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महंगाई की मार: सात गुना बढ़ा सरसो खेती का रकबा
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खाद्य तेल की महंगाई की मार ने किसानों को सरसों की खेती करने के लिए मजबूर कर दिया। इससे जिले में सरसों की फसल का करीब साढ़े सात हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ गया। 2020 में 1300 हेक्टेयर में खेती हुई थी। जबकि 2021 में यह बढ़कर नौ हजार हेक्टेयर पहुंच गई।
कालीन नगरी में वैसे तो मुख्य रूप से गेहूं और धान की खेती होती है। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से हर साल रकबा तय किया जाता है। 2019 में 53 हजार, 2020 में 51 हजार हेक्टेयर में रबी की खेती का रकबा तय किया गया। इसमें 45 हजार में गेहूं जबकि छह हजार हेक्टेयर में दलहन, तिलहन की खेती के लिए शामिल किया गया, लेकिन सरसों तेल की आसमान छूती कीमतों ने किसानों को सरसों की खेती करने के लिए मजबूर कर दिया। जो किसान पूर्व के वर्षों में सरसों की खेती नाम मात्र का करते थे वह इस साल पांच से छह बिस्वा तक की खेती की। वर्ष 2021 यानी मौजूदा वर्ष में 49 हजार हेक्टेयर में रबी सीजन की खेती हो रही है। इसमें से करीब दो हजार हेक्टेयर सरसो के लिए विभाग ने रकबा निर्धारित किया था, हालांकि किसानों ने करीब नौ हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती किया है।
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कालीन नगरी में वैसे तो मुख्य रूप से गेहूं और धान की खेती होती है। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से हर साल रकबा तय किया जाता है। 2019 में 53 हजार, 2020 में 51 हजार हेक्टेयर में रबी की खेती का रकबा तय किया गया। इसमें 45 हजार में गेहूं जबकि छह हजार हेक्टेयर में दलहन, तिलहन की खेती के लिए शामिल किया गया, लेकिन सरसों तेल की आसमान छूती कीमतों ने किसानों को सरसों की खेती करने के लिए मजबूर कर दिया। जो किसान पूर्व के वर्षों में सरसों की खेती नाम मात्र का करते थे वह इस साल पांच से छह बिस्वा तक की खेती की। वर्ष 2021 यानी मौजूदा वर्ष में 49 हजार हेक्टेयर में रबी सीजन की खेती हो रही है। इसमें से करीब दो हजार हेक्टेयर सरसो के लिए विभाग ने रकबा निर्धारित किया था, हालांकि किसानों ने करीब नौ हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती किया है।
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