ज्ञानपुर। पितृपक्ष के अंतिम दिन शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर जिले के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान, तर्पण और पिंडदान कर अपने पूर्वजों का स्मरण किया। पुरोहितों के मार्गदर्शन में विधि-विधान से श्राद्ध कर्म किया। महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत पंडित हरिप्रसाद मिश्र शास्त्री ने कहा कि पितृ पक्ष के अंतिम दिन जिले में एक लाख से ज्यादा लोगों ने पतित पावनी मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया। पितरों का स्मरण भारतीय सनातन परंपरा में श्रद्धा, संस्कार और कृतज्ञता का प्रतीक है। रामपुर घाट जाने वाले मार्ग पर भीड़ के दबाव के चलते जाम लग गया। रामपुर घाट पर भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया था। सुबह दस बजे तक घाट पिंडदान करने वालों से खचाखच भर गया था। इसके अलावा भोगांव, सीतामढ़ी घाट, बेरासपुर, पंचमुखी घाट, गुलौरी घाट, जहांगीराबाद, डेरवां, अरई संग सुरियावां के बावन बीघा तालाब किनारे भी पिंडदान करने वालों की भीड़ रही। बेरासपुर घाट पर पं.लक्ष्मीशंकर तिवारी ने विधि-विधान से पिंडदान कराया। रामपुर घाट पर खचाखच भीड़ थी। इसके चलते बड़े वाहनों का प्रवेश नहीं हो पा रहा था। सीतामढ़ी के महर्षि वाल्मीकि आश्रम के गंगा तट पर पूर्वजों को पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

सीतामढ़ी गंगा घाट पर श्राद्ध, तर्पण करते लोग। संवाद