{"_id":"57e6dae34f1c1b3176a8391b","slug":"hindi-literature-in-intellectual-bondage","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुद्धिजीविता के बंधन में है हिंदी साहित्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुद्धिजीविता के बंधन में है हिंदी साहित्य
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Sun, 25 Sep 2016 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी का भविष्य बतौर भाषा अच्छा है, लेकिन हिंदी साहित्य का नहीं। क्योंकि साहित्य में जो लिखा जा रहा है, उसके पाठक नहीं हैं। हिंदी साहित्य बुद्धिजीविता के बंधन में बंधकर रह गया है। यह कहना है दर्जनों चर्चित सीरियलों और फिल्मों की कहानी लिख चुके फिल्म-लेखक डॉ. अखिलेश मिश्र ‘बोधिसत्व’ का।
डॉ. बोधिसत्व ने शनिवार को ‘अमर उजाला’ के साथ लेखन से जुड़े कई बिंदुओं पर बातचीत की। मूल रूप से सुरियावां ब्लॉक के भिखारीरामपुर गांव निवासी बोधिसत्व लंबे समय से सीरियल और फिल्म लेखन से जुड़े रहे हैं। मुंबई में रहकर वह लेखन कार्य करते हैं। ‘आम्रपाली’ से लेकर ‘देवों के देव... महादेव’ सीरियल और फिर ‘शिखर’ जैसी फिल्म तक उनके सधे लेखन की पूरी दुनिया दाद देती है। एक निजी आयोजन में शामिल होने आए डॉ. बोधिसत्व ने साहित्य और सीरियल लेखन में फर्क भी बताए। कहा कि सीरियल लेखन में लोक अभिरुचि आपकी अभिरुचि से सीधे जुड़ती है। इसे निर्धारित समयावधि में रुचिकर ढंग से समायोजित करना पड़ता है, जबकि साहित्य लेखन में समय का कोई बंधन नहीं रहता है। अधिकतम एक मिनट या कुछ ज्यादा के विज्ञापन में एक पूरी कहानी को कह जाने की चुनौती लेखन में अलग रोमांच पैदा करती है। डॉ. बोधिसत्व द्वारा लिखा गया सीरियल ‘चंद्रनंदिनी’ आगामी 10 अक्टूबर से प्रसारित होगा। बताया कि मूलरूप से चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन पर आधारित सीरियल की कहानी में पारिवारिक ड्रामा प्रमुख होगा। इसके अलावा कैलाश खेर के प्रोजेक्ट बाबा केदारनाथ पर लेखन कार्य जहां पूर्ण हो चुका है, वहीं सारनाथ पर एक डॉक्यूमेंटरी लेखन का कार्य कर रहे हैं।
विज्ञापन
डॉ. बोधिसत्व ने शनिवार को ‘अमर उजाला’ के साथ लेखन से जुड़े कई बिंदुओं पर बातचीत की। मूल रूप से सुरियावां ब्लॉक के भिखारीरामपुर गांव निवासी बोधिसत्व लंबे समय से सीरियल और फिल्म लेखन से जुड़े रहे हैं। मुंबई में रहकर वह लेखन कार्य करते हैं। ‘आम्रपाली’ से लेकर ‘देवों के देव... महादेव’ सीरियल और फिर ‘शिखर’ जैसी फिल्म तक उनके सधे लेखन की पूरी दुनिया दाद देती है। एक निजी आयोजन में शामिल होने आए डॉ. बोधिसत्व ने साहित्य और सीरियल लेखन में फर्क भी बताए। कहा कि सीरियल लेखन में लोक अभिरुचि आपकी अभिरुचि से सीधे जुड़ती है। इसे निर्धारित समयावधि में रुचिकर ढंग से समायोजित करना पड़ता है, जबकि साहित्य लेखन में समय का कोई बंधन नहीं रहता है। अधिकतम एक मिनट या कुछ ज्यादा के विज्ञापन में एक पूरी कहानी को कह जाने की चुनौती लेखन में अलग रोमांच पैदा करती है। डॉ. बोधिसत्व द्वारा लिखा गया सीरियल ‘चंद्रनंदिनी’ आगामी 10 अक्टूबर से प्रसारित होगा। बताया कि मूलरूप से चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन पर आधारित सीरियल की कहानी में पारिवारिक ड्रामा प्रमुख होगा। इसके अलावा कैलाश खेर के प्रोजेक्ट बाबा केदारनाथ पर लेखन कार्य जहां पूर्ण हो चुका है, वहीं सारनाथ पर एक डॉक्यूमेंटरी लेखन का कार्य कर रहे हैं।
विज्ञापन