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वतन की सरहदों पर जिंदगी की जीत लिख देना...
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
Updated Tue, 09 Feb 2016 01:31 AM IST
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चकसिखारी गांव में शनिवार को आयोजित काव्य संध्या में पठानकोट हमले में शहीद जवानों को कवियों ने रचनाओं के जरिए श्रद्धासुमन अर्पित किया। कवियों के निशाने पर पाक के आतंकी, उसके शरणदाता रहे। हास्य व्यंग्यकार बीच-बीच में गंभीर माहौल को गुदगुदा कर हल्का करते रहे।
काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपने अंदाज में राजनीतिक, सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य के बाण साधे। वरिष्ठ व्यंगकार कृष्णावतार त्रिपाठी राही ने महफिल में खूब ठहाके लगवाए।
श्रोताओं ने तालियां बजाकर कवियों का उत्साह बढ़ाया। लोक कवि अर्जुन मुसाफिर ने वतन की सरहदों पर जिंदगी की जीत लिख देना-तिरंगा हो कफन मेरा मरे तो गीत लिख देना....पढ़कर महफिल में जोश भरा। वहीं जिला पंचायत सदस्य और कवि संदीप बालाजी ने पढ़ा, सत-सत नमन उन भारत के सपूतों को-अपने लहू से जो तिरंगा कफन सींचते रहे..।
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वरिष्ठ कवि पं. पारसनाथ मिश्र ने ठेठ अंदाज में पढ़ा, काम तू निराला किहे, पाक मुख काला किहे-देश मुंह लाल किहे, प्राण के गवाइ के...। इस पर खूब तालिया बजीं। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजकुमार पाठक ने पंचायत चुनाव पर पढ़ा कि गांधी जी स्वर्ग लोक से भूतल पर आए-भारत के गांवों की ओर पैर बढ़ाए...।
गीतकार सुरेश पांडेय ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए पढ़ा, शहादत से तेरे सलामत चमन है-तुमको नमन है ऋणी वतन है..। इसके पूर्व गीतकार कन्हैया लाल दुबे की वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. रामशिरोमणि होरिल रहे। अध्यक्षता डॉ. विद्याशंकर त्रिपाठी ने की। इस मौके पर हंसराज तिवारी, प्रेम जौनपुरी, केशव प्रसाद, विंध्यवासिनी त्रिपाठी, वाजिद अली आदि ने अपनी रचना प्रस्तुत की।
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काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपने अंदाज में राजनीतिक, सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य के बाण साधे। वरिष्ठ व्यंगकार कृष्णावतार त्रिपाठी राही ने महफिल में खूब ठहाके लगवाए।
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श्रोताओं ने तालियां बजाकर कवियों का उत्साह बढ़ाया। लोक कवि अर्जुन मुसाफिर ने वतन की सरहदों पर जिंदगी की जीत लिख देना-तिरंगा हो कफन मेरा मरे तो गीत लिख देना....पढ़कर महफिल में जोश भरा। वहीं जिला पंचायत सदस्य और कवि संदीप बालाजी ने पढ़ा, सत-सत नमन उन भारत के सपूतों को-अपने लहू से जो तिरंगा कफन सींचते रहे..।
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वरिष्ठ कवि पं. पारसनाथ मिश्र ने ठेठ अंदाज में पढ़ा, काम तू निराला किहे, पाक मुख काला किहे-देश मुंह लाल किहे, प्राण के गवाइ के...। इस पर खूब तालिया बजीं। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजकुमार पाठक ने पंचायत चुनाव पर पढ़ा कि गांधी जी स्वर्ग लोक से भूतल पर आए-भारत के गांवों की ओर पैर बढ़ाए...।
गीतकार सुरेश पांडेय ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए पढ़ा, शहादत से तेरे सलामत चमन है-तुमको नमन है ऋणी वतन है..। इसके पूर्व गीतकार कन्हैया लाल दुबे की वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. रामशिरोमणि होरिल रहे। अध्यक्षता डॉ. विद्याशंकर त्रिपाठी ने की। इस मौके पर हंसराज तिवारी, प्रेम जौनपुरी, केशव प्रसाद, विंध्यवासिनी त्रिपाठी, वाजिद अली आदि ने अपनी रचना प्रस्तुत की।