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Bhadohi News: भगवास में एफएसटीपी निर्माण को मिली जमीन, एक करोड़ से होगा निर्माण
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भगवास में एफएसटीपी के लिए भूमि चिह्नित कराते तसीलदार सुनील कुमार। स्रोत स्वयं
ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले में दो करोड़ रुपये से दो एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण होगा। ज्ञानपुर तहसील के भगवास में जमीन मिल गई। हालांकि एक अन्य ग्राम पंचायत में अभी जमीन तलाश की जा रही है। इसके लिए अभोली के परऊपुर और भदोही के पिपरिस में जमीन की तलाश की जा रही है। एफएसटीपी का मूल उद्देश्य शहरों की तरह गांवों में मल-जल का निस्तारण करना है।
एफएसटीपी का प्लांट मल को खाद में परिवर्तित कर देगा, जिससे खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। इसकी क्षमता 6 से 10 केएलडी होगी। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब तीन लाख से अधिक एकल शौचालय और 520 से अधिक सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया है। गांव में बने इन शौचालयों में प्रतिदिन ग्रामीण शौच करने के लिए जाते हैं। तीन से चार साल पूर्व बने सामुदायिक शौचालय के टैंक भर जाते हैं। जिसका निस्तारण कराने के लिए पंचायतों को शहर से वाहन को बुलाना पड़ता है। इसके लिए तीन से पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अब सरकार तीन से पांच हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायतों में एफएसटीपी निर्माण कराने की कवायद शुरू की है।
पहले चरण में दो ग्राम पंचायतों में इसका निर्माण होना है। करीब एक एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाले प्लांट के लिए शनिवार को ज्ञानपुर तहसीलदार सुनील कुमार ने भगवास गांव में जमीन की पैमाइश कराई। इससे ज्ञानपुर तहसील में निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि एक अन्य गांव के लिए अब भी जमीन की खोज की जा रही है। एफएसटीपी गांवों में गंदगी प्रबंधन में कारगर साबित होगा। एफएसटीपी निर्माण के लिए एक शर्त यह भी है कि इसका निर्माण उसी ग्राम पंचायत में होगा, जहां पर 3 हजार से अधिक आबादी रहेगी।
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ये है एफएसटीपी : यह मल, कीचड़ और सेप्टेज को सुरक्षित रूप से उपचारित करने के लिए एक संयंत्र है। इस प्रक्रिया में मल से ठोस और तरल पदार्थों को अलग किया जाता है। ठोस पदार्थ को खाद के रूप में उपयोग किया जाता है और तरल पानी को सिंचाई के लिए शुद्ध किया जाता है। इसके स्क्रीनिंग चेंबर में मल को डाला जाता है, जहां ठोस कचरा अलग हो जाता है। इसके बाद मल को प्लांटेड ड्राइंग बेड में भेजा जाता है, जहां पत्थर और बजरी की सतहें ठोस और तरल को अलग करती हैं।
जिले के दो ग्राम पंचायतों में दो करोड़ रुपये से एक-एक एफएसटीपी का निर्माण होगा। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है। भगवास में जमीन मिली है। इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है। दूसरी ग्राम पंचायत में जमीन खोजी जा रही है। - डॉ. सपना अवस्थी, प्रभारी डीपीआरओ भदोही
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एफएसटीपी का प्लांट मल को खाद में परिवर्तित कर देगा, जिससे खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। इसकी क्षमता 6 से 10 केएलडी होगी। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब तीन लाख से अधिक एकल शौचालय और 520 से अधिक सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया है। गांव में बने इन शौचालयों में प्रतिदिन ग्रामीण शौच करने के लिए जाते हैं। तीन से चार साल पूर्व बने सामुदायिक शौचालय के टैंक भर जाते हैं। जिसका निस्तारण कराने के लिए पंचायतों को शहर से वाहन को बुलाना पड़ता है। इसके लिए तीन से पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अब सरकार तीन से पांच हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायतों में एफएसटीपी निर्माण कराने की कवायद शुरू की है।
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पहले चरण में दो ग्राम पंचायतों में इसका निर्माण होना है। करीब एक एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाले प्लांट के लिए शनिवार को ज्ञानपुर तहसीलदार सुनील कुमार ने भगवास गांव में जमीन की पैमाइश कराई। इससे ज्ञानपुर तहसील में निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि एक अन्य गांव के लिए अब भी जमीन की खोज की जा रही है। एफएसटीपी गांवों में गंदगी प्रबंधन में कारगर साबित होगा। एफएसटीपी निर्माण के लिए एक शर्त यह भी है कि इसका निर्माण उसी ग्राम पंचायत में होगा, जहां पर 3 हजार से अधिक आबादी रहेगी।
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ये है एफएसटीपी : यह मल, कीचड़ और सेप्टेज को सुरक्षित रूप से उपचारित करने के लिए एक संयंत्र है। इस प्रक्रिया में मल से ठोस और तरल पदार्थों को अलग किया जाता है। ठोस पदार्थ को खाद के रूप में उपयोग किया जाता है और तरल पानी को सिंचाई के लिए शुद्ध किया जाता है। इसके स्क्रीनिंग चेंबर में मल को डाला जाता है, जहां ठोस कचरा अलग हो जाता है। इसके बाद मल को प्लांटेड ड्राइंग बेड में भेजा जाता है, जहां पत्थर और बजरी की सतहें ठोस और तरल को अलग करती हैं।
जिले के दो ग्राम पंचायतों में दो करोड़ रुपये से एक-एक एफएसटीपी का निर्माण होगा। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है। भगवास में जमीन मिली है। इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है। दूसरी ग्राम पंचायत में जमीन खोजी जा रही है। - डॉ. सपना अवस्थी, प्रभारी डीपीआरओ भदोही