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आधी आबादी को न्याय दिलाने वाली हेल्पलाइन बंद
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ज्ञानपुर। उत्पीड़न की शिकार महिलाओं और बच्चों के लिए रामबाण साबित होने वाली महिला हेल्पलाइन 181 की सेवा जिले में बंद हो गई है, जबकि साढ़े तीन साल में करीब चार हजार केस निस्तारित हुए। योजना से जुड़े छह कर्मियों को साल भर से मानदेय नहीं मिल सका। इससे वह फांकाकसी से गुजर रहे हैं।
महिला उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों को देखते हुए पूर्ववर्ती सपा सरकार ने 2016 में वुमेन पावर महिला हेल्पलाइन 181 को सूबे के 11 जिलों में शुरू किया। 2017 में भाजपा सरकार बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 75 जिलों में शुरू किया। करीब ढाई साल तक योजना ठीकठाक चली, लेकिन 2019 से ही काम देखे वाली संस्था डांवांडोल होने लगी। करीब एक साल तक कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिला और जून में हेल्पलाइन बंद हो गई। प्रोबेशन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन से साढ़े तीन साल में करीब चार हजार प्रकरण का निस्तारण हेल्पलाइन के माध्यम से हुआ। औसतन हर रोज तीन महिलाओं को न्याय मिलता। विभागीय कर्मियों की माने तो हेल्पलाइन पर फोन आने पर पुलिस से पहले कर्मी मौके पर पहुंच जाते। अगर कोई बच्चा या महिला गाजीपुर में मिलते तो उन्हें गाजीपुर, वाराणसी और भदोही हेल्पलाइन मिलकर गंतव्य को पहुंचाते। योजना से जुड़े वनस्टॉप सेंटर (आशा ज्योति केंद्र) पर औसतन प्रतिदिन 10 से 15 पीड़ित महिलाओं की कॉल भी आते। घरेलू हिंसा से ग्रसित महिलाओं के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाने वाली महिला हेल्पलाइन सेवा बंद होने से अब तत्काल न्याय की उम्मीद भी धूमिल हो गई।
प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी महेंद्र यादव ने बताया कि हेल्पलाइन से महिलाओं को बेहतर मदद मिलती थी, लेकिन संस्था ने ही काम बंद कर दिया। अब शासन स्तर से ही इस पर कुछ निर्णय होगा।
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महिला उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों को देखते हुए पूर्ववर्ती सपा सरकार ने 2016 में वुमेन पावर महिला हेल्पलाइन 181 को सूबे के 11 जिलों में शुरू किया। 2017 में भाजपा सरकार बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 75 जिलों में शुरू किया। करीब ढाई साल तक योजना ठीकठाक चली, लेकिन 2019 से ही काम देखे वाली संस्था डांवांडोल होने लगी। करीब एक साल तक कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिला और जून में हेल्पलाइन बंद हो गई। प्रोबेशन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन से साढ़े तीन साल में करीब चार हजार प्रकरण का निस्तारण हेल्पलाइन के माध्यम से हुआ। औसतन हर रोज तीन महिलाओं को न्याय मिलता। विभागीय कर्मियों की माने तो हेल्पलाइन पर फोन आने पर पुलिस से पहले कर्मी मौके पर पहुंच जाते। अगर कोई बच्चा या महिला गाजीपुर में मिलते तो उन्हें गाजीपुर, वाराणसी और भदोही हेल्पलाइन मिलकर गंतव्य को पहुंचाते। योजना से जुड़े वनस्टॉप सेंटर (आशा ज्योति केंद्र) पर औसतन प्रतिदिन 10 से 15 पीड़ित महिलाओं की कॉल भी आते। घरेलू हिंसा से ग्रसित महिलाओं के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाने वाली महिला हेल्पलाइन सेवा बंद होने से अब तत्काल न्याय की उम्मीद भी धूमिल हो गई।
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प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी महेंद्र यादव ने बताया कि हेल्पलाइन से महिलाओं को बेहतर मदद मिलती थी, लेकिन संस्था ने ही काम बंद कर दिया। अब शासन स्तर से ही इस पर कुछ निर्णय होगा।
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