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झूम के बरसा सावन, उमस से मिली राहत
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सावन माह में शनिवार को दोपहर बाद शुरू हुई झमाझम बारिश ने लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिली। वहीं दूसरी ओर कई रिहायशी कच्चे घर गिर गए। जगह-जगह जलजमाव से आवागमन बी प्रभावित रहा।
लगभग डेढ़ माह पूर्व हुई मूसलाधार बारिश के बाद क्रम रुकने से गर्मी और उमस बढ़ गई थी। किसानों की फसल भी सूखने लगी थी। शनिवार को अपराह्न लगभग तीन से पांच बजे तक दो घंटे हुई बारिश से चौरी थाना क्षेत्र के संवरपुर निवासी महेंद्र यादव, श्यामलाल का कच्चा घर भरभरा कर गिर गया। पीड़ितों ने बताया कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई लेकिन गृहस्थी के सामान मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गए। इसी तरह नगर पंचायत सुरियावां के वार्ड नंबर चार शास्त्री नगर बाईपास-कुसौड़ा मार्ग जलनिकासी के अभाव में जलमग्न रहा।
इस संबंध में समाजसेवी दादा दुबे, पारस चौधरी, राजेश गौतम, अजय, बाबूलाल, सुशील कुमार, शिवनारायण, राजेश मिश्रा, रमाशंकर ने बताया कि नगर प्रशासन की उपेक्षा के कारण उक्त मार्ग पर चलने वाले और किनारे रहने वालों को बारहों माह तीन फिट भरे पानी का सामना करना आम बात है। नगरीय बाजार होने के वाराणसी, जौनपुर की सीमा से सटे गांवों के लोगों का भी आवागमन नगर में होता है बावजूद इसके मार्ग की हालत नहीं सुधर सकी है। कई बार अधिशासी अधिकारी सोनल जैन से शिकायत की गई जिसका कोई असर नहीं दिख रहा है। बारिश बंद होने पर जलनिकासी की व्यवस्था कराकर समस्या का समाधान कराना जनहित में होगा।
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इसी तरह से ज्ञानपुर नगर, भदोही नगर, सरोई, औराई, माधोसिंह, घोसिया नगर, खमरिया नगर, दुर्गागंज, पाली, सुभाषनगर, सूफीनगर-गोधना, ऊंज, कुरमैचा, नवधन, सुधवैं, कोइरौना, सीतामढ़ी, सोनपुर-कटरा, छेछुआं-धनतुलसी, भदरांव, लालानगर, ज्ञानपुररोड, जंगीगंज स्टेशन, मिर्जापुर, औराई-भदोही मार्ग की हालत बद से बदतर बनी रही। कारण यह है कि नगर और गांव की सरकार जलनिकास व्यवस्था को लेकर सक्रिय नहीं है। तहसील अधिकारी मात्र नगरों तक सीमित होकर ग्रामीण इलाकों की सुधि नहीं लेते। कई गांवों में बारिश के पानी को निकालने के लिए कहासुनी भी होती रही।
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लगभग डेढ़ माह पूर्व हुई मूसलाधार बारिश के बाद क्रम रुकने से गर्मी और उमस बढ़ गई थी। किसानों की फसल भी सूखने लगी थी। शनिवार को अपराह्न लगभग तीन से पांच बजे तक दो घंटे हुई बारिश से चौरी थाना क्षेत्र के संवरपुर निवासी महेंद्र यादव, श्यामलाल का कच्चा घर भरभरा कर गिर गया। पीड़ितों ने बताया कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई लेकिन गृहस्थी के सामान मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गए। इसी तरह नगर पंचायत सुरियावां के वार्ड नंबर चार शास्त्री नगर बाईपास-कुसौड़ा मार्ग जलनिकासी के अभाव में जलमग्न रहा।
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इस संबंध में समाजसेवी दादा दुबे, पारस चौधरी, राजेश गौतम, अजय, बाबूलाल, सुशील कुमार, शिवनारायण, राजेश मिश्रा, रमाशंकर ने बताया कि नगर प्रशासन की उपेक्षा के कारण उक्त मार्ग पर चलने वाले और किनारे रहने वालों को बारहों माह तीन फिट भरे पानी का सामना करना आम बात है। नगरीय बाजार होने के वाराणसी, जौनपुर की सीमा से सटे गांवों के लोगों का भी आवागमन नगर में होता है बावजूद इसके मार्ग की हालत नहीं सुधर सकी है। कई बार अधिशासी अधिकारी सोनल जैन से शिकायत की गई जिसका कोई असर नहीं दिख रहा है। बारिश बंद होने पर जलनिकासी की व्यवस्था कराकर समस्या का समाधान कराना जनहित में होगा।
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इसी तरह से ज्ञानपुर नगर, भदोही नगर, सरोई, औराई, माधोसिंह, घोसिया नगर, खमरिया नगर, दुर्गागंज, पाली, सुभाषनगर, सूफीनगर-गोधना, ऊंज, कुरमैचा, नवधन, सुधवैं, कोइरौना, सीतामढ़ी, सोनपुर-कटरा, छेछुआं-धनतुलसी, भदरांव, लालानगर, ज्ञानपुररोड, जंगीगंज स्टेशन, मिर्जापुर, औराई-भदोही मार्ग की हालत बद से बदतर बनी रही। कारण यह है कि नगर और गांव की सरकार जलनिकास व्यवस्था को लेकर सक्रिय नहीं है। तहसील अधिकारी मात्र नगरों तक सीमित होकर ग्रामीण इलाकों की सुधि नहीं लेते। कई गांवों में बारिश के पानी को निकालने के लिए कहासुनी भी होती रही।