ज्ञानपुर। शारदीय नवरात्र की शुरुआत होने से पूर्व ही जिला प्रशासन और शांति समितियों की बैठकें हुईं थी। तीसरी नजर के साथ नए स्थानों पर पंडाल न सजाने की बात कहीं थी। बावजूद इसके प्रशासन की सूची में यथावत 703 पंडालों के सापेक्ष एक हजार से अधिक पंडाल सज गए और किसी पूजा पंडाल ने अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं ली थी। औराई अग्निकांडके बाद लोगों का कहना था कि पूजन समितियों से गाइड लाइन का पालन करने, पंडालों में अग्निशमन यंत्रों की स्थापना, वैकल्पिक विद्युत कनेक्शन लेने की कोई हिदायत काम नहीं आ सकी। आस्था की आड़ में जिम्मेदारों ने भी पंडालों के इर्द-गिर्द उपस्थिति दर्ज कराकर गाइड लाइन का उल्लंघन करने वालों पर शिकंजा नहीं कसा। सबसे बड़ी बात यह कि अग्निशमन विभाग से सुरक्षा एवं संरक्षा से संबंधित एनओसी मिलने के बाद ही पूजा पंडाल सजने थे बावजूद संचालकों ने मनमानी की। उधर, प्रशासन ने भी सिर्फ निर्देश देकर रस्म अदायगी की। मुौके पर जाकर व्यवस्था देखना जरूरी नहीं समझा। नरथुआ-औराई के पंडाल में आग लगने की घटना न हुई होती तो सबकुछ सामान्य परिस्थिति में पूर्व की तरह मामला ठंडे बस्ते में ही रहता। जिला अग्निशमन अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि पंडाल लगाने से पूर्व संचालकों को हिदायत भी दी गई थी बावजूद इसके लापरवाही बरती गई है। आस्था के आगे विभाग भी यदि कुछ करने की सोच रखता तब तक ऊपरी दबाव आ जाता था। विसर्जन में मात्र एक दिन और शेष है। सोमवार को टीम ने पंडालों की पड़ताल कर पंडाल में बालू, पानी, अग्निशमन यंत्रों को स्थापित भी करवाया है। टीम में विभाकर मौर्य, संजय कुमार, अशोक सिंह, ज्ञान सिंह, अब्दुल कलाम, कमलेश सिंह, सुशील आदि शामिल रहे।