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चार दिन में 20 बीघे जमीन गंगा में समाई

Wed, 02 Sep 2020 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 12:03 AM IST
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In four days, 20 bighas of land merge into the Ganges
सीतामढ़ी। गंगा की कुपित जलधार कोनिया के किसानों के लिए अभिशाप बन गई है। महज एक दशक में ही दो हजार बीघे से अधिक कृषि योग्य खेती की जमीन गंगा की बाढ़ में विलीन हो चुकी है। किसानों का कहना है कि जिस जमीन पर खेती कर कभी कोनिया का किसान खुशहाल रहता था, उन जमीनों पर अब गंगा की धारा प्रवाहित होने लगी है।
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गंगा तटीय गांव मवैयाथान सिंह में पिछले चार दिनों में ही लगभग 20 बीघे से अधिक खेती की जमीन गंगा कटान की भेंट चढ़ गई। गांव के किसानों के कहना है कि महज 10 वर्षों में ही 400 बीघे से अधिक तरी और उपरवार की खेती की जमीन गंगा की धारा में विलीन हो चुकी है। आरोप लगाया कि सरकार और जिला प्रशासन अन्नदाताओं की बर्बादी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव के किसानों ने कटान से हो रही अपनी बर्बादी को रोकने के लिए प्रदर्शन कर आवाज बुलंद की। तीन ओर गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र में गंगा कटान विभीषिका का रूप धारण कर लिया है। गंगा का जल स्तर बढ़ते ही गंगा कटान शुरू हो जाता है। छेछुआ, भुर्रा, इटहरा और मवैयाथान सिंह सहित कई गंगा तटीय गांवों के किसान कटान से बर्बाद होते जा रहे हैं। किसानों के अनुसार पूरे कोनिया पूरे क्षेत्र में अभी तक तीन हजार बीघे से अधिक जमीन गंगा ने समा चुकी है। कटान से बर्बादी रोकने के लिए प्रदर्शन करने वालों में राकेश सिंह, जिलाजीत सिंह, अनुराग सिंह, राजन पाठक, अमृतलाल हलवाई, अरविंद सिंह, पिंटू सिंह, राहीद अली, शिवचंद विश्वकर्मा आदि रहे।
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