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दम तोड़ रहे जनऔषधि केंद्र, 700 के सापेक्ष महज 200 दवाएं

Sat, 15 Jan 2022 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 15 Jan 2022 12:21 AM IST
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Janaushadhi center dying, only 200 medicines against 700
भदोही। आमजन को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र योजना अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पा रही है। सरकार की मंशा थी कि लोगों को दवाइयां 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती उपलब्ध कराई जाएंगी, लेकिन कुछ दवाएं उपलब्ध न होने और चिकित्सकों के जेनरिक दवाएं न लिखने के कारण अब औषधि केंद्र दम तोड़ रहे हैं। कई केंद्र बंद हो गए और जो अभी चल रहे हैं, उनमें 600 से 700 की जगह महज 150 से 200 तरह की ही दवाएं हैं। फिलहाल भदोही नगर में दो जन औषधि केंद्र चल रहे हैं।
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जन औषधि केंद्रों को कामयाबी न मिलने के लिए राजकीय डाक्टर अपने कारण गिनाते हैं, जबकि केंद्र संचालक अलग कारण मानते हैं। भदोही एमबीएस अस्पताल प्रांगण में चल रहे जन औषधि केंद्र के संचालक नवीन कुमार सिंह के अनुसार, उनके यहां 180 से 200 दवाएं ही उपलब्ध हैं। बताते हैं कि शुरू में सभी दवाएं रखी गई थीं, लेकिन जब चिकित्सक मरीजों को ब्रांडेड दवाएं लिखेंगे तो जेनरिक दवाएं लेने कौन आएगा? उन्होंने कहा कि हमारी बहुत सी दवाएं खराब हो गईं।
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चिकित्सकों का दावा, दवा न होने से बंद हो रहे केंद्र
एमबीएस अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि जन औषधि केंद्रों पर 700 दवाओं में से 50 दवाएं ही होगी। जब मरीज के मांगने पर दवाएं नहीं मिलती तो दोबारा मरीज वहां नहीं जाते। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, योजना जब लाई गई थी तो जिले में आधा दर्जन से अधिक जनौषधि केंद्र खुले थे, लेकिन वर्तमान में भदोही नगर में दो दुकानें ही चल रही हैं।
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डॉक्टरों को है जेनरिक दवाएं लिखने का निर्देश
भदोही। जन औषधि केंद्रों के मामले में प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि परियोजना की नीति एकदम स्पष्ट है कि सभी राजकीय चिकित्सक अनिवार्य रूप से जेनरिक दवाएं ही रोगियों को लिखेंगे। लेकिन, इसका पालन नहीं हो रहा है। इसी को देखते हुए गत 31 दिसंबर को प्रदेश की राजधानी में बैठे परियोजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने सभी सीएमओ को पत्र जारी किया था। कार्यपालक अधिकारी ने स्टेट नोडल अधिकारी के दो मोबाइल नंबर भी राजकीय अस्पतालों में प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए थे, ताकि यदि चिकित्सक जेनरिक दवाएं नहीं लिख रहे हों तो मरीज उस नंबर पर संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध शिकायत दर्ज करा सकें। लेकिन कहीं ये नंबर प्रदर्शित नहीं हैं।

परवान नहीं चढ़ सकी योजना
भदोही। वर्तमान में जिले में दो जन औषधि केंद्र हैं, जो भदोही मे ही हैं। ज्ञानपुर में केंद्र खुल नहीं सका और गोपीगंज में प्रारंभ में खुला था और बंद हो गया। भदोही में प्रारंभ में दो से अधिक केंद्र खुले थे, जिसमें अब केवल दो ही बचे हैं। इन दोनों में भी केवल वही दवाएं हैं कि जो आम हैं और या तो डाक्टर रोगी को लिखते हैं अथवा रोगी खुद से जन औषधि में जाकर जेनरिक दवाएं खरीद लेता है। भदोही एमबीएस प्रांगण में जन औषधि केंद्र संचालक नवीन सिंह ने कहा कि शुरू शुरू में तो हर रोज 250 से अधिक खरीदार आते थे लेकिन चिकित्सकों की उदासीनता से धीरे धीरे ग्राहक घटते चले गए फलस्वरूप आज 50-60 मरीज प्रतिदिन आ जाते हैं।
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