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मदरसा छात्रों ने फूंका आतंकवाद का पुतला
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Tue, 24 Nov 2015 01:30 AM IST
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मदरसा परिसर से निकले जुलूस में शिक्षक, कमेटी सदस्यों के अलावा नगर
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क्षेेत्र के मुस्लिम बंधु और अन्य लोग भी शामिल रहे। जुलूस को व्यापार मंडल
के जिला महामंत्री जटाशंकर मौर्य ने झंडी दिखाकर रवाना किया।
जुलूस मुख्य बाजार, चौक, त्रिमुहानी, बाईपास, गल्ला मंडी होते हुए रामलीला मैदान पहुंचा। जहां पर आतंकवाद के पुतले को आग के हवाले किया।
जुलूस में शामिल बच्चों के हाथों में आतंकवाद के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां थीं। बच्चे बुलंद आवाज में आतंकवाद मिटाना है, हिंदोस्तान बचाना है...के नारे लगा रहे थे।
सपा नेता अब्दुल रऊफ हाशमी और प्रबंधक मुहम्मद इसराइल के नेतृत्व में पुतले के साथ जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि न तो आतंकी मुसलमान हो सकते हैं और न मुसलमान आतंकी। इस्लाम में इंसानियत के खिलाफ कोई भी कार्य स्वीकार नहीं है।
चाहे कैसा भी मुसलमान हो, यदि वह इंसानियत के खिलाफ जरा भी कदम बढ़ाया तो वहीं से वह इस्लाम और मुसलमान की योग्यता से बाहर हो जाता है। रामलीला मैदान पर पुतला दहन से पूर्व वक्ताओं ने आतंकवाद को इस्लाम, मुसलमान से जोड़ने वालों को आड़े हाथ लिया।
कहा कि ऐसे लोगों को इस्लाम और मुसलमान की परिभाषा जाननी चाहिए। इस मौके पर प्रधानाचार्य मुहम्मद छेदी अली, मुहर्रम अली, हाफिज महताब अहजमद, हाफिज मुहम्मद फारूक, मौलाना मुहम्मद रिजवान, परवेज अहमद, शबाना बानो, निलोफर बानो, गुलाम रसूल, अब्दुल खालिक, अब्दुल जब्बार आदि थे।
जुलूस मुख्य बाजार, चौक, त्रिमुहानी, बाईपास, गल्ला मंडी होते हुए रामलीला मैदान पहुंचा। जहां पर आतंकवाद के पुतले को आग के हवाले किया।
जुलूस में शामिल बच्चों के हाथों में आतंकवाद के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां थीं। बच्चे बुलंद आवाज में आतंकवाद मिटाना है, हिंदोस्तान बचाना है...के नारे लगा रहे थे।
सपा नेता अब्दुल रऊफ हाशमी और प्रबंधक मुहम्मद इसराइल के नेतृत्व में पुतले के साथ जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि न तो आतंकी मुसलमान हो सकते हैं और न मुसलमान आतंकी। इस्लाम में इंसानियत के खिलाफ कोई भी कार्य स्वीकार नहीं है।
चाहे कैसा भी मुसलमान हो, यदि वह इंसानियत के खिलाफ जरा भी कदम बढ़ाया तो वहीं से वह इस्लाम और मुसलमान की योग्यता से बाहर हो जाता है। रामलीला मैदान पर पुतला दहन से पूर्व वक्ताओं ने आतंकवाद को इस्लाम, मुसलमान से जोड़ने वालों को आड़े हाथ लिया।
कहा कि ऐसे लोगों को इस्लाम और मुसलमान की परिभाषा जाननी चाहिए। इस मौके पर प्रधानाचार्य मुहम्मद छेदी अली, मुहर्रम अली, हाफिज महताब अहजमद, हाफिज मुहम्मद फारूक, मौलाना मुहम्मद रिजवान, परवेज अहमद, शबाना बानो, निलोफर बानो, गुलाम रसूल, अब्दुल खालिक, अब्दुल जब्बार आदि थे।