पांचवें स्थान पर रहने वाली ग्राम पंचायत को दो लाख मिलता है। 2017 से अब तक 15 ग्राम पंचायतें पुरस्कृत हो चुकी। जिसमें कई ग्राम पंचायतें सामान्य होने पर भी पुरस्कृत हो गई। ग्रामीण कैलाश यादव, कड़कड़ यादव ने कहा कि स्वच्छता मिशन में चककलूटी को तीन जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से पुरस्कार मिल चुका है। अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई संग स्कूल में सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद है, लेकिन पंचायत राज विभाग ने तालमेल बनाने वाले प्रधानों पर ही ध्यान दिया।
चककलूटी (गजधरा) ग्राम प्रधान इसरावती देवी ने कहा कि तीन साल में एक बार भी गांव का चयन नहीं हो सका। इससे मन को काफी ठेस पहुंची। प्रशासन को चाहिए कि बेहतर करने वाले गांवों को शामिल किया जाए। डीपीआरओ बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि जिला, मंडल और राज्य स्तर की समिति पुरस्कार पर निर्णय लेती है। विभाग का इससे कोई लेना देना नहीं होता।
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सूबे में भाजपा सरकार बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम पंचायतों का उत्साह बढ़ाने के लिए पुरस्कार लागू किया। इसमें प्रथम को आठ, द्वितीय को सात, तृतीय को पांच, चतुर्थ को तीन और पांचवें स्थान पर रहने वाली ग्राम पंचायत को दो लाख मिलता है। 2017 से अब तक 15 ग्राम पंचायतें पुरस्कृत हो चुकी। जिसमें कई ग्राम पंचायतें सामान्य होने पर भी पुरस्कृत हो गई। ग्रामीण कैलाश यादव, कड़कड़ यादव ने कहा कि स्वच्छता मिशन में चककलूटी को तीन जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से पुरस्कार मिल चुका है। अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई संग स्कूल में सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद है, लेकिन पंचायत राज विभाग ने तालमेल बनाने वाले प्रधानों पर ही ध्यान दिया।
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चककलूटी (गजधरा) ग्राम प्रधान इसरावती देवी ने कहा कि तीन साल में एक बार भी गांव का चयन नहीं हो सका। इससे मन को काफी ठेस पहुंची। प्रशासन को चाहिए कि बेहतर करने वाले गांवों को शामिल किया जाए। डीपीआरओ बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि जिला, मंडल और राज्य स्तर की समिति पुरस्कार पर निर्णय लेती है। विभाग का इससे कोई लेना देना नहीं होता।
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