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भारतीय कला और संस्कृति विश्व में बेजोड़
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भदोही। डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय में बीएचयू के एक भारत श्रेष्ठ भारत इकाई के सहयोग से चल रहे सात दिवसीय भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला के छठे दिन असम युनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के व्याख्याता डा.प्रभात कुमार मिश्र ने असम और मणिपुर के संदर्भ में भारत की 64 कलाओं का बड़े सुंदर ढंग से व्याख्या की। उन्होंने बताया कि भारत की कलाओं का पूरी दुनिया में कोई जोड़ नहीं है। इन कलाओं को सहेजने के लिए सभी को एकजुट प्रयास करना चाहिए।
बीएचयू नृत्य विभाग की प्रोफेसर डा.लेनिना भट्ट ने भारत में प्रचलित नृत्य कलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि हमारी कला विश्व में अपनी छाप छोड़ती है। उन्होंने अपनी बातों को नृत्य के साथ लोगों के सामने रखा। केएनपीजी ज्ञानपुर के इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर डा.बाल्केश्वर ने कहा कि न्याय दर्शन में लिखा है कि जाति की आकृति से पहचान होनी चाहिए। बताया कि पतंजलि के अनुसार व्यक्ति को देखने से जो प्रतीत होता है वह जाति है। जबकि मानव को उसके जन्म से नहीं बल्कि उसके कर्म से पहचाना जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व के समस्त मानव एक जाति है। यह बात विज्ञान भी प्रमाणित करता है। जबकि भारत में अनेक जातियां होने के बाद भी अनेकता में एकता की प्रतिमूर्ति हैं। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डा.यशवीर सिंह ने की। अंत में प्राचार्य डा.मुरलीधर राम गुप्ता ने सभी सहभागियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया। समन्वयक डा.गौतम गुप्ता ने संचालन किया। डा.ब्रजेश सिंह व वर्षा रानी से आभार व्यक्त किया।
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बीएचयू नृत्य विभाग की प्रोफेसर डा.लेनिना भट्ट ने भारत में प्रचलित नृत्य कलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि हमारी कला विश्व में अपनी छाप छोड़ती है। उन्होंने अपनी बातों को नृत्य के साथ लोगों के सामने रखा। केएनपीजी ज्ञानपुर के इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर डा.बाल्केश्वर ने कहा कि न्याय दर्शन में लिखा है कि जाति की आकृति से पहचान होनी चाहिए। बताया कि पतंजलि के अनुसार व्यक्ति को देखने से जो प्रतीत होता है वह जाति है। जबकि मानव को उसके जन्म से नहीं बल्कि उसके कर्म से पहचाना जाना चाहिए।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व के समस्त मानव एक जाति है। यह बात विज्ञान भी प्रमाणित करता है। जबकि भारत में अनेक जातियां होने के बाद भी अनेकता में एकता की प्रतिमूर्ति हैं। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डा.यशवीर सिंह ने की। अंत में प्राचार्य डा.मुरलीधर राम गुप्ता ने सभी सहभागियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया। समन्वयक डा.गौतम गुप्ता ने संचालन किया। डा.ब्रजेश सिंह व वर्षा रानी से आभार व्यक्त किया।
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