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Bhadohi News: वुलमार्क की तरह अब कालीनों पर भी लगेगा लेबल

Wed, 11 Feb 2026 12:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 12:17 AM IST
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Like Woolmark, carpets will now also have labels
आईआईसीटी निदेशक प्रो.राजीव कुमार व केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड के ईडी जीएस भाटी (दाहिने)
भदोही। अब तक ऊनी कपड़ों मे ही वुलमार्क देखने को मिलता था, लेकिन अब कालीनों पर भी वुलेन मार्क देखने को मिलेगा। वुलेन कालीन की देश-विदेश तक बिक्री हो रही है। फिर भी वुलेन कालीन मार्क की गारंटी देने वाले किसी प्रकार के लोगो का इस्तेमाल नहीं हो रहा था। करीब ढाई साल के प्रयास के बाद वुलेन कालीन मार्क का लोगो बनकर तैयार हो चुका है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के निर्देश के बाद जोधपुर स्थित केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड और भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) ने मिलकर ढाई साल के अथक प्रयास के बाद वुलेन कालीन लेबल तैयार किया है। कई बार क्षेत्रीय कालीन निर्यातकों और उत्पादकों के साथ बैठक की गई। लोगों की राय ली गई इसके बाद विभिन्न पहलुओं, गुण-दोष पर विमर्श के बाद इसका लोगो अब बनकर तैयार हो गया है। अब लांचिंग करने की तैयारी है। आईआईसीटी के निदेशक प्रो. राजीव कुमार ने बताया कि कोई वुलेन उत्पाद खरीदता है तो उसके मन में सवाल उठता है कि क्या वह भुगतान के बदले वास्तविक वुलेन उत्पाद ही प्राप्त कर रहा है। जिसे वुल की पहचान न हो तो उसे वुलेन कालीन खरीदते समय कालीन पर लगे वुलेन कालीन लेबल देखकर सुनिश्चित हो सकता है और पूरी गारंटी के साथ कालीन खरीद सकता है। उन्होंने कहा कि यह देश के खुदरा खरीदारों के लिए ही नहीं भारी मात्रा में भारत से कालीन आयात कर रहे आयातकों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। अब तक तो उन्हें प्रयोगशालाओं में भेजकर कालीनों की टेस्टिंग करानी पड़ती थी। वुलेन कालीन लोगो लांच होने के बाद उनकी ये समस्या दूर होगी। यह पूछे जाने पर की क्या वुलेन कालीन लेबल कालीन उत्पादकों को लगाने की बाध्यता होगी। इस पर उन्होंने कहा कि नहीं ऐसा नहीं है। इस लोगो को लगाने का मतलब होगा कि उस पर भारत सरकार की ओर से वुलेन कालीन होने की गारंटी होगी। जो लेबल का प्रयोग करेगा उसे इसका लाभ मिलेगा। कहा कि इसी संदर्भ में 13 फरवरी को रजपूरा स्थित एक प्रतिष्ठान में सेमिनार आयोजित किया गया है। इसमें केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव पद्मिनी सिंगला मुख्य अतिथि होंगी। केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड के अधिशासी निदेशक जीएस भाटी के अलावा कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी), ऑल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के पदाधिकारी और सदस्य भी शामिल होंगे।
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