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Bhadohi News: रेशम विकास के लिए सीएसटीआरआई से अनुबंध करेगा आईआईसीटी
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भदोही। टेक्सटाइल के क्षेत्र में डिग्री प्रदान करने वाली एशिया की इकलौती भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) जूट के बाद अब रेशम विकास को लेकर समझौते के प्रयास में जुटी है। संस्थान इसको लेकर प्रस्ताव तैयार करने में जुटा है। संस्थान जल्द ही केंद्रीय रेशम औद्योगिक अनुसंधान संस्थान (सीएसटीआरआई) के साथ इन बिंदुओं पर लेकर चर्चा करेगा।
आईआईसीटी के निदेशक डाॅ. राजीव कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि ऊन के विकास के लिए संस्थान शुरू से ही काम कर रहा है। इसके लिए वस्त्र मंत्रालय ने संस्थान को विभिन्न प्रकार के टेस्टिंग लैब प्रदान किया है। जिससे उद्यमी लाभान्वित भी हो रहे हैं।
इसी कड़ी में कालीन उद्यमियों को उच्च कोटि के जूट की उपलब्धता, जूट से संबंधित उत्पादों पर अनुसंधान, जूट के नकारात्मक पक्षों को जान कर उन्हें दूर करने और कौन से जूट यार्न कालीन और फ्लोर कवरिंग में सबसे उपयोगी सिद्ध होंगे। इस पर काम करने के लिए जेसीआई से समझौता किया गया है।
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इसको लेकर कालीन उद्यमियों के लिए कार्यक्रम भी शुरू कर दिया गया है। इसी दिशा में अब संस्थान रेशम (सिल्क) कालीनों और हस्तशिल्प के विकास के लिए सीएसटीआरआई, बंगलोर के साथ समझौते के लिए मसौदा तैयार कर रहा है। बताया कि भारत से भदोही, मिर्जापुर, कश्मीर, दिल्ली, पानीपत, जयपुर क्षेत्र से अच्छी मात्रा में सिल्क कालीनों का निर्माण और निर्यात हो रहा है। सिल्क से और क्या-क्या हस्तशिल्प बन सकता है। आने वाले दिनों में सीएसटीआरआई बंगलोर से समझौते के बाद इसी पर अनुसंधान और विकास करेंगे, जो कालीन और हस्तशिल्प उद्यमियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होने वाला है।
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आईआईसीटी के निदेशक डाॅ. राजीव कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि ऊन के विकास के लिए संस्थान शुरू से ही काम कर रहा है। इसके लिए वस्त्र मंत्रालय ने संस्थान को विभिन्न प्रकार के टेस्टिंग लैब प्रदान किया है। जिससे उद्यमी लाभान्वित भी हो रहे हैं।
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इसी कड़ी में कालीन उद्यमियों को उच्च कोटि के जूट की उपलब्धता, जूट से संबंधित उत्पादों पर अनुसंधान, जूट के नकारात्मक पक्षों को जान कर उन्हें दूर करने और कौन से जूट यार्न कालीन और फ्लोर कवरिंग में सबसे उपयोगी सिद्ध होंगे। इस पर काम करने के लिए जेसीआई से समझौता किया गया है।
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इसको लेकर कालीन उद्यमियों के लिए कार्यक्रम भी शुरू कर दिया गया है। इसी दिशा में अब संस्थान रेशम (सिल्क) कालीनों और हस्तशिल्प के विकास के लिए सीएसटीआरआई, बंगलोर के साथ समझौते के लिए मसौदा तैयार कर रहा है। बताया कि भारत से भदोही, मिर्जापुर, कश्मीर, दिल्ली, पानीपत, जयपुर क्षेत्र से अच्छी मात्रा में सिल्क कालीनों का निर्माण और निर्यात हो रहा है। सिल्क से और क्या-क्या हस्तशिल्प बन सकता है। आने वाले दिनों में सीएसटीआरआई बंगलोर से समझौते के बाद इसी पर अनुसंधान और विकास करेंगे, जो कालीन और हस्तशिल्प उद्यमियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होने वाला है।