ज्ञानपुर। नगर सहित ग्रामीण अंचलों के पंडालों में विराजमान भगवान गणेश विधि-विधान से पूजे जा रहे हैं। सुबह-शाम पूजन संग भक्तों में प्रसाद वितरित किया जा रहा है। पूजा पंडालों को रंगीन लाइट और झालरों से आकर्षक सजाया गया है। सुबह-शाम पंडालो में बज रहे भक्ति गीत सुन लोग मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। देवा जय गणेशा, देवा जय गणेशा...., घर में पधारों गजनन जी मेरे घर में पधारो...., गणपत्ति बप्पा अगले बरस तू जल्दी आना... भजन चहुंओर बज रहा है। पूजा पंडालों में सुबह-शाम आस्थावानों की भीड़ उमड़ रही है। ज्ञानपुर के पुरानी बाजार, गिरधरपुर रोड के अलावा गोपीगंज नगर के पश्चिम मोहाल, सदर मोहाल स्थित दुर्गा जी गली एवं खड़हटी मोहाल सहित अन्य स्थानों पर सजाए गए पूजन पंडालो मे दर्शन-पूजन को काफी भीड़ एकत्रित हो रही है। गौरी पुत्र गणेश का पूजन कर भक्त सुख-समृद्धि की कामना करते रहे। दर्शन के लिए गणेश मंदिरों के साथ नगर व ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में पार्वती नंदन का श्रद्धालुअ विधिवत पूजन कर रहे हैं। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी एवं सिद्ध विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। घरों में गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई। भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगाया जा रहा है। औराई के हमीदपट्टी, खमरिया नगर में गजानन की भक्त भावपूर्वक पूजा अर्चन कर रहे हैं। नगर के पुरानी बाजार में रविवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कार्यक्रम संपन्न हुआ। जन्मोत्सव के बाद महिलाओं ने बरही की परंपरा पूरी कर भगवान का नामकरण करते हुए उनके बाल स्वरुप चित्र पर काजल की रस्म अदा की और ढोल, हारमोनियम की थाप पर सोहर गाया। चले हैं नाग नाथन को,बहाना गेंद खेलन का, जुग-जुग जिए ललनवा, भाग जागल हो को सुनकर युवतियां झूम उठी। पवन मोदनवाल ने बताया कि आज के दिन प्रत्येक वर्ष श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, बरही, पूजन-अर्चन, भजन संध्या कार्यक्रम को संपन्न कराकर प्रसाद वितरण कराया जाता है। आकाश मोदनवाल, ब्रह्मा मोदनवाल, रंजीत गुप्ता, मनोज मोदनवाल, राकेश महराज समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष भक्तजन उपस्थित रहे। जंगीगंज। डीघ ब्लॉक के जगापुर मिश्रान में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की झांकी देखकर भक्तगण मंत्रमुग्ध रह गए। कथावाचक राघव दास जी महाराज ने कहा कि कलयुग में भागवत और भजन से ही मोक्ष संभव है। कथा में सुदामा चरित्र प्रसंग का वर्णन किया। महराज ने कहा कि अपने ही धर्म में जीने और मरने को श्रेष्ठ गति है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख डीघ सुधांशु मिश्र उर्फ विधु ने महामंडलेश्वर राघव दास जी महराज का सम्मान मौर मुकुट पहनाकर किया।