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60 फीसदी से अधिक मुरझाई धान की फसल
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
Updated Sat, 12 Sep 2015 01:47 AM IST
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मौजूदा सितंबर माह में अब तक एक मिमी. भी बरसात नहीं हुई है। इससे सूखे की आशंका के मद्देनजर किसान सहम गए हैं। जून, जुलाई और अगस्त के बाद सितंबर भी सूखा गुजरते देख किसानों की रही-सही आस भी अब छूटने लगी है।
जून महीने में हुई बारिश को छोड़ दिया जाए तो जुलाई, अगस्त में बरसात ने किसानों को भारी दगा दी।
अब तक सितंबर भी सूखा ही निकला है। वर्तमान स्थिति देखकर जानकार बरसात की उम्मीद न के बराबर कर रहे हैं। बारिश का सीजन भी अब चंद दिन ही बचा है।
ऐसे में सूखे की आशंका बढ़ गई है। लगातार तीसरे साल मौसम के दगा देने से पैदावार घटने की आशंका जताई जाने लगी है। हर रोज तल्ख धूप से धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। निचले हिस्सों में नहर, पंपिग सेट आदि से सिंचाई कर किसान फसल को बचाने में लगे हुए हैं, लेकिन ऊपरी हिस्सों में फसल करीब-करीब सूख गई है। कृषि विभाग के गत तीन साल के आंकड़ों पर नजर डाली तो लगातार बारिश का ग्राफ गिरता जा रहा है। पूर्व के वर्षों में धान की फसल में जहां सितंबर महीने में एक फीट तक पानी लगा रहता था, वहीं इस बार खेतों में दरारें किसानों का कलेजा चाक कर रही हैं।
धान की फसल में एक बार भी पानी सही ढंग से नहीं भर सका है। जुलाई 2013 में 165 मिमी, जुलाई 2014 में 269 मिमी और जुलाई 2015 में 193 मिमी बारिश हुई। अगस्त 2013 में 241 मिमी बारिश हुई तो 2014 में 53 मिमी रही, 2015 में 214 मिमी हुई। सितंबर 2013 में 11 मिमी, 2014 में 39 मिमी और 2015 में अब तक बारिश की स्थिति शून्य रही है। उप निदेशक कृषि डा. आरके मौर्य ने बताया कि अवर्षण से फसलों के पैदावार पर असर पड़ेगा। एक सप्ताह तक बारिश न हुई तो स्थिति खराब हो सकती है। मालूम हो कि जिले में खरीफ की खेती 46 हजार हेक्टेअर में की गई है, जिसमें करीब 28 हजार हेक्टेअर में धान की रोपाई की गई है।
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जून महीने में हुई बारिश को छोड़ दिया जाए तो जुलाई, अगस्त में बरसात ने किसानों को भारी दगा दी।
अब तक सितंबर भी सूखा ही निकला है। वर्तमान स्थिति देखकर जानकार बरसात की उम्मीद न के बराबर कर रहे हैं। बारिश का सीजन भी अब चंद दिन ही बचा है।
ऐसे में सूखे की आशंका बढ़ गई है। लगातार तीसरे साल मौसम के दगा देने से पैदावार घटने की आशंका जताई जाने लगी है। हर रोज तल्ख धूप से धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। निचले हिस्सों में नहर, पंपिग सेट आदि से सिंचाई कर किसान फसल को बचाने में लगे हुए हैं, लेकिन ऊपरी हिस्सों में फसल करीब-करीब सूख गई है। कृषि विभाग के गत तीन साल के आंकड़ों पर नजर डाली तो लगातार बारिश का ग्राफ गिरता जा रहा है। पूर्व के वर्षों में धान की फसल में जहां सितंबर महीने में एक फीट तक पानी लगा रहता था, वहीं इस बार खेतों में दरारें किसानों का कलेजा चाक कर रही हैं।
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धान की फसल में एक बार भी पानी सही ढंग से नहीं भर सका है। जुलाई 2013 में 165 मिमी, जुलाई 2014 में 269 मिमी और जुलाई 2015 में 193 मिमी बारिश हुई। अगस्त 2013 में 241 मिमी बारिश हुई तो 2014 में 53 मिमी रही, 2015 में 214 मिमी हुई। सितंबर 2013 में 11 मिमी, 2014 में 39 मिमी और 2015 में अब तक बारिश की स्थिति शून्य रही है। उप निदेशक कृषि डा. आरके मौर्य ने बताया कि अवर्षण से फसलों के पैदावार पर असर पड़ेगा। एक सप्ताह तक बारिश न हुई तो स्थिति खराब हो सकती है। मालूम हो कि जिले में खरीफ की खेती 46 हजार हेक्टेअर में की गई है, जिसमें करीब 28 हजार हेक्टेअर में धान की रोपाई की गई है।
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