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Bhadohi News: पांच साल में किसी स्कूल संचालक पर कार्रवाई नहीं
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ज्ञानपुर। प्राइवेट स्कूल संचालक हर साल सुविधा के नाम पर 10 से 15 फीसदी फीस तो बढ़ाते ही हैं, तय दुकानों से ही ड्रेस, किताबें और बैग खरीदने के लिए अभिभावकों को विवश करते हैं। इसके जरिये स्कूल संचालक मोटी कमाई कर रहे हैं। लेकिन पिछले पांच साल में इस संबंध में अभी तक एक भी शिकायत दर्ज नहीं हो सकी है और न ही कोई कार्रवाई की गई। विभाग हर साल कार्रवाई के लिए टीम का गठन करता है, लेकिन वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती है।
जिले में 892 सरकारी विद्यालयों के साथ ही करीब 700 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। इसमें 50 से 60 ऐसे कान्वेंट विद्यालय हैं। इनकी फीस से लेकर अन्य खर्च की फेहरिस्त काफी लंबी है। निजी विद्यालयों के प्रबंधन ने एडमिशन, ट्यूशन, विकास सहित अन्य शुल्क के नाम पर 10 से 15 प्रतिशत तक शुल्क में बढ़ोतरी की है। प्रवेश, बिल्डिंग, खेल, पानी, बिजली, चिकित्सा, ट्यूशन फीस के नाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। बच्चों का प्रवेश शुल्क देने, कॉपी, किताब, ड्रेस खरीदने में अभिभावक त्राहिमाम कर रहे हैं। पूर्व के वर्षों की तरह शिक्षा विभाग की ओर से इस बार भी खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम गठित की गई है, लेकिन वह अब तक किसी स्कूल पर नहीं पहुंची। 2023 में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बैठक कर कान्वेंट विद्यालय के संचालकों को अभिभावकों पर चिह्नित दुकानों से कॉपी, किताबें, ड्रेस और बैग की खरीदारी के लिए दबाव न बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। स्कूल संचालकों ने कॉपी, किताबों और ड्रेस की दुकानों से सेटिंग कर रखी है। कहीं-कहीं वे खुद बेच रहे हैं। इसके जरिये वे मोटी कमाई कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में संचालकों के खिलाफ पिछले पांच साल में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई है। इससे वह कहीं जांच नहीं कर पा रहे हैं।
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जिले में 892 सरकारी विद्यालयों के साथ ही करीब 700 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। इसमें 50 से 60 ऐसे कान्वेंट विद्यालय हैं। इनकी फीस से लेकर अन्य खर्च की फेहरिस्त काफी लंबी है। निजी विद्यालयों के प्रबंधन ने एडमिशन, ट्यूशन, विकास सहित अन्य शुल्क के नाम पर 10 से 15 प्रतिशत तक शुल्क में बढ़ोतरी की है। प्रवेश, बिल्डिंग, खेल, पानी, बिजली, चिकित्सा, ट्यूशन फीस के नाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। बच्चों का प्रवेश शुल्क देने, कॉपी, किताब, ड्रेस खरीदने में अभिभावक त्राहिमाम कर रहे हैं। पूर्व के वर्षों की तरह शिक्षा विभाग की ओर से इस बार भी खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम गठित की गई है, लेकिन वह अब तक किसी स्कूल पर नहीं पहुंची। 2023 में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बैठक कर कान्वेंट विद्यालय के संचालकों को अभिभावकों पर चिह्नित दुकानों से कॉपी, किताबें, ड्रेस और बैग की खरीदारी के लिए दबाव न बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। स्कूल संचालकों ने कॉपी, किताबों और ड्रेस की दुकानों से सेटिंग कर रखी है। कहीं-कहीं वे खुद बेच रहे हैं। इसके जरिये वे मोटी कमाई कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में संचालकों के खिलाफ पिछले पांच साल में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई है। इससे वह कहीं जांच नहीं कर पा रहे हैं।
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