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Bhadohi News: कालीनों में जूट का इस्तेमाल बढ़ने से बढ़ेगा ग्रामीण रोजगार

Fri, 20 Jun 2025 12:41 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 20 Jun 2025 12:41 AM IST
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Increasing use of jute in carpets will increase rural employment
भदोही। राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता के निदेशक डॉ. डीबी शाक्यवार ने कहा कि प्राकृतिक रेशा उत्पादन में दुनिया भर में चीन के बाद भारत का दूसरे स्थान पर है और जूट के उत्पादन में हम विश्व में नंबर एक हैं।
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जूट न केवल आसानी से उपलब्ध होने वाला रेशा है, बल्कि इसके उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि भदोही के कालीन उद्योग में जूट का प्रयोग बढ़ सकता है। बृहस्पतिवार को भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) में जूट के विकास पर कार्यशाला में उन्होंने कहा कि केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने इस पर विशेष रूप से ध्यान दिया है।
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कहा कि जूट ऊन या अन्य धागों से सस्ता पड़ता है और ऊन अथवा अन्य धागों की तरह ही इसे भी मनचाहे रंगों में रंगा जा सकता है।
कहा कि इस पर कालीन उद्यमी विचार करें। भारत सरकार कालीनों में इसका उपयोग बढ़ाने के लिए कोई योजना भी दे सकता है। उन्होंने जूट पर संस्थान की ओर से क्या अनुसंधान हो रहे हैं। इस पर जानकारी दी।
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उनके संस्थान के सहयोगी डॉ. संजय देवनाथ, डॉ. कार्तिक ने सहयोग किया। आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने सुझाव दिया कि भदोही में जूट की उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए संस्थान भदोही में एक डिपो खोल सकता है। एकमा के पूर्व संयुक्त सचिव अश्फाक अंसारी ने कहा कि जूट का प्रयोग बढ़ाने के लिए भारत सरकार यदि इंनसेंटिव देती है तो यह तेजी से विकास करेगा।

आईआईसीटी के निदेशक डॉ. राजीव कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि जूट के रेशों को ऊन की तरह ही अच्छी किस्म के कालीन बनाया जा सकता है। उन्होंने कोलकाता से आए अधिकारियों का आईआईसीटी में स्वागत किया। अर्पित पोड़वाल, केवल मित्तल, मनोज कुमार, राकेश दुबे, राजकुमार बोथरा, सत्य कुमार, अब्दुर्रहीम अंसारी, अभिषेक गुप्ता, आशीष बुधिया आदि ने विचार व्यक्त किए।
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