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बजट के अभाव में लटका रोडवेज डिपो का निर्माण
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औराई। लगभग तीन एकड़ रकबे में निर्माणाधीन औराई रोडवेज डिपो का निर्माण बजट के अभाव में अधर में लटक गया है। इससे बहुप्रतीक्षित रोडवेज स्टेशन के शीघ्र तैयार होने की राह देख रहे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। जबकि रोडवेज भवन को दिसंबर 2019 में ही हैंडओवर किया जाना था।
रोडवेज डिपो के भवन निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था को 2.32 करोड़ की लागत में से पहली किस्त के 1.15 करोड़ रुपये मिले, जिससे रोडवेज के मुख्य भवन का कार्य पूरा होने पर संस्था ने दिसंबर 2019 में ही डिपो को हैंडओवर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन छह माह से हो रही लिखा-पढ़ी के बाद भी शासन स्तर से बजट का आवंटन न होने से ढलाई, शौचालय, मुख्य द्वार, बिजली-पानी के कार्य अधर में पड़ गए हैं। बताते हैं कि वर्षों से संचालित उक्त डिपो की हालत काफी हद तक खराब हो जाने के कारण शासन से नवनिर्माण का निर्णय लिया गया। धनराशि आवंटित कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। इधर फोरलेन से सिक्सलेन में परिवर्तित हो रहे वाराणसी-प्रयागराज राजमार्ग पर यात्रियों को आवागमन करने में काफी परेशानी उठानी पड़ी और वे रोडवेज बसों की अपेक्षा निजी बसों से यात्रा करने को विवश होने लगे। वहीं राजमार्ग पर रफ्तार भरने वाले रोडवेज बसें भी औराई में स्टॉपेज को लेकर नाममात्र का कोरम पूरा कर आगे बढ़ती रहीं, लेकिन दीवारयुक्त ओवरब्रिज का निर्माण हो जाने से बसों के आने की समस्या और बढ़ गई। उक्त डिपो से वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही सहित गैर प्रांतीय क्षेत्रों की ओर यात्रा करने वालों की संख्या भी अधिक रहती है, लेकिन डिपो का निर्माण अधर में लटक जाने से यात्रियों की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कार्यदायी संस्था यूपी सिडको के परियोजना प्रबंधक अनिरुद्ध प्रसाद ने बताया कि बजट की मांग की जा रही है। धनराशि मिलते ही निर्माण पूरा कराकर डिपो विभाग को हैंडओवर करा दिया जाएगा।
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रोडवेज डिपो के भवन निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था को 2.32 करोड़ की लागत में से पहली किस्त के 1.15 करोड़ रुपये मिले, जिससे रोडवेज के मुख्य भवन का कार्य पूरा होने पर संस्था ने दिसंबर 2019 में ही डिपो को हैंडओवर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन छह माह से हो रही लिखा-पढ़ी के बाद भी शासन स्तर से बजट का आवंटन न होने से ढलाई, शौचालय, मुख्य द्वार, बिजली-पानी के कार्य अधर में पड़ गए हैं। बताते हैं कि वर्षों से संचालित उक्त डिपो की हालत काफी हद तक खराब हो जाने के कारण शासन से नवनिर्माण का निर्णय लिया गया। धनराशि आवंटित कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। इधर फोरलेन से सिक्सलेन में परिवर्तित हो रहे वाराणसी-प्रयागराज राजमार्ग पर यात्रियों को आवागमन करने में काफी परेशानी उठानी पड़ी और वे रोडवेज बसों की अपेक्षा निजी बसों से यात्रा करने को विवश होने लगे। वहीं राजमार्ग पर रफ्तार भरने वाले रोडवेज बसें भी औराई में स्टॉपेज को लेकर नाममात्र का कोरम पूरा कर आगे बढ़ती रहीं, लेकिन दीवारयुक्त ओवरब्रिज का निर्माण हो जाने से बसों के आने की समस्या और बढ़ गई। उक्त डिपो से वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही सहित गैर प्रांतीय क्षेत्रों की ओर यात्रा करने वालों की संख्या भी अधिक रहती है, लेकिन डिपो का निर्माण अधर में लटक जाने से यात्रियों की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कार्यदायी संस्था यूपी सिडको के परियोजना प्रबंधक अनिरुद्ध प्रसाद ने बताया कि बजट की मांग की जा रही है। धनराशि मिलते ही निर्माण पूरा कराकर डिपो विभाग को हैंडओवर करा दिया जाएगा।
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