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नोटबंदी: छोटे किसानों के लिए संकट, बुआई रुकी
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Mon, 28 Nov 2016 01:06 AM IST
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ज्ञानपुर। नोटबंदी का असर सबसे अधिक किसानों पर पड़ा है। इसमें सबसे अधिक प्रभावित किसान हैं। पैसे के अभाव में रबी की बुआई रूक गई है। खाद-बीज से लेकर ट्रैक्टर से जुताई करने वाले पुरानी नोट लेने से सीधा इंकार कर रहे हैं। इससे पलेवा करने वाले किसान कैश संकट खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
पांच सौ और एक हजार की नोट बंद होने का असर करीब-करीब हर क्षेत्र में दिख रहा है। व्यापार से लेकर दूकानदारी तक प्रभावित हो गई है। बड़े किसान तो दूकानों से उधार ही सामान लेकर खेती कर रहे हैं लेकिन सबसे अधिक परेशानी छोटे किसानों को हो रही है। उनके पास पांच सौ और हजार की नोट होने से वह खेतीबारी नहीं कर पा रहे हैं।
सरकार ने भले ही समितियों पर पुरानी नोट लेने का आदेश दिया है लेकिन जिले में इसका पालन नहीं हो पा रहा है। इससे छोटे किसानों को रबी की बुआई करना मुश्किल हो गया है। नोटबंदी के पखवारे भर बाद भी स्थिति में खास सुधार न होने पर लोगों को कैश के लिए जूझना पड़ रहा है। पैसे के अभाव में किसान खेतों को पलेवा कर छोड़ दे रहे हैं। कमोबेश ज्यादातर छोटे किसानों की स्थिति यही हो गई है।
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पांच सौ और एक हजार की नोट बंद होने का असर करीब-करीब हर क्षेत्र में दिख रहा है। व्यापार से लेकर दूकानदारी तक प्रभावित हो गई है। बड़े किसान तो दूकानों से उधार ही सामान लेकर खेती कर रहे हैं लेकिन सबसे अधिक परेशानी छोटे किसानों को हो रही है। उनके पास पांच सौ और हजार की नोट होने से वह खेतीबारी नहीं कर पा रहे हैं।
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सरकार ने भले ही समितियों पर पुरानी नोट लेने का आदेश दिया है लेकिन जिले में इसका पालन नहीं हो पा रहा है। इससे छोटे किसानों को रबी की बुआई करना मुश्किल हो गया है। नोटबंदी के पखवारे भर बाद भी स्थिति में खास सुधार न होने पर लोगों को कैश के लिए जूझना पड़ रहा है। पैसे के अभाव में किसान खेतों को पलेवा कर छोड़ दे रहे हैं। कमोबेश ज्यादातर छोटे किसानों की स्थिति यही हो गई है।
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