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किराए के भवन में चल रहे दफ्तर, खुद के भवन का इंतजार
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ज्ञानपुर। वर्षों से किराये के भवन में चल रहे दर्जन भर सरकारी विभागों को दो दशक बाद भी अपना भवन नसीब नहीं हो सका। कागजी लिखापढ़ी के बाद भी दफ्तर आज भी किराये के भवन में संचालित हैं। जिससे आम आदमी को जहां परेशान होना पड़ता है वहीं सरकारी राजस्व का भी नुकसान होता है।
30 जून 1994 को वाराणसी से कटकर भदोही जिले का सृजन हुआ। सरपतहां में मुख्यालय, दीवानी न्यायालय, सीएमओ कार्यालय जबकि कंसापुर में विकास भवन है। इसके अलावा बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीआईओएस सहित अधिकतर विभागों को अपने खुद के भवन मिल गए, लेकिन दर्जन भर ऐसे सरकारी महकमा हैं जो आज भी किराये के भवन में चल रहे हैं। गली मोहल्ले में संचालित होने वाले ऐसे विभागों तक पहुंचने में आम फरियादी को पहुंचने में काफी मशक्कत होती है। विभागों की ओर हर साल पत्राचार कर नए भवन या सरकारी भवन की मांग की जाती है, लेकिन धरातल पर यह प्रभावी नहीं हो पाता। जिसके चलते अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय, मत्स्य, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, जिला सेवायोजन, बाट-माप, खादी ग्रामोद्योग विभाग संग सभी छह बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के कार्यालय भी प्राइवेट भवनों में चल रहे हैं। किराये के भवनों में चलने वाले विभाग तक पहुंचना आम जनता के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है। यही नहीं कार्यालय के कर्मचारियों को भी अव्यवस्था और सीमित जगह में काम करना पड़ रहा है। कम जगह में विभागीय रिकार्ड भी अव्यवस्थित रखे रहते हैं। कार्यालय में पहुंचने वालों को भी खड़ा होने तक के लिए जगह नहीं रहती। मस्त्य विभाग, सेवायोजन सहित अन्य विभागों के अधिकारियों का कहना कि सरकारी भवन के लिए कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन अधिकारियों की ओर से ध्यान नहीं दिया गया।
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30 जून 1994 को वाराणसी से कटकर भदोही जिले का सृजन हुआ। सरपतहां में मुख्यालय, दीवानी न्यायालय, सीएमओ कार्यालय जबकि कंसापुर में विकास भवन है। इसके अलावा बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीआईओएस सहित अधिकतर विभागों को अपने खुद के भवन मिल गए, लेकिन दर्जन भर ऐसे सरकारी महकमा हैं जो आज भी किराये के भवन में चल रहे हैं। गली मोहल्ले में संचालित होने वाले ऐसे विभागों तक पहुंचने में आम फरियादी को पहुंचने में काफी मशक्कत होती है। विभागों की ओर हर साल पत्राचार कर नए भवन या सरकारी भवन की मांग की जाती है, लेकिन धरातल पर यह प्रभावी नहीं हो पाता। जिसके चलते अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय, मत्स्य, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, जिला सेवायोजन, बाट-माप, खादी ग्रामोद्योग विभाग संग सभी छह बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के कार्यालय भी प्राइवेट भवनों में चल रहे हैं। किराये के भवनों में चलने वाले विभाग तक पहुंचना आम जनता के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है। यही नहीं कार्यालय के कर्मचारियों को भी अव्यवस्था और सीमित जगह में काम करना पड़ रहा है। कम जगह में विभागीय रिकार्ड भी अव्यवस्थित रखे रहते हैं। कार्यालय में पहुंचने वालों को भी खड़ा होने तक के लिए जगह नहीं रहती। मस्त्य विभाग, सेवायोजन सहित अन्य विभागों के अधिकारियों का कहना कि सरकारी भवन के लिए कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन अधिकारियों की ओर से ध्यान नहीं दिया गया।
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