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बौद्घिक कुशलता, इच्छाशक्ति से होता है विकास
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Fri, 22 May 2015 01:55 AM IST
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कार्यशाला में गुरुवार को प्रथम वर्ष के छात्रों को प्राध्यापकों ने इकाई नियोजन और पाठ योजना निर्माण के बारे में मार्गदर्शन किया। उन्हें बताया गया कि पाठ योजना निर्माण से अध्यापन क्रिया सुव्यस्थित तरीके से क्रियान्वित होती है।
यदि पाठ योजना का सही तरीके से निर्माण करने का ज्ञान हो जाए तो पूरी शिक्षण प्रतिक्रया प्रभावी हो जाती है और निर्धारित उद्देश्य आसानी से प्राप्त हो जाते हैं।
तीसरे और चौथे सत्र में छात्रों को लघु समूहों बांटकर पाठ योजना के लिए अभ्यास, वार्ता और मार्गदर्शन किया गया। द्वितीय वर्ष के प्रथम और द्वितीय सत्र अध्यापकों को व्यवसायिक विकास के संबंध में बताया गया।
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बौद्घिक कुशलताओं एवं इच्छा शक्ति के द्वारा ही इसे हासिल किया जा सकता है। इसमें ज्ञान, कौशल और अभिवृति को अनिवार्य रूप से आत्मसात किया जाना चाहिए।
तीसरे और चौथे सत्र में सतत शिक्षा के महत्व को बताया गया। कहा कि सतत शिक्षा से जीवन की चुनौतियों से पार पाया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. श्रीनिवास पांडेय, डॉ. संतोष आर्या, डॉ. महेंद्र मिश्रा, जय सिंह यादव, डॉ. लोकपति त्रिपाठी आदि रहे।
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यदि पाठ योजना का सही तरीके से निर्माण करने का ज्ञान हो जाए तो पूरी शिक्षण प्रतिक्रया प्रभावी हो जाती है और निर्धारित उद्देश्य आसानी से प्राप्त हो जाते हैं।
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तीसरे और चौथे सत्र में छात्रों को लघु समूहों बांटकर पाठ योजना के लिए अभ्यास, वार्ता और मार्गदर्शन किया गया। द्वितीय वर्ष के प्रथम और द्वितीय सत्र अध्यापकों को व्यवसायिक विकास के संबंध में बताया गया।
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बौद्घिक कुशलताओं एवं इच्छा शक्ति के द्वारा ही इसे हासिल किया जा सकता है। इसमें ज्ञान, कौशल और अभिवृति को अनिवार्य रूप से आत्मसात किया जाना चाहिए।
तीसरे और चौथे सत्र में सतत शिक्षा के महत्व को बताया गया। कहा कि सतत शिक्षा से जीवन की चुनौतियों से पार पाया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. श्रीनिवास पांडेय, डॉ. संतोष आर्या, डॉ. महेंद्र मिश्रा, जय सिंह यादव, डॉ. लोकपति त्रिपाठी आदि रहे।