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Bhadohi News: कान में नमी बढ़ा रही फंगल इंफेक्शन की समस्या, अस्पताल में बढ़े मरीज
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ज्ञानपुर जिला अस्पताल में मरीज देखते चिकित्सक। संवाद
ज्ञानपुर। बारिश में थोड़ी लापरवाही भारी पड़ सकती है। खासकर कान जैसी संवेदनशील जगह पर अगर बारिश का पानी जाता है तो इससे फंगल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। चिकित्सकों के अनुसार अगर कान में बार-बार खुजली हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह फंगल इंफेक्शन का लक्षण हैं। जिला अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती न होने से मरीजों का उपचार फिजिशियन ही कर रहे हैं।
महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन औसतन 800 की ओपीडी होती है। कान से संबंधित बीमारी से ग्रसित मरीज गिने-चुने आते हैं। बारिश के बाद से कान के मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में अब 50 मरीज हर दिन पहुंचने लगे हैं। जिन्हें जांच के बाद दवा दी जाती है। जिले में एक ईएनटी की डॉक्टर हैं।
वे महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय में हैं। फिजिशियन डॉ. प्रदीप यादव ने बताया कि उमस और नमी के कारण कानों में फंगल इन्फेक्शन (ओटोमाइकोसिस) की समस्या बढ़ी है। इसके मरीज भी इन दिनों आ रहे हैं। जुलाई से अक्तूबर तक कान के अधिक मरीज आते हैं। बताया कि यह बीमारी तब होती है, जब कान में पानी जाता है। कई लोग नहाने या बारिश में भींगने के बाद कानों को ठीक से सुखवाते नहीं हैं। इससे कान में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कुछ लोग कान खुजलाने के लिए माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या कॉटन बड का इस्तेमाल करते हैं, इससे कान की त्वचा पर सूक्ष्म घाव बन जाते हैं। फंगस को बढ़ने का मौका मिल जाता है।
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कान में संक्रमण के लक्षण
कान में दर्द होना, कान में बार-बार खुजली होना, अचानक कान से कम सुनाई देना व कान का बहना, मवाद आना।
ये बरतें सावधानी
नहाते समय कान में गंदा पानी जाने से रोकें
स्वीमिंग पूल में नहाने से पहले इयर प्लग लगाएं
तालाब, पोखरे में नहाने से बचें
कान में तेल न डालें
चिकित्सक की सलाह पर ड्रॉप डालें
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महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन औसतन 800 की ओपीडी होती है। कान से संबंधित बीमारी से ग्रसित मरीज गिने-चुने आते हैं। बारिश के बाद से कान के मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में अब 50 मरीज हर दिन पहुंचने लगे हैं। जिन्हें जांच के बाद दवा दी जाती है। जिले में एक ईएनटी की डॉक्टर हैं।
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वे महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय में हैं। फिजिशियन डॉ. प्रदीप यादव ने बताया कि उमस और नमी के कारण कानों में फंगल इन्फेक्शन (ओटोमाइकोसिस) की समस्या बढ़ी है। इसके मरीज भी इन दिनों आ रहे हैं। जुलाई से अक्तूबर तक कान के अधिक मरीज आते हैं। बताया कि यह बीमारी तब होती है, जब कान में पानी जाता है। कई लोग नहाने या बारिश में भींगने के बाद कानों को ठीक से सुखवाते नहीं हैं। इससे कान में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कुछ लोग कान खुजलाने के लिए माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या कॉटन बड का इस्तेमाल करते हैं, इससे कान की त्वचा पर सूक्ष्म घाव बन जाते हैं। फंगस को बढ़ने का मौका मिल जाता है।
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कान में संक्रमण के लक्षण
कान में दर्द होना, कान में बार-बार खुजली होना, अचानक कान से कम सुनाई देना व कान का बहना, मवाद आना।
ये बरतें सावधानी
नहाते समय कान में गंदा पानी जाने से रोकें
स्वीमिंग पूल में नहाने से पहले इयर प्लग लगाएं
तालाब, पोखरे में नहाने से बचें
कान में तेल न डालें
चिकित्सक की सलाह पर ड्रॉप डालें