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स्वच्छता मिशन को पलीता लगा रहे हाईवे के शौचालयों में बंद ताले
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स्वच्छ भारत मिशन को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसका उद्देश्य था कि इस मार्ग से आवागमन करने वाले इसका लाभ ले सकें। खुले में लोग शौच न जाएं और स्वच्छता को बढ़ावा दें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। महीनों से हाईवे के किनारे वाले शौचालयों में ताला लटक रहा है। लाला नगर से लेकर ऊंज की सीमा पर करीब 15 किलोमीटर के बीच 20 शौचालय बनवाए गए हैं, लेकिन ज्यादातर में ताला ही बंद है। इसको लेकर लोगों ने नाराजगी जतायी है।
ऊंज इलाके के सूफी नगर में बनाए गए शौचालय में ताला बंद है। आस-पास के लोग बताते हैं कि शायद ही कभी शौचालय का ताला खुलता हो। इस मार्ग से आवागमन करने वालों को जब कभी जरूरत पड़ती है तो किसी पेट्रोल पंप या किसी ढाबे वाले के यहां पहुंचते हैं। वहां बने शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी तो बस से यात्रा करने वाले लोगों को होती है। राधेश्याम भारतीय ने कहा कि जब अधिकारी आते हैं तो कहते हैं किसी व्यक्ति की नियुक्ति हो जाने पर ही यह खुलेगा। अभी तक यहां किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। जब तक किसी की नियुक्ति नहीं हो जाती है, तब तक यह बंद ही रहने की संभावना है। सुधवै गांव निवासी करिया पाल ने कहा कि शौचालय का निर्माण जिस उद्देश्य से हुआ था, वह पूर्ण नहीं हुआ। शौचालय में ताला बंद होने से लोगों को दिक्कत होती है। कमोवेश यही स्थिति हाल झिलिया पुल के पास बने शौचालय की है। यहां भी ताला बंद है। यहां के राजेश पाल ने कहा कि शौचालय का निर्माण तो करवा दिया गया, लेकिन उसमें ताला बंद है। अनवर अली ने कहा कि शौचालय महज शो पीश बनकर रह गया है। यदि इसे चालू कर दिया जाए तो काफी लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसमें न बिजली की व्यवस्था है और न ही पानी की। एनएचआई के परियोजना निदेशक एके राय का कहना है कि लाला नगर से ऊंज तक करीब 20 शौचालय बनाए गए हैं। उन शौचालयों की चाभी टोल प्लाजा पर रहती है। वहां से कोई भी व्यक्ति फोन करके चाभी मंगाकर उपयोग कर सकता है। खुला न रखने का कारण वहां हुई चोरियां हैं।
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ऊंज इलाके के सूफी नगर में बनाए गए शौचालय में ताला बंद है। आस-पास के लोग बताते हैं कि शायद ही कभी शौचालय का ताला खुलता हो। इस मार्ग से आवागमन करने वालों को जब कभी जरूरत पड़ती है तो किसी पेट्रोल पंप या किसी ढाबे वाले के यहां पहुंचते हैं। वहां बने शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी तो बस से यात्रा करने वाले लोगों को होती है। राधेश्याम भारतीय ने कहा कि जब अधिकारी आते हैं तो कहते हैं किसी व्यक्ति की नियुक्ति हो जाने पर ही यह खुलेगा। अभी तक यहां किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। जब तक किसी की नियुक्ति नहीं हो जाती है, तब तक यह बंद ही रहने की संभावना है। सुधवै गांव निवासी करिया पाल ने कहा कि शौचालय का निर्माण जिस उद्देश्य से हुआ था, वह पूर्ण नहीं हुआ। शौचालय में ताला बंद होने से लोगों को दिक्कत होती है। कमोवेश यही स्थिति हाल झिलिया पुल के पास बने शौचालय की है। यहां भी ताला बंद है। यहां के राजेश पाल ने कहा कि शौचालय का निर्माण तो करवा दिया गया, लेकिन उसमें ताला बंद है। अनवर अली ने कहा कि शौचालय महज शो पीश बनकर रह गया है। यदि इसे चालू कर दिया जाए तो काफी लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसमें न बिजली की व्यवस्था है और न ही पानी की। एनएचआई के परियोजना निदेशक एके राय का कहना है कि लाला नगर से ऊंज तक करीब 20 शौचालय बनाए गए हैं। उन शौचालयों की चाभी टोल प्लाजा पर रहती है। वहां से कोई भी व्यक्ति फोन करके चाभी मंगाकर उपयोग कर सकता है। खुला न रखने का कारण वहां हुई चोरियां हैं।
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