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Bhadohi News: 26 में से 25 आयुर्वेद अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने के लिए एक भी बेड नहीं
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घोसिया आयुर्वेद अस्पताल के सामने किया गया अतिक्रमण। संवाद
कोविड-19 महामारी के बाद लोगों में आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ा है। सरकार भी इसके प्रचार-प्रसार पर लाखों रुपये हर साल खर्च कर रही है। इसके बाद भी आयुर्वेद अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं है।
जिले में 26 अस्पताल है, इसमें से 25 के पास एक भी बेड नहीं है। नौ हेल्थ वेलनेस सेंटर है।
जिले की घोसिया आयुर्वेद अस्पताल में 25 बेड है, लेकिन कहीं भी मरीज को भर्ती करने की सुविधा नहीं है। अस्पतालों में रोजाना करीब 500 लोगों की ओपीडी होती है।
अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं है। इसका मुख्य कारण है कि 25 अस्पतालों के पास एक भी बेड नहीं है, जहां बेड है, वहां पर कर्मचारियों की तैनाती नहीं है।
इन अस्पतालों पर मरीज आते हैं, दवा लेकर चले जाते हैं। अस्पताल में डॉक्टर, फार्मासिस्ट है, बोर्ड है, लेकिन मरीज को लेटने के लिए एक भी बेड नहीं है।
इसकी मांग शासन से की जा चुकी है। बार्ड बॉय, चौकीदार की कमी है।
जरुरत चार की, एक भी बेड नहीं : हर अस्पताल पर कम से कम चार बेड होने चाहिए। लेकिन यहां पर एक बेड नहीं है। घोसिया में 25 बेड है। यहां सुविधा भगवान भरोसे है। मरीज को दवा देकर तुरंत घर भेज दिया जाता है, जिससे पूर्णकालिक उपचार संभव नहीं हो पाता।
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दोबारा मरीज आने से पहले सोचते हैं। यह स्थिति आयुर्वेदिक अस्पतालों का है।
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जिले में 26 अस्पताल है, इसमें से 25 के पास एक भी बेड नहीं है। नौ हेल्थ वेलनेस सेंटर है।
जिले की घोसिया आयुर्वेद अस्पताल में 25 बेड है, लेकिन कहीं भी मरीज को भर्ती करने की सुविधा नहीं है। अस्पतालों में रोजाना करीब 500 लोगों की ओपीडी होती है।
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अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं है। इसका मुख्य कारण है कि 25 अस्पतालों के पास एक भी बेड नहीं है, जहां बेड है, वहां पर कर्मचारियों की तैनाती नहीं है।
इन अस्पतालों पर मरीज आते हैं, दवा लेकर चले जाते हैं। अस्पताल में डॉक्टर, फार्मासिस्ट है, बोर्ड है, लेकिन मरीज को लेटने के लिए एक भी बेड नहीं है।
इसकी मांग शासन से की जा चुकी है। बार्ड बॉय, चौकीदार की कमी है।
जरुरत चार की, एक भी बेड नहीं : हर अस्पताल पर कम से कम चार बेड होने चाहिए। लेकिन यहां पर एक बेड नहीं है। घोसिया में 25 बेड है। यहां सुविधा भगवान भरोसे है। मरीज को दवा देकर तुरंत घर भेज दिया जाता है, जिससे पूर्णकालिक उपचार संभव नहीं हो पाता।
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दोबारा मरीज आने से पहले सोचते हैं। यह स्थिति आयुर्वेदिक अस्पतालों का है।