{"_id":"6ad123e2bf2ac2576c0b06da","slug":"high-mast-lights-illuminate-even-during-the-day-while-the-electricity-corporations-arrangements-are-in-the-dark-bhadohi-news-c-191-1-gyn1003-150092-2026-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: हाईमास्ट लाइटों से दिन में भी उजाला, बिजली निगम के इंतजाम अंधेरे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: हाईमास्ट लाइटों से दिन में भी उजाला, बिजली निगम के इंतजाम अंधेरे में
विज्ञापन
सदलुवीर बाजार में दिन के समय जल रही हाई मास्टलाईट। संवाद
- फोटो : credit
ज्ञानपुर। जिले में अलग-अलग निधि व परियोजनाओं से लगीं हाईमास्ट लाइटें बिजली निगम का लोड बढ़ा रही हैं। जिले भर में लगी 45 से 50 हाईमास्ट लाइट दिन में जलती हैं। गांव में जिम्मेदारों को इसे बुझाने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता से बिजली निगम पर लोड बढ़ रहा है। एक हाईमास्ट लाइट करीब चार से छह 60-60 वॉट के बल्ब लगे होते हैं। वह पूरे दिन में एक यूनिट बिजली उठाती है। इस लिहाज से देखा जाए तो हर दिन करीब 25 यूनिट और हर माह करीब 750 यूनिट बिजली बर्बाद हो रही है।
जिले में भदोही और ज्ञानपुर विद्युत वितरण खंड से जुड़े 98 फीडरों से दो लाख 46 हजार उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। गांव से लेकर शहरों तक जगह-जगह बाजारों की सुंदरता बढ़ाने और लोगों की सहूलियत के लिए हाईमास्ट लाइटें लगाई गई हैं। यह हाईमास्ट व स्ट्रीट लाइटें सांसद या विधायक निधि के अलावा अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से लगाई गई है। जिले के प्रमुख ग्रामीण बाजारों के अलावा नगरों के प्रमुख तिराहे और चौराहों पर लगे यह हाईमास्ट रात के समय तो बाजार की सुंदरता को बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन दिन में भी ये सूरज को रोशनी दिखाने का काम करते हैं। यह लाइटें जहां होती हैं। संबंधित ग्राम पंचायत या नगर पंचायत की जिम्मेदारी होती है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण इन लाइटों का स्विच बंद नहीं किया जाता। जिसके कारण यह लाइटें दिन में नहीं बुझती। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बृहस्पतिवार को 10 संवाददाताओं के माध्यम से करीब 200 से अधिक हाईमास्ट व स्ट्रीट लाइटों की पड़ताल की। इसमें करीब 50 हाईमास्ट लाइटें दिन में भी जलती मिलीं। 24 घंटे जल रही यह लाइटें निगम पर लोड बढ़ाने का काम कर रही हैं।
एक हाईमास्ट पर 24 घंटे में एक से सवा यूनिट बिजली की खपत
ज्ञानपुर के जेई मनोज कुमार ने बताया कि एक हाईमास्ट लाइट 240 से लेकर 360 वॉट की होती हैं। किसी में चार तो किसी में छह लाइटें लगी होती हैं। एक लाइट करीब 60 वॉट की होती है। बताया कि एक हाईमास्ट लाइट पूरे दिन में करीब एक से सवा यूनिट तक बिजली उठाती है। इस रेशियो से देखा जाए दिन में सुबह छह बजे से शाम 6 बजे तक उजाला रहता है। यानि पूरे दिन में 50 लाइटें 12 घंटे तक अनावश्यक जल रही हैं। एक हाईमास्ट पर आधा यूनिट भी बिजली बर्बाद हो रही है तो 50 हाईमास्ट 25 यूनिट बिजली हर दिन और पूरे माह में 750 यूनिट बिजली बर्बाद हो रही है।
विज्ञापन
केस 1 : लखनो तिराहे पर सांसद निधि से हाईमास्ट लाइट लगाई गई है। इसमें चार लाइटें लगी हैं। बीते चार महीने से यह लाइटें 24 घंटे जलती हैं। देखा जाए तो इससे अब तक 60 यूनिट बिजली बर्बाद हो चुकी है। इसे बुझाने की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है।
केस 2 : देवनाथपुर बाजार में तीन महीने से पंचायत निधि से लगी लाइट 24 घंटे जल रही है। अब तक यह लाइट करीब-करीब 45 यूनिट बिजली बर्बाद हो चुकी हैं। इसे बुझाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होनी चाहिए।
केस 3 : अभोली ब्लॉक के सदलूबीर बाजार में सांसद निधि से लगी हाईमास्ट लाइट 24 घंटे जलती हैं। ग्राम पंचायत को इसे बुझाने की जिम्मेदारी है। तीन महीने में यहां अब तक 45 यूनिट बिजली बर्बाद हो चुकी हैं।
केस 4 : औराई ब्लॉक गिर्दबड़गांव में पंचायत के मद से हाईमास्ट लगी हैं। दो महीने से यह 24 घंटे जल रही है। गांव के जिम्मेदार को बुझाने की जिम्मेदारी है, लेकिन कोई इसकी जहमत नहीं उठाता।
-- --
तीन महीने से बाजार में लगी स्ट्रीट लाइट लगातार जलती हैं, लेकिन कोई इसे बुझाने वाला नहीं है। रात में तो इससे बाजार की सुंदरता बढ़ती है, लेकिन दिन में जलने का कोई मतलब नहीं है। - ओमप्रकाश मौर्या, देवनाथपुर।
जगह-जगह हाईमास्ट लाइट लगाई जा रही है। अच्छी बात है। इससे सुंदरता और सुरक्षा दोनों बढ़ती है, लेकिन दिन में लाइट जलने से ऊर्जा की अनावश्यक बर्बादी होती है। इसे दिन में बुझाना चाहिए। - जेके सिंह, बालीपुर।
-- -- -
निकायों के अलावा ग्रामीण बाजारों में जो भी हाईमास्ट लाइटें लगी होती हैं। उसे बुझाने की जिम्मेदारी भी वहां के स्थानीय प्रशासन की होती है, लेकिन वे ऐसा नहीं करते हैं। इससे बिजली निगम का लोड बढ़ता है। अगर ऐसा है तो सर्वे कराकर जितनी लाइटें जल रही हैं। संबंधित प्रशासन से बिल भी वसूला जाएगा।- मुनीष कुमार, अधीक्षण अभियंता।
विज्ञापन
जिले में भदोही और ज्ञानपुर विद्युत वितरण खंड से जुड़े 98 फीडरों से दो लाख 46 हजार उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। गांव से लेकर शहरों तक जगह-जगह बाजारों की सुंदरता बढ़ाने और लोगों की सहूलियत के लिए हाईमास्ट लाइटें लगाई गई हैं। यह हाईमास्ट व स्ट्रीट लाइटें सांसद या विधायक निधि के अलावा अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से लगाई गई है। जिले के प्रमुख ग्रामीण बाजारों के अलावा नगरों के प्रमुख तिराहे और चौराहों पर लगे यह हाईमास्ट रात के समय तो बाजार की सुंदरता को बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन दिन में भी ये सूरज को रोशनी दिखाने का काम करते हैं। यह लाइटें जहां होती हैं। संबंधित ग्राम पंचायत या नगर पंचायत की जिम्मेदारी होती है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण इन लाइटों का स्विच बंद नहीं किया जाता। जिसके कारण यह लाइटें दिन में नहीं बुझती। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बृहस्पतिवार को 10 संवाददाताओं के माध्यम से करीब 200 से अधिक हाईमास्ट व स्ट्रीट लाइटों की पड़ताल की। इसमें करीब 50 हाईमास्ट लाइटें दिन में भी जलती मिलीं। 24 घंटे जल रही यह लाइटें निगम पर लोड बढ़ाने का काम कर रही हैं।
विज्ञापन
एक हाईमास्ट पर 24 घंटे में एक से सवा यूनिट बिजली की खपत
ज्ञानपुर के जेई मनोज कुमार ने बताया कि एक हाईमास्ट लाइट 240 से लेकर 360 वॉट की होती हैं। किसी में चार तो किसी में छह लाइटें लगी होती हैं। एक लाइट करीब 60 वॉट की होती है। बताया कि एक हाईमास्ट लाइट पूरे दिन में करीब एक से सवा यूनिट तक बिजली उठाती है। इस रेशियो से देखा जाए दिन में सुबह छह बजे से शाम 6 बजे तक उजाला रहता है। यानि पूरे दिन में 50 लाइटें 12 घंटे तक अनावश्यक जल रही हैं। एक हाईमास्ट पर आधा यूनिट भी बिजली बर्बाद हो रही है तो 50 हाईमास्ट 25 यूनिट बिजली हर दिन और पूरे माह में 750 यूनिट बिजली बर्बाद हो रही है।
विज्ञापन
केस 1 : लखनो तिराहे पर सांसद निधि से हाईमास्ट लाइट लगाई गई है। इसमें चार लाइटें लगी हैं। बीते चार महीने से यह लाइटें 24 घंटे जलती हैं। देखा जाए तो इससे अब तक 60 यूनिट बिजली बर्बाद हो चुकी है। इसे बुझाने की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है।
केस 2 : देवनाथपुर बाजार में तीन महीने से पंचायत निधि से लगी लाइट 24 घंटे जल रही है। अब तक यह लाइट करीब-करीब 45 यूनिट बिजली बर्बाद हो चुकी हैं। इसे बुझाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होनी चाहिए।
केस 3 : अभोली ब्लॉक के सदलूबीर बाजार में सांसद निधि से लगी हाईमास्ट लाइट 24 घंटे जलती हैं। ग्राम पंचायत को इसे बुझाने की जिम्मेदारी है। तीन महीने में यहां अब तक 45 यूनिट बिजली बर्बाद हो चुकी हैं।
केस 4 : औराई ब्लॉक गिर्दबड़गांव में पंचायत के मद से हाईमास्ट लगी हैं। दो महीने से यह 24 घंटे जल रही है। गांव के जिम्मेदार को बुझाने की जिम्मेदारी है, लेकिन कोई इसकी जहमत नहीं उठाता।
तीन महीने से बाजार में लगी स्ट्रीट लाइट लगातार जलती हैं, लेकिन कोई इसे बुझाने वाला नहीं है। रात में तो इससे बाजार की सुंदरता बढ़ती है, लेकिन दिन में जलने का कोई मतलब नहीं है। - ओमप्रकाश मौर्या, देवनाथपुर।
जगह-जगह हाईमास्ट लाइट लगाई जा रही है। अच्छी बात है। इससे सुंदरता और सुरक्षा दोनों बढ़ती है, लेकिन दिन में लाइट जलने से ऊर्जा की अनावश्यक बर्बादी होती है। इसे दिन में बुझाना चाहिए। - जेके सिंह, बालीपुर।
निकायों के अलावा ग्रामीण बाजारों में जो भी हाईमास्ट लाइटें लगी होती हैं। उसे बुझाने की जिम्मेदारी भी वहां के स्थानीय प्रशासन की होती है, लेकिन वे ऐसा नहीं करते हैं। इससे बिजली निगम का लोड बढ़ता है। अगर ऐसा है तो सर्वे कराकर जितनी लाइटें जल रही हैं। संबंधित प्रशासन से बिल भी वसूला जाएगा।- मुनीष कुमार, अधीक्षण अभियंता।

सदलुवीर बाजार में दिन के समय जल रही हाई मास्टलाईट। संवाद- फोटो : credit

सदलुवीर बाजार में दिन के समय जल रही हाई मास्टलाईट। संवाद- फोटो : credit

सदलुवीर बाजार में दिन के समय जल रही हाई मास्टलाईट। संवाद- फोटो : credit

सदलुवीर बाजार में दिन के समय जल रही हाई मास्टलाईट। संवाद- फोटो : credit