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डाईंग इकाईयों की जांच को आई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम
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आगामी 15 जनवरी से एक मार्च तक प्रयागराज में चलने वाले माघ मेले के दृष्टिगत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी द्वारा कालीन क्षेत्र के डाईंग इकाईयों की रेंडम जांच शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में शुक्रवार को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने कारपेट सिटी में कई डाईंग इकाईयों की जांच की। हालांकि कई इकाईयां बंद पाई गईं।
बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि माघ मेला शुरू होने वाला है। बहुत सी इकाईयां मानक की अनदेखी कर उनमें से निकलने वाले रंगीन पानी गंगा से जुड़ी नहरों और नदियों में बहा देती हैं। मानक यह है कि इकाईयां अपने यहां से निकलने वाले पानी को ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से शुद्ध करके ही बहाएंगी। उन्होंने बताया कि भदोही के बारे में अक्सर ऐसी शिकायतें मिलती रहती हैं कि लोग मोरवा में केमिकलयुक्त रंगीन पानी बहा देते हैं। उन्होंने कहा कि यह जांच रेंडम की जा रही है। यदि लापरवाही मिलती है तो संबंधित इकाईयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच टीम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि के रूप में आए सेवानिवृत्त प्रो.एसएन उपाध्याय ने बताया कि वाराणसी व आसपास के जनपदों में कुल 38 इकाईयों की जांच की जानी है। इनमें से कई भदोही जनपद में हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेले से पूर्व तक सभी इकाईयों की जांच कर रिपोर्ट बोर्ड को सौंपनी है। जांच टीम में बोर्ड के वैज्ञानिक राजनाथ चौधरी भी थे।
उधर, पिछले दो वर्षों से व्यवसायिक गतिविधियां कम हो जाने, देश व विदेश से मेहमानों का आवागमन बंद हो जाने से निर्यात फर्मों के पास कालीन के आर्डर का टोटा पड़ा हुआ है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) प्रशासनिक समिति के सदस्य असलम महबूब ने कहा कि भदोही परिक्षेत्र पर कोविड का भारी असर पड़ा है। देश और विदेश में कालीन या टेक्सटाइल मेलों के आयोजनों पर ग्रहण लगा हुआ है। ऊपर से इन ट्रीटमेंट प्लांटों को चलाने का मतलब लाखों रुपये खर्च करना है। काम नहीं है तो इकाईयों बंद होना लाजमी है।
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बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि माघ मेला शुरू होने वाला है। बहुत सी इकाईयां मानक की अनदेखी कर उनमें से निकलने वाले रंगीन पानी गंगा से जुड़ी नहरों और नदियों में बहा देती हैं। मानक यह है कि इकाईयां अपने यहां से निकलने वाले पानी को ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से शुद्ध करके ही बहाएंगी। उन्होंने बताया कि भदोही के बारे में अक्सर ऐसी शिकायतें मिलती रहती हैं कि लोग मोरवा में केमिकलयुक्त रंगीन पानी बहा देते हैं। उन्होंने कहा कि यह जांच रेंडम की जा रही है। यदि लापरवाही मिलती है तो संबंधित इकाईयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच टीम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि के रूप में आए सेवानिवृत्त प्रो.एसएन उपाध्याय ने बताया कि वाराणसी व आसपास के जनपदों में कुल 38 इकाईयों की जांच की जानी है। इनमें से कई भदोही जनपद में हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेले से पूर्व तक सभी इकाईयों की जांच कर रिपोर्ट बोर्ड को सौंपनी है। जांच टीम में बोर्ड के वैज्ञानिक राजनाथ चौधरी भी थे।
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उधर, पिछले दो वर्षों से व्यवसायिक गतिविधियां कम हो जाने, देश व विदेश से मेहमानों का आवागमन बंद हो जाने से निर्यात फर्मों के पास कालीन के आर्डर का टोटा पड़ा हुआ है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) प्रशासनिक समिति के सदस्य असलम महबूब ने कहा कि भदोही परिक्षेत्र पर कोविड का भारी असर पड़ा है। देश और विदेश में कालीन या टेक्सटाइल मेलों के आयोजनों पर ग्रहण लगा हुआ है। ऊपर से इन ट्रीटमेंट प्लांटों को चलाने का मतलब लाखों रुपये खर्च करना है। काम नहीं है तो इकाईयों बंद होना लाजमी है।
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