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Bhadohi News: कार्तिक ने साल भर तक मनाया, फिर भाला फेंककर माता-पिता के सिर शोहरत सजाया
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लक्ष्य तय हो और हौसले बुलंद हो तो मंजिल के राह की बाधाएं खुद ब खुद दूर हो जाती हैं। यह कथन डीघ ब्लॉक के गांधी गांव निवासी कार्तिक साहनी के ऊपर एकदम सटीक बैठती है। 16 साल पहले होलपुर गांव में युवाओं को भाला फेंकते देख कार्तिक का इस खेल के प्रति जुड़ाव हुआ। उन्होंने भाला फेंक खेलना शुरू किया तो घर से लेकर बाहर तक उनकी आलोचना हुई। माता-पिता भी तैयार नहीं थे। उन्होंने विरोध के बीच अंतरराष्ट्रीय रेसलर रिंकू सिंह राजपूत और साथ शिवपूजन बिंद के साथ भाला फेंकने का अभ्यास शुरू किया। कार्तिक बताती है कि मैदान पर अभ्यास पर जाने के लिए उन्हें माता-पिता को मनाना पड़ता था। यह दौर एक साल तक चला। किसी तरह मां तैयार हुई, लेकिन पिता अखिलेश साहनी खिलाफ ही थे। कालीन बुनकर परिवार चलाने वाले उनके पिता का कहना था पढ़-लिखकर कुछ बनो खेल के क्षेत्र में कुछ नहीं है। बताया कि 2009 में केरल के तिरूअंनतपुरम में भाला से स्वर्ण पदक पर निशाना साधा तो पिता की नाराजगी भी दूर हो गई। इसके बाद पिता का भरपूर सहयोग मिला कॅरियर में पीछे मुड़कर नहीं देखा। कार्तिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में आधा दर्जन से अधिक गोल्ड और दर्जनों रजत व कांस्य मेडल जीत चुकी हैं। वर्तमान में वह खेल कोटे से सीआरपीएफ की महिला विंग में है। छत्तीसगढ़ के बस्तर हेडक्वार्टर में 241 बटालियन में तैनात कार्तिक देश सेवा कर रही है। उनका कहना है कि कठिन मेहनत से ही समाज की धारणा बदलती है। बेटियों को हतोत्साहित करने वालों की बोलती बंद होती है। बताया कि उनका सपना देश के लिए ओलंपिक में मेडल जीतना है।
फोटो: 11
संवाद न्यूज एजेंसी हर बाधा को दूर करती हैं शीतला माता
सीतामढ़ी। जनपद के सुदूरवर्ती दक्षिणांचल क्षेत्र कोनिया के गंगा तटीय गांव कालिक मोरिया के खैरहवा बस्ती स्थित मां शीतला माता मंदिर 125 वर्ष पुराना है। शीतला माता मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था, विश्वास और भक्ति का अनुपम केंद्र है। मंदिर में स्थापित माता रानी की दिव्य मूर्ति को श्रद्धालु अपलक निहारते हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि प्राचीन शीतला माता मंदिर कोनिया के श्रद्धालुओं के आस्था और विश्वास का केंद्र है। बताते हैं कि सन् 1900 सौ के आसपास गांव के गड़ेरिया बिरादरी के बिहारी पंडा ने मंदिर का निर्माण कराया था। शीतला माता बिहारी पंडा परिवार की कुल देवी है। उनके निधन के बाद वंशज माता रानी की सेवा करते आ रहे हैं। वर्तमान में बिहारी पंडा के प्रपौत्र सरजू पंडा मंदिर के पुजारी हैं। वैसे तो मंदिर में हर दिन श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र भर दूर दराज के दर्शनार्थियों का सिलसिला लगा रहता है। गांव के विवेक तिवारी ने बताया कि शीतला माता मंदिर में हर सोमवार को विशेष पूजन के साथ मेला लगता है। यहां भक्तों को हर कष्टों से मुक्ति मिलती है।
नवरात्रि पूजा मुहूर्त
बैरीबीसा गांव निवासी पंडित रोहित मिश्रा ने बताया कि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की अराधना की जाती है। मां की पूजा नीले रंग के कपड़े पहनकर करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और धन, सुख, समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। बताया कि भक्त मां को गुड़ का भोग लगाए। मां की पूजा से हर प्रकार के भय व कष्ट दूर होते हैं। इसके साथ बुरे विचारों से भी छुटकारा मिलता है।
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इन मंत्रों से करें मां की अराधना
-ओम कालरात्रि नम:।
-एकवेणीजपाकर्णपुरानना खरास्थिता । लम्बोष्ठीकर्णिकाकर्णीतैलाभ्यङ्गशरीरिणी ॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा । वर्धनामूर्धजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥
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फोटो: 11
संवाद न्यूज एजेंसी हर बाधा को दूर करती हैं शीतला माता
सीतामढ़ी। जनपद के सुदूरवर्ती दक्षिणांचल क्षेत्र कोनिया के गंगा तटीय गांव कालिक मोरिया के खैरहवा बस्ती स्थित मां शीतला माता मंदिर 125 वर्ष पुराना है। शीतला माता मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था, विश्वास और भक्ति का अनुपम केंद्र है। मंदिर में स्थापित माता रानी की दिव्य मूर्ति को श्रद्धालु अपलक निहारते हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि प्राचीन शीतला माता मंदिर कोनिया के श्रद्धालुओं के आस्था और विश्वास का केंद्र है। बताते हैं कि सन् 1900 सौ के आसपास गांव के गड़ेरिया बिरादरी के बिहारी पंडा ने मंदिर का निर्माण कराया था। शीतला माता बिहारी पंडा परिवार की कुल देवी है। उनके निधन के बाद वंशज माता रानी की सेवा करते आ रहे हैं। वर्तमान में बिहारी पंडा के प्रपौत्र सरजू पंडा मंदिर के पुजारी हैं। वैसे तो मंदिर में हर दिन श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र भर दूर दराज के दर्शनार्थियों का सिलसिला लगा रहता है। गांव के विवेक तिवारी ने बताया कि शीतला माता मंदिर में हर सोमवार को विशेष पूजन के साथ मेला लगता है। यहां भक्तों को हर कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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नवरात्रि पूजा मुहूर्त
बैरीबीसा गांव निवासी पंडित रोहित मिश्रा ने बताया कि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की अराधना की जाती है। मां की पूजा नीले रंग के कपड़े पहनकर करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और धन, सुख, समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। बताया कि भक्त मां को गुड़ का भोग लगाए। मां की पूजा से हर प्रकार के भय व कष्ट दूर होते हैं। इसके साथ बुरे विचारों से भी छुटकारा मिलता है।
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इन मंत्रों से करें मां की अराधना
-ओम कालरात्रि नम:।
-एकवेणीजपाकर्णपुरानना खरास्थिता । लम्बोष्ठीकर्णिकाकर्णीतैलाभ्यङ्गशरीरिणी ॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा । वर्धनामूर्धजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥