{"_id":"6209552e09b5ce4e960de6e0","slug":"health-is-not-improving-innocent-in-jd-of-malnutrition-bhadohi-news-vns638472098","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुधर नहीं रही सेहत, कुपोषण की जद में मासूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुधर नहीं रही सेहत, कुपोषण की जद में मासूम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कालीन नगरी में कुपोषण के खिलाफ जंग कमजोर होती जा रही है। स्वास्थ्य और पुष्टाहार विभाग के तमाम दावे भी कागजी साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि दो महीने में अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की संख्या में छह हजार से अधिक की वृद्धि हो गई।
मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कई वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों के अलावा गर्भवती-धात्री महिलाओं की देखभाल के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती-धात्री महिलाओं के साथ ही साथ शून्य से छह साल के बच्चों को चिह्नित कर उनका वजन भी करती हैं। महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक आहार के लिए प्रेरित करती हैं। यह सब ढाक के तीन पात साबित हो रहे हैं। नवंबर 2021 में कुपोषित बच्चों की संख्या 8059 और अति कुपोषित की संख्या 3876 थी। इस बीच जनवरी 2022 में कुपोषित बच्चों की संख्या 11007 और अति कुपोषित की 6125 हो गई। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में गंभीर रूप से कुपोषित 70 बच्चे तीन महीने में भर्ती हो चुके हैं। जहां उपचार के बाद बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो उन्हें घर भेजा गया। इसके साथ ही 15 से अधिक अत्यंत गंभीर बच्चों को मंडलीय अस्पताल भेजा गया। प्रभारी डीपीओ मंजू वर्मा का कहना है कि कुपोषण को रोकने के लिए बाल विकास परियोजनाओं के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर टीकाकरण अभियान चलाया जाता है। बाल विकास परियोजनाओं में पुष्टाहार दिए जाते हैं तथा बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर टीका आदि लगवाता है। कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई है। रेफर हुए बच्चों का यहां पर इलाज किया जाता है।
विज्ञापन
मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कई वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों के अलावा गर्भवती-धात्री महिलाओं की देखभाल के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती-धात्री महिलाओं के साथ ही साथ शून्य से छह साल के बच्चों को चिह्नित कर उनका वजन भी करती हैं। महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक आहार के लिए प्रेरित करती हैं। यह सब ढाक के तीन पात साबित हो रहे हैं। नवंबर 2021 में कुपोषित बच्चों की संख्या 8059 और अति कुपोषित की संख्या 3876 थी। इस बीच जनवरी 2022 में कुपोषित बच्चों की संख्या 11007 और अति कुपोषित की 6125 हो गई। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में गंभीर रूप से कुपोषित 70 बच्चे तीन महीने में भर्ती हो चुके हैं। जहां उपचार के बाद बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो उन्हें घर भेजा गया। इसके साथ ही 15 से अधिक अत्यंत गंभीर बच्चों को मंडलीय अस्पताल भेजा गया। प्रभारी डीपीओ मंजू वर्मा का कहना है कि कुपोषण को रोकने के लिए बाल विकास परियोजनाओं के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर टीकाकरण अभियान चलाया जाता है। बाल विकास परियोजनाओं में पुष्टाहार दिए जाते हैं तथा बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर टीका आदि लगवाता है। कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई है। रेफर हुए बच्चों का यहां पर इलाज किया जाता है।
विज्ञापन